रायगढ़ में अदाणी पावर परियोजना की जनसुनवाई में विरोध, ग्रामीणों ने उठाए प्रदूषण और रोजगार के मुद्दे

रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के पुसौर विकासखंड के ग्राम सुपा में मंगलवार को (Adani Power) लिमिटेड की प्रस्तावित फेज-3 ताप विद्युत परियोजना को लेकर आयोजित जनसुनवाई में विकास और पर्यावरण के मुद्दे पर तीखी बहस देखने को मिली।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल (CECB) की ओर से आयोजित इस जनसुनवाई में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने भाग लिया। सुनवाई के दौरान परियोजना के समर्थन से अधिक विरोध के स्वर सुनाई दिए।

प्रस्तावित परियोजना के तहत अदाणी पावर लिमिटेड 2×800 मेगावाट क्षमता का अल्ट्रा सुपर क्रिटिकल थर्मल पावर प्लांट स्थापित करना चाहती है। कंपनी के अधिकारियों ने परियोजना से होने वाले संभावित रोजगार, औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय आर्थिक गतिविधियों की जानकारी दी। उनका दावा था कि इस परियोजना से स्थानीय विकास को गति मिलेगी।

हालांकि, जनसुनवाई के दौरान कई ग्रामीणों और पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने परियोजना का खुलकर विरोध किया। उनका कहना था कि क्षेत्र में पहले से संचालित उद्योगों के कारण वायु प्रदूषण और राख की समस्या गंभीर बनी हुई है। ऐसे में एक और बड़े ताप विद्युत संयंत्र की स्थापना से पर्यावरण और लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। किसानों ने खेती योग्य भूमि, भूजल संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन को लेकर भी चिंता जताई।

ग्रामीणों ने यह आरोप भी लगाया कि उद्योगों की स्थापना के समय स्थानीय युवाओं को रोजगार देने का वादा किया जाता है, लेकिन बाद में अधिकांश नौकरियां बाहरी लोगों को मिल जाती हैं। उनका कहना था कि क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं को अब तक अपेक्षित अवसर नहीं मिले हैं।

जनसुनवाई के दौरान परियोजना से जुड़े पुराने विवाद भी उठे। कुछ वक्ताओं ने पूर्व में “कोरबा वेस्ट” परियोजना के दौरान आदिवासी किसानों की जमीन से जुड़े कथित फर्जी रजिस्ट्री मामले का उल्लेख करते हुए निष्पक्ष प्रक्रिया की मांग की। उनका कहना था कि ऐसे मामलों ने लोगों का भरोसा कमजोर किया है।

छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने कहा कि जनसुनवाई के दौरान प्राप्त सभी आपत्तियों, सुझावों और पक्षों को रिपोर्ट में शामिल कर राज्य सरकार को भेजा जाएगा। अंतिम निर्णय संबंधित सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियमानुसार लिया जाएगा। फिलहाल, ग्राम सुपा की जनसुनवाई ने यह संकेत दिया है कि क्षेत्र के ग्रामीण अब किसी भी नई औद्योगिक परियोजना पर पर्यावरण, रोजगार और भूमि अधिकार जैसे मुद्दों पर स्पष्ट जवाब चाहते हैं।

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