मध्यप्रदेश में ट्रैफिक हवलदार vs पुलिस विभाग, व्हाट्सऐप पर मेडिकल अवकाश मांगकर 15 दिनों तक बनाते रहे रील, विभाग ने कहा- IT सेल में करें काम

Madhya Pradesh Police

शहडोल। मध्यप्रदेश के शहडोल जिले के यूट्यूबर और ट्रैफिक हवलदार विवेकानंद तिवारी और Madhya Pradesh Police सोशल मीडिया में आमने-सामने हो गए हैं। हवलदार का रील मामला लगातार गरमाता जा रहा है।

सोशल मीडिया के माध्यम से हवलदार विवेकानंद तिवारी ने अपने विभाग पर ही गंभीर आरोप लगा दिए हैं। वहीं विभाग भी इस मामले में पीछे नहीं है।

शहडोल पुलिस विभाग के सोशल मीडिया हैंडल फेसबुक के जरिए विवेकानंद तिवारी को जवाब दिया है। जवाब के साथ ही यह सलाह भी दी कि अगर आप सोशल मीडिया में इतने एक्टिव हैं तो मध्यप्रदेश पुलिस की आईटी सेल में काम करें।

यह पूरा मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है।

पहले पढ़ें विवेकानंद तिवारी का पोस्ट

यातायात विभाग में पदस्थ प्रधान आरक्षक विवेकानंद तिवारी ने शहडोल वासियों के लिए फेसबुक पर एक पोस्ट जारी कर लिखा कि ‘मेरे प्यारे शहडोल वासियों प्रिय स्नेही जनों मैं आप सबका ऋणी हूं जो अपार प्रेम एवं स्नेह आप सभी ने मुझे दिया मेरे सभी समर्थक जिन्होंने अपने विचारों से मेरे अंदर सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया, आप सभी को मेरा हृदय से आभार साथियों पिछले तीन महीने से मुझे रात को नींद ना आना, घबराहट बेचैनी होना, किसी सड़क दुर्घटना के बाद मन व्याकुल हो जाना, चिडचिडाहट यह सब मानसिक स्थिति मेरी हो गई है।’

विवेकानंद तिवारी ने आगे लिखा, ’19 मई 2026 को मैंने मोबाइल फोन के जरिए यातायात थाना को सूचना दी कि मैं मेडिकल कॉलेज जा रहा हूं। मेरा स्वास्थ्य सही नहीं है। मैं तीन दिन और तीन रात सोया नहीं हूं। उस वक्त मेरा परिवार मेरी पत्नी और बच्चे अपने मामा के यहां गये थे। मैं घर पर भी अकेला था। मैं मेडिकल कॉलेज गया साइकैटरिस्ट को दिखाया एवं एक महीने की दवाई ली। डॉक्टर ने मुझे एक सप्ताह के लिए रेस्ट करने की सलाह दी। उन दवाइयां में नींद की दवाई भी सम्मिलित थी।’

हवलदार ने आगे लिखा, ‘उक्त मेडिकल पर्ची को मैंने अपने थाना के व्हाट्सएप ग्रुप में जिसमें श्रीमान पुलिस अधीक्षक महोदय भी जुड़े हुए 12:17 में दोपहर में भेज दिया था। इसके बावजूद भी मेरी ड्यूटी 2:00 बजे से जय स्तंभ चौक पर लगाई गई। मैंने तो सोचा कि मैं मेडिकल लीव में हूं। उसके बाद 5:00 बजे के लगभग मेरी ड्यूटी से गैर हाजिरी डाली गई।’

हवलदार विवेकांनद ने आगे लिखा, ‘मैं इन सब बातों को सार्वजनिक नहीं करना चाहता था। मैं अपनी विभाग की गरिमा का पूरा सम्मान करता हूं किंतु मजबूर होकर मुझे आप सभी के समक्ष सारे दस्तावेज प्रस्तुत करने पड़ रहे हैं मैं बिना सूचना के गैर हाजिर नहीं हूं।’

विभाग ने कहा यूट्यूब पर वीडियो बनाना पुलिस की नौकरी नहीं

इस पूरे मामले में शहडोल पुलिस का पक्ष भी कम दिलचस्प नहीं है।

विवेकानंद तिवारी के निलंबन के बाद जब सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में बड़ी संख्या में लोग उतर आए, तब शहडोल पुलिस ने भी सार्वजनिक रूप से अपना पक्ष रखा। पुलिस विभाग ने प्रेस नोट जारी कर कहा कि सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर विवेकानंद के समर्थकों की प्रतिक्रियाएं देखने के बाद यह जरूरी हो गया है कि नागरिकों को भी विभागीय कार्रवाई की वजह बताई जाए।

