देश की प्रमुख आईवियर कंपनी लेंसकार्ट सॉल्यूशंस से जुड़ा बिंदी तिलक विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब देश की अर्थ व्यवस्था चौथे से खिसक कर छठें स्थान पर आ गई है। सवाल सिर्फ एक कंपनी के विवाद का नहीं बल्कि पूरे बाजार का है और दुर्भाग्य यह है हिंदुस्तान में तो आज बाजार भी असहिष्णुता के हमलों का शिकार हो जाता है।
सबसे पहली बात तो यह है कि लेंसकार्ट ने अपनी सीमाएं लांघी हैं। हिंदुस्तान जैसे देश में जहां धार्मिक त्योहारों से भी बाजार को ताकत मिलती हो वहां बाजार ऐसे धार्मिक प्रतीकों से खुद को इस तरह अलग नहीं रख सकता। यहां समाज का सहिष्णु तबका भी ऐसे प्रतीकों को सांस्कृतिक तौर पर स्वीकार करता है। यह नहीं भूलना चाहिए कि हिंदुस्तान में ऐसे प्रतीक सिर्फ धर्म से नहीं बल्कि नागरिक की अपनी पहचान से भी जुड़े हैं। सिर्फ बिंदी या तिलक नहीं पगड़ी और हिजाब जैसे प्रतीकों का व्यक्ति की पहचान से भी रिश्ता है।
अगर लेंस कार्ट के खिलाफ की जा रही राजनीति प्रेरित कार्रवाइयां अनुचित हैं तो लेंस कार्ट भी एक अनावश्यक और अनुचित कदम उठाने का दोषी है।
बाजार का अपना एक तर्क है। वह लाभ, दक्षता, पेशेवरता और समावेशिता पर टिका होता है। ग्राहक सेवा में एकरूपता बनाए रखने के लिए कंपनियां ड्रेस कोड और ग्रूमिंग पॉलिसी बनाती हैं। लेकिन जब यह पॉलिसी धार्मिक आधार पर चयनात्मक हो जाती है, तो वह भेदभाव की शक्ल ले लेती है। दूसरी ओर, विरोध के नाम पर राजनीतिक दलों, संगठनों और सोशल मीडिया का हस्तक्षेप इसे एक साम्प्रदायिक मुद्दा बना रहा है। स्टोर मैनेजर को फटकारना, कर्मचारियों को जबरन तिलक लगाना या बॉयकॉट की मांग करना ये सब बाजार को धर्म के रंग में रंगने की कोशिशें हैं।
बाजार राष्ट्र की अर्थव्यवस्था का इंजन है। जब धर्म इस तरह बाजार में घुसता है, तो यह बाजार की सेहत के लिए अच्छा नहीं होता। इंदौर जैसे शहर में मुस्लिम दुकानदारों को बाजार छोड़ने की धमकी दी जाती है। धर्म देखकर सब्जी-फल खरीदो जैसी मुहिमें चलाई जा रही हैं। जब देश की अर्थव्यवस्था को पहले ही तमाम चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा हो तब ऐसे अनावश्यक विवाद उसके लिए स्वस्थ नहीं होंगे।विश्व बैंक और अन्य रिपोर्ट्स भी दर्शाती हैं कि सामाजिक सद्भाव और स्थिरता के बिना सतत विकास संभव नहीं।
प्रगति का आधार विविधता में एकता है, न कि एकता के नाम पर विविधता को कुचलने में। बाजार को सिर्फ बाजार रहने दीजिए जहां ग्राहक राजा हो, कर्मचारी सम्मानित हो और लाभ सबका साझा हो।











