मोदी सरकार के 12 साल: 12 बड़े वादे और हकीकत

Modi Sarkar

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार (Modi Sarkar) आज 12 साल पूरे कर रही है। मई, 2014 में हुए आम चुनाव में भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी। उसे 303 सीटें मिली थीं और तीस साल में पहली बार किसी दल ने अपने दम पर बहुमत हासिल किया था। नरेंद्र मोदी ने 26 मई, 2014 को प्रधानमंत्री पद की शपथ ली थी।

2014 में भारी बहुमत के साथ सत्ता में आई भाजपा ने ‘अच्छे दिन’, विकास और सुशासन के कई बड़े वादे किए थे। इन 12 सालों में सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं, लेकिन विपक्ष और स्वतंत्र विश्लेषकों का आरोप है कि कई बड़े वादे या तो पूरे नहीं हुए या अपने घोषित लक्ष्य से पीछे रह गए।

इन्हीं वादों और घोषणाओं पर एक नजर

रोजगार का वादा: हर साल 2 करोड़ नौकरियां

2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा ने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था। यह दावा चुनावी रैलियों और घोषणापत्र का अहम हिस्सा था। हालांकि बाद के वर्षों में बेरोज़गारी दर को लेकर सरकार को आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।

हालांकि मोदी ने अप्रैल, 2019 में एक टीवी चैनल को दिए इंटरव्यू में इससे इनकार किया था कि उन्होंने पांच साल में दस करोड़ नौकरियां देना का वादा किया था। लेकिन मोदी ने 20 जनवरी, 2018 को जीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में रोजगार के सवाल पर कहा था कि जी टीवी के स्टुडियो के बाहर पकोड़े बेचकर दो सौ रुपये कमाता है, तो आप उसे रोजगार मानेंगे या नहीं।

किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य

फरवरी 2016 में एक किसान रैली में किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करने की घोषणा की गई। सरकार ने कई योजनाएं शुरू कीं, लेकिन लक्ष्य समयसीमा में पूरा न होने को लेकर सवाल उठते रहे।

सबको पक्का घर

15 अगस्त 2014 को लाल क़िले से दिए गए भाषण में “सबके लिए पक्का घर” का वादा किया गया। इससे पहले 11 जून, 2014 को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के अभिभाषण का जवाब देते हुए भी मोदी ने 2022 में आजादी के पचहत्तरवें वर्ष में सबको पक्का मकान देने का वादा किया था।

प्रधानमंत्री आवास योजना के ज़रिए लाखों घर बने, लेकिन आवास की कुल जरूरत के मुकाबले उपलब्धि पर बहस जारी है।

काला धन वापस लाने का दावा

2014 में भाजपा के चुनाव प्रचार में विदेशों से काला धन लाने का वादा किया था। खुद प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि विदेशों से काला धन आ जाए तो देश के हर नागरिक के खाते में 15 लाख रुपये आ सकते हैं। बाद में भाजपा ने इसे “जुमला” बताया गया। विपक्ष इसे बड़ा अधूरा वादा मानता है।

महंगाई पर पूरी तरह नियंत्रण

2013–14 में विपक्ष में रहते हुए भाजपा ने महँगाई को चुनावी मुद्दा बनाया। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते नरेंद्र मोदी ने पेट्रोल और डीजल के बढ़ते दामों को लेकर यूपीए सरकार पर तंज किया था। लेकिन मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने पर महंगाई एक बड़ा मुददा है। बीते 12 दिनों में सरकार ने चार बार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ा दिए हैं। इसका असर महंगाई पर दिख रहा है।

भ्रष्टाचार मुक्त भारत

2014 में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई का वादा भाजपा और उसके प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी की रैलियों का मुख्य नारा था। सरकार का दावा है कि सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ी, वहीं आलोचकों का कहना है कि बड़े मामलों में ठोस नतीजे नहीं दिखे।

शिक्षा पर GDP का 6% खर्च

भाजपा के घोषणापत्र और नई शिक्षा नीति में शिक्षा पर GDP का 6 प्रतिशत खर्च करने की बात दोहराई गई। अब तक यह लक्ष्य कागज़ों तक सीमित रहने का आरोप झेलता रहा है। यही नहीं परीक्षाओं में हो रही धांधली आज एक बड़ा मुद्दा है। नीट जैसी महत्त्वपूर्ण परीक्षा तक के परचे लीक हुए हैं, जिससे लाखों छात्र-छात्राएं प्रभावित हुए हैं।

सबको बेहतर स्वास्थ्य सुविधा

2014 में सभी को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का वादा किया गया। 2018 में आयुष्मान भारत योजना शुरू हुई, लेकिन सार्वजनिक स्वास्थ्य ढांचे और खर्च को लेकर बहस बनी हुई है।

हर घर नल से साफ पानी

15 अगस्त 2019 को ‘जल जीवन मिशन’ के तहत हर घर नल से पानी का ऐलान हुआ। कई इलाकों में काम हुआ, लेकिन देशव्यापी लक्ष्य अभी भी अधूरा बताया जाता है।

भारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की घोषणा

प्रधानमंत्री मोदी ने सितंबर 2014 में ‘मेक इन इंडिया’ लॉन्च किया। उद्देश्य था भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र बनाना। निवेश आया, लेकिन रोज़गार और औद्योगिक हिस्सेदारी को लेकर सवाल बने रहे।

MSP पर डेढ़ गुना दाम और किसानों की आय दोगुना करने का वादा

2016 के बजट में MSP को लागत से डेढ़ गुना करने की बात कही गई। किसानों के संगठनों का कहना है कि ज़मीनी स्तर पर इसका पूरा लाभ नहीं मिला। यही नहीं, मोदी सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुना करने का वादा किया था। हालत यह है कि तीन विवादास्पद कृषि कानूनों के खिलाफ हुए किसानों के आंदोलन के कारण सरकार को उन्हें वापस लेना पड़ा।

100 स्मार्ट सिटी का सपना

2014 में 100 स्मार्ट सिटी बनाने की घोषणा हुई। कुछ शहरों में प्रोजेक्ट आगे बढ़े, लेकिन कई जगह योजनाएं अधूरी या धीमी रहीं। और अब तो सरकार इस योजना का जिक्र करने से भी परहेज करती है।

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