क्यों चर्चा में है इस वीआईपी जिले में भाजपा की हाइप्रोफाइल गुटबाजी?

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रायपुर। छत्तीसगढ़ भाजपा (BJP) से यह हाई प्रोफाइल गुटबाजी की खबर है। यह गुटबाजी प्रदेश के वीआईपी जिले की श्रेणी में गिने जाने वाले कवर्धा में खुल कर देखी जा रही है।

यह पूर्व मुख्यमंत्री और वर्तमान विधानसभा अध्यक्ष डॉ.रमन सिंह और प्रदेश के उपमुख्यमंत्री (गृह) विजय शर्मा का जिला है इसलिए इसे वीआईपी जिला माना जाता है। यहां गुटबाजी की खबरें तो प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने के बाद से ही मिलने लगीं थीं, पर अब यह खुल कर सामने है।

ताजा मामला कवर्धा जिले के पंडरिया की विधायक भावना बोहरा का है। सुश्री बोहरा डॉ.रमन सिंह की भांजी भी हैं। इस समय भावना वोरा बेहद गुस्से में हैं और उन्होंने कवर्धा के कलेक्टर और डीएफओ के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है।

कवर्धा के कलेक्टर हैं गोपाल वर्मा। गोपाल वर्मा , विजय शर्मा के करीबी बताए जाते हैं। ये पिछली कांग्रेस सरकार में ही आईएएस बने थे। उससे पहले राज्य के जीएसटी विभाग में पदस्थ थे।

ताजा मामला दिलचस्प है।

इसी महीने कवर्धा में भोरमदेव जंगल सफारी का उद्घाटन हुआ। कवर्धा के लिए ही नहीं प्रदेश के लिए भी यह महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट माना जा रहा है।

इस प्रोजेक्ट के उद्घाटन समारोह में कवर्धा जिले की दो विधानसभा सीटों में से एक पंडरिया की विधायक भावना बोहरा को ही नहीं बुलाया गया।

इस कार्यक्रम में आयोग, बोर्ड से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष, सरपंच, जनपद पंचायत सदस्य और संयुक्त वन प्रबंधन समिति थवरझोल के अध्यक्ष को भी आमंत्रित किया गया, लेकिन भावना बोहरा को नहीं बुलाया गया।

जानकारों का कहना है कि वैसे तो इस प्रोजेक्ट का उद्घाटन मुख्यमंत्री को ही करना चाहिए था। लेकिन, उपमुख्यमंत्री के हाथों उदघाटन होना भी वजनदार है। पर सवाल उठ रहा है कि क्या भावना बोहरा, जो कि उसी जिले की विधायक हैं, को कार्यक्रम में नहीं बुलाना चाहिए था ?

इस सवाल का जवाब कवर्धा में चल रही भारी गुटबाजी तक ले जाता है।

दरअसल इस कार्यक्रम में तो कवर्धा के ही निवासी होने की वजह से डॉ. रमन सिंह को भी बतौर अतिथि होना था, लेकिन खबर है कि उन्हें भी नहीं बुलाया गया। चर्चा है कि भावना बोहरा के बहाने निशाना डॉ.रमन सिंह पर ही है।

भाजपा में चर्चा है कि कवर्धा में वर्चस्व की लड़ाई है।

डॉ. रमन सिंह हैवी वेट हैं, लेकिन कवर्धा से उनके बेटे अभिषेक सिंह को टिकट नहीं मिली और जिस कवर्धा में अभिषेक सिंह का जलवा होता था, वे भी इस कार्यक्रम में नहीं थे।

इस कार्यक्रम की अध्यक्षता वन मंत्री केदार कश्यप ने की और राजनादगांव के सांसद संतोष पांडेय अति विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद थे। भाजपा सूत्र कहते हैं कि कवर्धा में संतोष पांडेय का खेमा भी डॉ.रमन सिंह से दूर है। एक भाजपा नेता ने नाम ना देने की शर्त पर कहा कि संतोष पांडेय ने अतीत में ऐसे अवसर भी देखे हैं जब अभिषेक सिंह मुख्य अतिथि थे और श्री पांडेय कार्यक्रम की अध्यक्षता के लिए आमंत्रित किए गए थे। इन परिस्थितियों ने श्री पांडेय को स्वाभाविक रूप से दूर किया।

कवर्धा भाजपा के सूत्र कहते हैं कि कवर्धा में अब राजनीति और प्रशासन में पूर्ववर्ती प्रभावशाली नेताओं के मुकाबले विजय शर्मा का प्रभाव कहीं अधिक नजर आता है। और कवर्धा भाजपा में स्वाभाविक रूप से विजय शर्मा के समर्थकों और कार्यकर्ताओं की बड़ी फौज है और इस समूह की ताकत भी ज्यादा है।

लोकसभा चुनाव में ऐसी कोशिशें थीं कि अभिषेक सिंह को टिकट मिले लेकिन आरएसएस की पसंद संतोष पांडेय थे और आज वो पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हरा कर राजनांदगांव के सांसद हैं। भूपेश बघेल जैसे हैवी वेट को हरा देने से स्वाभाविक रूप से पार्टी में संतोष पांडेय का अपना वजन भी महत्व के साथ बढ़ा है। अब उस इलाके में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के एक बड़े समूह के साथ संतोष पांडेय की अपनी पहचान और ताकत है।

कवर्धा में सत्ता की राजनीति के प्रेक्षक कहते हैं कि हाल यह है कि कवर्धा में भाजपा तीन हिस्सों में है। एक डॉ. रमन सिंह, तेज तर्रार विधायक भावना बोहरा अब इस हिस्से का प्रमुख चेहरा हैं। दूसरा हिस्सा कांग्रेस के दिग्गज मोहम्मद अकबर को हरा कर विधान सभा पहुंचे उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा जो इस समय प्रदेश में भाजपा का एक बड़ा चेहरा हैं और तीसरे सांसद संतोष पांडेय जो नई ताकत और पहचान के साथ संगठन के चेहरे के रूप में उभरे हैं।

इस मामले में जब विधायक भावना बोहरा से बात की, तो उन्होंने इस पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया। हालांकि खबर यह है कि भावना बोहरा ने इस पूरे मामले की शिकायत पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन तक पहुंचाई है।

कवर्धा कलेक्टर गोपाल वर्मा का फोन स्वीच ऑफ बताया। जबकि कवर्धा वन मंडल के डीएफओ निखिल अग्रवाल से जब इस मामले में पूछा गया कि जंगल सफारी के शुभारंभ कार्यक्रम में पंडरिया विधायक भावना बोहरा को नहीं बुलाया गया। तो डीएफओ ने कहा कि उनके विधायकी क्षेत्र में जंगल सफारी नहीं है। सफारी क्षेत्र मध्यप्रदेश के मंडला और डिंडौरी विधानसभा क्षेत्र में आता है, लेकिन उन्हें नहीं बुलाया गया।

फिलहाल भावना बोहरा के समर्थकों के नाम से सोशल मीडिया पर कलेक्टर और डीएफओ के खिलाफ जो अभियान चल रहा है उस पर नजर डालें तो उसमें मुख्यमंत्री और भावना बोहरा को न बुलाए जाने का आक्रोश तो है लेकिन डॉ.रमन सिंह का कोई जिक्र नहीं है। यह भी दिलचस्प है।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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