रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा (CG Vidhan Sabha) में निंदा प्रस्ताव को लेकर बुलाए गए विशेष सत्र को लेकर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल का आमंत्रण मिलने के बाद कांग्रेस विधायक सत्र में शामिल होंगे और सभी शासकीय कार्यों में भाग लेंगे, लेकिन निंदा प्रस्ताव की संवैधानिकता को लेकर कई सवाल हैं। वहीं, दीपक बैज ने सरकार की मंशा पर ही सवाल उठा दिए हैं।
डॉ. महंत ने कहा कि बस थोड़ी चिंता यह थी कि मुख्यमंत्री ने कहा था निंदा प्रस्ताव लाएंगे। तो निंदा प्रस्ताव कैसे होता है, कैसे ला सकते हैं, कैसे आएगा? कौन सलाहकार है? अनुभवहीन सलाहकार ने उनको सलाह दे दिया कि वो कह दिए कि निंदा प्रस्ताव। निंदा प्रस्ताव किसके खिलाफ लाएंगे? लोकसभा की कार्रवाई खिलाफ। क्या यह संवैधानिक है?
महंत ने कहा कि जब महामहिम का निमंत्रण आया है तो सत्र में जाना ही पड़ेगा। कांग्रेस विधायक सत्र में भाग लेंगे और शासकीय कार्यों में भी सहयोग करेंगे। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने निंदा प्रस्ताव लाने की बात कही थी, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि यह प्रस्ताव किसके खिलाफ और किस प्रक्रिया से लाया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि निंदा प्रस्ताव किसके खिलाफ लाया जाएगा—क्या लोकसभा की कार्यवाही के खिलाफ? उन्होंने सवाल उठाया कि क्या किसी दूसरे सदन में हुई चर्चा को राज्य विधानसभा में इस तरह उठाया जा सकता है। उनके अनुसार संभव है कि किसी अनुभवहीन सलाहकार ने मुख्यमंत्री को इस तरह की सलाह दी हो।
इधर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने भी इस मुद्दे पर सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाए राज्य सरकार?
दीपक बैज ने कहा कि भाजपा को निंदा प्रस्ताव लाना है तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ और केन्द्र सरकार के खिलाफ निंदा प्रस्ताव ले आये। भाजपा एक ऐसा विधेयक जो संसद के दोनो सदनों में पारित हो गया है तथा जिस पर राष्ट्रपति ने हस्ताक्षर कर दिया तथा वह कानून का रूप ले चुका है। उस पर झूठ बोल कर भ्रम फैला रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लागू नहीं करने के लिये मुख्यमंत्री मोदी की दुर्भावना के लिये निंदा प्रस्ताव ले आये। उन्होंने कहा कि उस सत्र में वह स्वयं मौजूद थे।
उन्होंने कहा कि अपनी नाकामियों को छिपाने और जनता को गुमराह करने के लिए यह विशेष सत्र बुलाया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने परिसीमन लागू करने की आड़ में इस मुद्दे को महिला आरक्षण बिल से जोड़ दिया, जिससे यह संदेश जाता है कि महिलाओं के नाम पर केंद्र सरकार अपना राजनीतिक हित साधना चाहती है।
बैज ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में परिसीमन लागू करना चाहती है तो पहले देश में जातिगत जनगणना कराई जाए और उसके आधार पर परिसीमन किया जाए, उसके बाद आरक्षण लागू किया जाए। उनके अनुसार आम जनता इस मुद्दे को समझ रही है।
दीपक बैज ने कहा कि महिलाओं को आरएसएस -भाजपा में लंबे समय तक उपेक्षित रखने तथा उनके बारे में दोयम दर्जे का विचार रखने के लिये आरएसएस एवं भाजपा के खिलाफ निंदा प्रस्ताव आना चाहिये। कांग्रेस ने इस देश की पहली महिला मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति और पहली लोकसभा अध्यक्ष से लेकर अनेक अवसर दिया। भाजपा ने तो केवल महिलाओं का अपमान किया है।
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