विभाग का कहना है कि विवेकानंद तिवारी शहडोल के यातायात थाने में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे और हर सरकारी कर्मचारी की तरह उनसे भी यह अपेक्षा थी कि वे तय समय पर ड्यूटी पर उपस्थित रहें और शासन को निर्धारित आठ घंटे की सेवा दें।

पुलिस विभाग का दावा है कि लंबे समय से विभिन्न स्रोतों से ऐसी जानकारी मिल रही थी कि विवेकानंद ने अपनी सोशल मीडिया लोकप्रियता को निजी आय का साधन बना लिया है।

विभाग के मुताबिक, उन्होंने वीडियो शूटिंग और कंटेंट निर्माण के लिए निजी तौर पर लोगों को नियुक्त किया हुआ था और सोशल मीडिया गतिविधियों को समानांतर आय के स्रोत के रूप में विकसित किया था।

प्रेस नोट में कहा गया है कि इन तथ्यों की पुष्टि भी की जा रही है।

पुलिस का साफ कहना है कि ड्यूटी के समय निजी तौर पर वीडियो शूट करना शासकीय कार्य नहीं माना जा सकता। विभाग का तर्क है कि अगर विवेकानंद की रुचि सोशल मीडिया और जनजागरूकता अभियानों में है, तो उन्हें अपनी सेवाएं पुलिस विभाग के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए देनी चाहिए।

यही वजह है कि शहडोल पुलिस ने उन्हें एक तरह का सुझाव भी दिया है। विभाग ने कहा कि विवेकानंद चाहें तो पुलिस अधीक्षक कार्यालय के मीडिया सेल में काम कर सकते हैं। और यदि वे बड़े स्तर पर सोशल मीडिया के जरिए जनजागरूकता अभियान चलाना चाहते हैं, तो मध्यप्रदेश पुलिस मुख्यालय की सोशल मीडिया सेल में भी अपनी सेवाएं देने के लिए सहमति दे सकते हैं।
पुलिस का कहना है कि एक पुलिसकर्मी का जनता के बीच लोकप्रिय होना विभाग के लिए गर्व की बात है। लेकिन, लोकप्रियता किसी भी कर्मचारी को यह अधिकार नहीं देती कि वह अपने शासकीय दायित्वों की अनदेखी करे या बिना अनुमति ड्यूटी से अनुपस्थित रहे।

अपनी प्रेस नोट में पुलिस विभाग ने विवेकानंद के समर्थकों से भी अपील की है। विभाग ने कहा है कि उनके प्रशंसक विवेकानंद को समझाएं कि वे नियमों के अनुसार अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन करें। साथ ही उनकी प्रतिभा का उपयोग पुलिस विभाग और शासन की योजनाओं को जनता तक पहुंचाने में किया जा सकता है।

दिलचस्प बात यह है कि विभाग ने विवेकानंद की सोशल मीडिया प्रतिभा की तारीफ भी की है। शहडोल पुलिस का कहना है कि बिना शासकीय कार्य किए वेतन प्राप्त करना न तो कानूनी रूप से उचित है और न ही नैतिक रूप से।

क्या मामला है?

दरअसल शहडोल जिले के यातयात थाना में विवेकानंद तिवारी प्रधान आरक्षक के पद पर कार्यरत हैं। विवेकानंद फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब पर यातायात नियमों संबंधी रील बनाते हैं। साथ ही लोगों को समझाइश देते हुए नजर आते हैं।

कई बार चलानी कार्रवाई भी उनके वीडियो में दिखाई देती हैं। अब विवेकानंद तिवारी को सस्पेंड कर दिया गया है। विभाग की ओर से उन पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने नियमों का उल्लंघन किया और ड्यूटी में उपस्थित नहीं हुए।

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नितिन मिश्रा

नितिन मिश्रा फ्रीलांस जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 3 वर्षों का अनुभव है। रायपुर में 2023 से द सूत्र में रिपोर्टर के तौर पर काम किया है। इस दौरान क्राइम, राजनीति, नगर निगम, आंदोलन और जनहित से जुड़ी खबरें की। द सूत्र के बाद सैटेलाइट चैनल TV 24 और ASIAN NEWS में काम किया। इस दौरान नितिन मिश्रा ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, कल्‍चरल, स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज, डिफेंस और ग्राउंड जीरो से रिपोर्टिंग की हैं। वर्तमान में नितिन पत्रकारिता एवं जनसंचार में Ph.D कर रहें हैं।

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