नई दिल्ली। दिल्ली (Delhi) हाईकोर्ट ने शुक्रवार को लेफ्टिस्ट छात्र नेता नेहा बोरा की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) द्वारा जारी “पीस बॉन्ड” (शांति बॉन्ड) नोटिस को चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा कि मजिस्ट्रेट के पास कार्रवाई करने के लिए “पर्याप्त सामग्री” मौजूद थी। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद ने हालांकि SEM को निर्देश दिया कि वे नेहा को सभी संबंधित सामग्री उपलब्ध कराएं।
कोर्ट ने कहा, “मौजूदा मामला सिर्फ अफवाह या सुनी-सुनाई बातों पर आधारित नहीं है, जैसा कि याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील ने दावा किया।”
AISA (सीपीआईएमएल लिबरेशन की छात्र शाखा), जिसकी नेहा अध्यक्ष हैं, ने कहा कि वे वकीलों से सलाह के बाद अगला कदम तय करेंगी। जस्टिस प्रसाद ने नेहा के खिलाफ अलग-अलग पुलिस स्टेशनों में अलग-अलग तारीखों और घटनाओं से जुड़ी तीन जनरल डायरी एंट्रियों का हवाला दिया।
कोर्ट ने कहा, “यह अदालत SEM की कुर्सी पर बैठकर यह नहीं जांच सकती कि सामग्री पर्याप्त थी या नहीं और मजिस्ट्रेट ने सही राय बनाई या नहीं।”
जनरल डायरी एंट्रियां पुलिस स्टेशन क्षेत्र में होने वाली घटनाओं का रोजमर्रा का कालानुक्रमिक रिकॉर्ड होती हैं। कोर्ट ने आगे कहा, “इतना कहना काफी है कि इस अदालत की राय में मजिस्ट्रेट के पास कार्रवाई करने से पहले पर्याप्त सामग्री मौजूद थी…”
कोर्ट ने यह भी नोट किया कि नेहा के खिलाफ छह एफआईआर दर्ज हैं, जो पार्लियामेंट स्ट्रीट, बाराखंभा रोड और कनॉट प्लेस पुलिस स्टेशनों में दर्ज की गई हैं।
नेहा ने गुरुवार को हाईकोर्ट में कहा था कि नागरिकों को राष्ट्रीय झंडा फहराने के लिए अनुमति की जरूरत नहीं होती। उन्होंने BNSS की धारा 126 के तहत जारी SEM नोटिस को रद्द करने की मांग की थी।
धारा 126 SEM को यह शक्ति देती है कि अगर किसी व्यक्ति के शांति भंग करने, सार्वजनिक शांति बिगाड़ने या ऐसी गलत हरकत करने की विश्वसनीय जानकारी हो, जिससे अशांति फैल सकती हो, तो उससे “शांति बनाए रखने” के लिए बॉन्ड भरवाया जा सकता है।
नोटिस में नेहा को 19 अक्टूबर को SEM के सामने पेश होने और यह बताने को कहा गया था कि क्यों न उनसे जांच अवधि के लिए ₹10,000 का पर्सनल बॉन्ड एक जमानतदार के साथ भरवाया जाए। नेहा को 16 अक्टूबर को प्रिवेंटिव डिटेंशन में लिया गया था। उस दिन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने कनॉट प्लेस पर “लहरा दो तिरंगा” मार्च का आह्वान किया था। उन्हें 17 अक्टूबर को रिहा कर दिया गया।
नेहा के वकील गोपाल शंकरनारायणन ने दलील दी कि छात्र नेता कनॉट प्लेस (जहां सभा करने पर प्रतिबंध था) नहीं गई थीं, बल्कि मंडी हाउस गई थीं, इसलिए उनकी डिटेंशन गैरकानूनी थी। पुलिस की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने इस दलील का विरोध किया।
CJP नेता सौरव दास और आशुतोष रांका, जिन पर पीस बॉन्ड तोड़ने का आरोप है, शुक्रवार को मंदिर मार्ग पुलिस स्टेशन में SEM के सामने पेश हुए। रांका ने बाद में पत्रकारों को बताया कि यह जमानतदारों के वेरिफिकेशन की प्रक्रिया से जुड़ा था। उन्होंने कहा, “सब कुछ ठीक रहा और हमें नवंबर के तीसरे सप्ताह में नई तारीख दे दी गई है।”
दास और रांका को बुधवार को एक हफ्ते की जेल के बाद ज्यूडिशियल कस्टडी से रिहा किया गया था।
रांका ने कहा कि CJP नेता क्राइम ब्रांच से एक निश्चित तारीख का इंतजार कर रहे हैं। क्राइम ब्रांच जंतर-मंतर, जिसे डी-नोटिफाई प्रोटेस्ट साइट बनाया गया था, पहुंचने के लिए प्राइवेट प्रॉपर्टी में घुसपैठ के आरोप की जांच कर रही है। वे गुरुवार को क्राइम ब्रांच के सामने पेश नहीं हुए थे और छूट मांगी थी, जो मंजूर कर ली गई।
रांका ने कहा कि विरोध जारी रहेगा, “चाहे हम जेल में हों या बाहर।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने अपने बारे में और इस व्यवस्था के काम करने के तरीके के बारे में बहुत कुछ सीखा है। हम जरूरत के हिसाब से बदलेंगे और विकसित होंगे।”
दास ने कहा, “ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा अपरिहार्य है।”








