रायपुर। हसदेव-अरण्य क्षेत्र में प्रस्तावित तारा कोल ब्लॉक (Tara Coal Block) को लेकर छत्तीसगढ़ की सियासत लगातार गरमाती जा रही है। भाजपा जहां कांग्रेस सरकार पर तारा कोल ब्लॉक की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का आरोप लगा रही है, वहीं केंद्रीय कोयला मंत्रालय के हालिया स्पष्टीकरण के बाद इस पूरे मामले में एक अहम दस्तावेजी सवाल सामने आया है।
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार की आपत्ति के बाद तारा कोल ब्लॉक को कमर्शियल कोल माइन नीलामी से बाहर कर दिया गया था। लेकिन मंत्रालय के अनुसार 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मिले एक पत्र के बाद तारा कोल ब्लॉक को दोबारा नीलामी के लिए तैयार किया गया।
यही 11 दिसंबर 2025 का पत्र अब पूरे विवाद के केंद्र में है। द लेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस पर जब मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से इस पत्र और उसमें लिए गए निर्णय को लेकर सीधे सवाल किया, तो मुख्यमंत्री ने सवाल का सीधा जवाब देने के बजाय कहा- ‘इसकी जानकारी डेट वाइस मीडिया के माध्यम से दे दी गई है।’
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2023 में कांग्रेस सरकार की आपत्ति के बाद रुकी थी नीलामी
तारा कोल ब्लॉक को लेकर भाजपा की ओर से कांग्रेस सरकार पर लगातार सवाल उठाए जाते रहे हैं। भाजपा नेताओं का कहना है कि तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सरकार ने तारा कोल ब्लॉक को आगे बढ़ाने की पहल की थी।
भाजपा ने तारा को लेकर 2011 की वन स्वीकृति और वर्ष 2021 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से केंद्र को भेजे गए पत्र का भी हवाला दिया है।
तभी कोयला मंत्रालय की ओर से जारी स्पष्टीकरण में 2023 की स्थिति को लेकर अलग तस्वीर सामने आती है।
मंत्रालय के मुताबिक, तारा कोल ब्लॉक को कमर्शियल कोल माइन ऑक्शन के सातवें चरण में पेश किया गया था, लेकिन बाद में इसे नीलामी से हटा दिया गया। इसकी वजह के तौर पर मंत्रालय ने बताया कि वर्ष 2023 में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से हसदेव-अरण्य क्षेत्र के कोयला ब्लॉकों को कमर्शियल कोल ऑक्शन से बाहर रखने की मांग की गई थी।
इस तरह मंत्रालय के स्पष्टीकरण के अनुसार, 2023 में तारा की नीलामी आगे बढ़ाने के बजाय उसे रोकने में तत्कालीन छत्तीसगढ़ सरकार की आपत्ति की भूमिका थी।
फिर आया 11 दिसंबर 2025 का पत्र जिसके बाद नीलामी हुई
कोयला मंत्रालय के मुताबिक, मामले में सबसे अहम मोड़ दिसंबर 2025 में आया।
कोयला मंत्रालय के अनुसार, 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से एक नया पत्र केंद्र को मिला। मंत्रालय का कहना है कि इस पत्र में बताया गया कि तारा कोल ब्लॉक लेमरू हाथी कॉरिडोर के बाहर स्थित है और इसे कमर्शियल कोल माइन ऑक्शन के अगले चरण में पेश किया जा सकता है।
इसके बाद तारा कोल ब्लॉक की सीमा में संशोधन किया गया और लेमरू हाथी कॉरिडोर से प्रभावित क्षेत्र को हटाते हुए संशोधित ब्लॉक को नीलामी के लिए पेश किया गया। इसके बाद तारा कोल ब्लॉक को कमर्शियल कोल माइन ऑक्शन के 15वें दौर में शामिल किया गया।
नीलामी में तारा कोल ब्लॉक के लिए नौ बोलियां प्राप्त हुईं और 37.50 प्रतिशत रेवेन्यू शेयर पर इसकी नीलामी हुई।
केंद्र सरकार के अनुसार, इससे राज्य को हर साल 1,200 करोड़ रुपये से अधिक राजस्व मिलने और 8 हजार से ज्यादा रोजगार पैदा होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री साय से द लेंस का सीधा सवाल
इसी दस्तावेजी तथ्य को लेकर द लेंस ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय से सवाल किया।
सवाल था कि भारतीय जनता पार्टी के नेता तत्कालीन कांग्रेस सरकार पर तारा कोल ब्लॉक को आगे बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं, लेकिन कोयला मंत्रालय के मुताबिक 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार के पत्र के बाद तारा को संशोधित कर नीलामी के लिए पेश किया गया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने सवाल का सीधा जवाब नहीं दिया। उन्होंने कहा- ‘इसकी जानकारी डेट वाइस मीडिया के माध्यम से दे दी गई है।’
यानी जिस पत्र की तारीख इस पूरे विवाद में सबसे अहम हो गई है, उसके बारे में मुख्यमंत्री से सीधे सवाल किया गया, लेकिन पत्र की सामग्री और निर्णय के आधार पर उन्होंने कोई विस्तृत जवाब नहीं दिया।
अब इस पूरे मामले में वे दो दस्तावेज हैं, जिनका जिक्र कोयला मंत्रालय ने अपने प्रेस नोट में किया है। 11 दिसंबर 2025 को छत्तीसगढ़ सरकार ने कोयला मंत्रालय को भेजे पत्र में क्या लिखा है? इस पत्र के सार्वजनिक होने के बाद ही तारा कोल ब्लॉक के नीलामी में शामिल होने के सही कारणों का पता लगा सकेगा।










