छत्तीसगढ़ को मिला स्थायी DGP: 15 महीने से कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे अरुणदेव गौतम को ही मिली जिम्मेदारी

DGP Arun Deo Gautam

रायपुर। छत्तीसगढ़ में लंबे इंतजार के बाद आखिरकार पूर्णकालिक पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति कर दी गई है। राज्य सरकार ने अरुणदेव गौतम (Arun Deo Gautam) को नया स्थायी DGP नियुक्त किया है, जो 15 महीने से कार्यवाहक डीजीपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।

दरअसल, DGP पद की रेस में 1992 बैच के आईपीएस अरुणदेव गौतम और 1994 बैच के आईपीएस हिमांशु गुप्ता के नाम शामिल थे, लेकिन प्रशासनिक अनुभव और वरिष्ठता के आधार पर गौतम का पलड़ा भारी माना जा रहा था।

DG कॉन्फ्रेंस में भी कार्यवाहक डीजीपी ही हुए थे शामिल

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) ने राज्य सरकार को नोटिस जारी कर पूछा था कि अब तक नियमित DGP की नियुक्ति क्यों नहीं की गई है। आयोग ने 3 जुलाई 2018 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला दिया था, जिसमें स्पष्ट कहा गया था कि किसी भी राज्य में ‘प्रभारी’ DGP की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए।

गौरतलब है कि 13 मई 2025 को UPSC ने राज्य सरकार को दो वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों का पैनल भेजा था। सामान्यत: आयोग तीन नामों का पैनल भेजता है, लेकिन इस बार योग्य अधिकारियों की सीमित उपलब्धता के कारण केवल अरुणदेव गौतम और हिमांशु गुप्ता के नाम ही शामिल किए गए थे।

सालभर से यूपीएससी से नाम आने के बाद भी डीजीपी नियुक्ति को लेकर सरकार तय नहीं कर पा रही थी कि किसे डीजीपी बनाया जाए। इतना ही नहीं 28 से 30 नवंबर तक नवा रायपुर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई डीजी कॉन्फ्रेंस में भी मेजबान छत्तीसगढ़ की तरफ से कार्यवाहक डीजीपी ही शामिल हुए।

अशोक जुनेजा के रिटायर होने पर कार्यवाहक डीजीपी बने थे गौतम

पूर्व DGP अशोक जुनेजा के 4 फरवरी 2025 को रिटायर होने के बाद अरुणदेव गौतम को प्रभारी DGP बनाया गया था। इसके बाद से ही स्थायी नियुक्ति को लेकर चर्चा तेज थी।

सुप्रीम कोर्ट ने ‘टी. धंगोपल राव बनाम UPSC’ मामले की सुनवाई के दौरान भी नियुक्ति में देरी पर सख्त टिप्पणी की थी और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की चेतावनी दी थी।

मूल रूप से उत्तरप्रदेश के कानपुर के रहने वाले अरुण देव गौतम ने इलाहाबाद विश्वविद्यालय से राजनीति शास्त्र में एमए और जेएनयू से अंतरराष्ट्रीय कानून में एमफिल किया है। 1992 बैच के आईपीएस अधिकारी गौतम को राष्ट्रपति पुलिस पदक, भारतीय पुलिस पदक और संयुक्त राष्ट्र पुलिस पदक जैसे सम्मान मिल चुके हैं।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मध्यप्रदेश कैडर से की थी। प्रशिक्षु आईपीएस के रूप में जबलपुर और फिर बिलासपुर में उनकी पहली पोस्टिंग हुई। छत्तीसगढ़ गठन के बाद उन्होंने राज्य कैडर चुना और कोरिया, रायगढ़, जशपुर, राजनांदगांव, सरगुजा और बिलासपुर जैसे जिलों में एसपी के रूप में सेवाएं दीं।

नक्सल प्रभावित इलाकों में उनकी कार्यशैली को काफी प्रभावी माना जाता है। साल 2009 में राजनांदगांव नक्सली हमले के बाद उन्हें वहां एसपी बनाकर भेजा गया था। वहीं, 2013 के झीरम घाटी हमले के बाद उन्हें बस्तर आईजी की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जहां उन्होंने विधानसभा चुनावों को सफलतापूर्वक संपन्न कराने में अहम भूमिका निभाई थी।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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