नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि NEET परीक्षा में सुधारों को संस्थागत रूप देने की जरूरत है। कोर्ट ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को निर्देश दिया कि वह राधाकृष्णन पैनल और नंदन नीलेकणि समिति की सिफारिशों को लागू करने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में जानकारी दे।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इस मामले में एक नया हलफनामा दाखिल करने को कहा।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा, “राधाकृष्णन कमेटी ने सही कहा है कि यह एक सिस्टम से जुड़ी समस्या है जिसे संस्थागत बनाने की जरूरत है और यही इसका सबसे अहम हिस्सा है। कागज पर तो यह पूरी प्रक्रिया अच्छी लगती है। लेकिन एक परीक्षा होती है और जब तक दूसरी परीक्षा होती है, तब तक हालात बिल्कुल बदल चुके होते हैं।”
केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में क्या बताया?
सुनवाई की शुरुआत में तुषार मेहता ने सुप्रीम कोर्ट को उस प्रक्रिया के बारे में बताया जिसे NEET का प्रश्न-पत्र छपने से लेकर छात्रों तक पहुंचने तक सुरक्षा उपायों के साथ अपनाया गया था।केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि नीट परीक्षा के लिए लागू व्यवस्था पूरी तरह सुरक्षित है और इसमें सेंध लगा पाना मुश्किल है।
कई मॉडरेटर्स यानि प्रश्न तैयार करने वाले और समीक्षा करने वाले विशेषज्ञों) से प्रश्न बैंक तैयार करने को कहा गया, उन्हें यह नहीं पता कि उनमें से कौन-से सवाल प्रश्नपत्र में शामिल होंगे। नीट प्रश्नपत्र ले जाने वाले वाहन में जीपीएस लगा होता है, हर छोटी गतिविधि भी दर्ज होती है।








