अनुपपुर। जिले की जीवनदायिनी केवई नदी को बचाने के लिए अब युवाओं ने आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। (Kevai Protest)नदी के संरक्षण को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे कोतमा के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए युवाओं ने बुधवार से जल सत्याग्रह शुरू कर दिया है।
इससे पहले पिछले बुधवार को युवाओं ने SDM को ज्ञापन सौंप कर निष्पक्ष जांच कर रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की थी। प्रशासन द्वारा जांच नहीं किए जाने के बाद युवा चंगेरी में जल सत्याग्रह कर रहें हैं।
दरअसल विधानसभा क्षेत्र कोतमा के छतई, मंटोलिया और उमरदा में प्रस्तावित 3200 मेगावाट थर्मल पावर प्लांट के लिए केवई नदी में बैराज का निर्माण कराया जा रहा है।
आंदोलनकारियों का आरोप है कि केवई नदी पर अवैध गतिविधियां लगातार बढ़ती जा रही हैं, लेकिन प्रशासन मौन साधे हुए है। उनका कहना है कि यह चुप्पी कहीं न कहीं रेत माफियाओं को संरक्षण देने का संकेत देती है। विशेष रूप से चंगेरी क्षेत्र में खुलेआम अवैध रेत उत्खनन जारी है, जिससे नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पर्यावरणीय संतुलन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि केवई नदी पर एक अनिकट का निर्माण पहले से हो चुका है, वहीं 9 नए अवैध बैराज प्रस्तावित हैं। यदि इन संरचनाओं को रोका नहीं गया, तो नदी का अस्तित्व ही संकट में पड़ सकता है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि इन बैराजों के निर्माण से नदी का जल प्रवाह बाधित होगा, भूजल स्तर प्रभावित होगा और आसपास के गांवों में जल संकट गहरा सकता है।
जनसुनवाई में युवाओं ने लगाई थी कलेक्टर से गुहार
बता दें कि इस पूरे मामले को लेकर लगभग 15 दिन पहले भी कलेक्टर कार्यालय में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इससे नाराज होकर अब नागरिकों ने आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है।
उनका कहना है कि यदि समय रहते प्रशासन ने कदम नहीं उठाया, तो यह आंदोलन और उग्र रूप ले सकता है।
स्थानीय लोगों का यह भी कहना है कि केवई नदी न केवल जल का प्रमुख स्रोत है, बल्कि क्षेत्र की जैव विविधता और आजीविका का भी आधार है। अवैध खनन और अनियंत्रित निर्माण गतिविधियों के चलते नदी का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, जिससे मछुआरों, किसानों और आम नागरिकों पर सीधा असर पड़ रहा है।
युवाओं ने दिया था 48 घंटे का अल्टीमेटम
नदी के संरक्षण को लेकर लंबे समय से आवाज उठा रहे कोतमा के सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन की कथित निष्क्रियता के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए 6 मई को कोतमा एसडीएम कार्यालय पहुंचकर अंतिम चेतावनी ज्ञापन सौंपा है।
ज्ञापन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि 48 घंटे के भीतर प्रशासन ने निष्पक्ष जांच समिति गठित कर लिखित आदेश जारी नहीं किया गया, तो 13 मई 2026 से नदी के बीच ‘जल सत्याग्रह’ किया जाएगा।
सैकड़ों गांवों की जीवनदायिनी है केवई
अनूपपुर जिले की जीवनदायिनी मानी जाने वाली केवई नदी छत्तीसगढ़ की पहाड़ियों से निकलकर कोतमा और जैतहरी ब्लॉक के लगभग 60 से 70 गांवों की प्यास बुझाती है। इस नदी के तट पर बसे शिवलहरा, बदरा, कोड़ार और थानगांव जैसे 30 गांव सिंचाई और दैनिक जरूरतों के लिए सीधे तौर पर इसके जल पर ही निर्भर हैं, जबकि आसपास के 25 से ज्यादा गांवों का भू-जल स्तर भी इसी नदी से रिचार्ज होता है।
कोतमा, पसान और भालूमाड़ा जैसे प्रमुख कस्बों और कोयलांचल क्षेत्र की बड़ी आबादी के लिए यह जल का प्राथमिक स्रोत है, जिससे क्षेत्र की लगभग 15 से 20 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचित होती है। ऐतिहासिक शिवलहरा गुफाओं को अपने आंचल में समेटे यह नदी न केवल अनूपपुर की पहचान है, बल्कि हजारों ग्रामीणों की आजीविका का एकमात्र आधार भी है।











