नई दिल्ली। लोकसभा में जारी गतिरोध अटूट हो चुका है। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव हंगामे के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बगैर स्पीकर ओम बिरला ने ध्वनि मत से पारित करा दिया। परंपरा यही है कि पीएम के भाषण के बाद ही धन्यवाद प्रस्ताव पारित होता है। लेकिन आज यह यानी 5 फरवरी को पीएम मोदी हंगामे के कारण भाषण नहीं दे पाए। इससे पहले 4 फरवरी को भी पीएम ने भाषण नहीं दिया था।
इसको लेकर जब मीडिया में खबरें चलने लगीं तो यह लोकसभा सचिवालय के सूत्रों के हवाले से यह खबर आई कि सदन में पीएम मोदी पर हमला हो सकता था। इन खबरों को लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला ने तीन बजे मूहर लगा दी और बताया कि प्रधानमंत्री जो सदन के नेता हैं, पर कांग्रेस के सदस्य प्रधानमंत्री पर अप्रत्याशित घटना कर सकते थे। इस वजह से मेरी आग्रह पर प्रधानमंत्री सदन में नहीं आए।
यह जानकारी लोकसभा अध्यक्ष ने सदन में तीन बजे, जबकि उससे पहले तीन बार सदन की कार्यवाही स्थगित हो चुकी थी।
सुबह 11 बजे की कार्यवाही में स्पीकर के चेयर पर ओम बिरला ही थे, तब उन्होंने इस पर कुछ नहीं बताया और सदन की कार्यवाही को महज 65 सेकंड में स्थगित कर दिया था। 12 बजे भी ओम बिरला ही सभापति थे। तब भी उन्होंने नहीं कहा और दो बजे तक के लिए कार्यवाही स्थगित कर दी। दो बजे सभापति की कुर्सी में संध्या राय थीं। तब भी कार्यवाही स्थगित हो गई। तीन बजे की कार्यवाही शुरू हुई तो स्पीकर की कुर्सी में ओम बिरला ही थे। उन्होंने तीन बजे बताया कि उनके आग्रह पर ही पीएम मोदी सदन में नहीं आए, क्योंकि उनके साथ अप्रत्याशित घटना हो सकती थी।
दरअसल, पूरा विवाद पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएएम नरवणे की अप्रकाशित एक किताब से शुरू हुआ, जिसमें से कुछ अंश नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लोकसभा में पढ़ना चाहते थे। लेकिन स्पीकर ने उन्हेंं भी नहीं बोलने दिया।
बिना सदन के नेता के धन्यवाद पर अपनी बात रखे राष्ट्रपति का अभिभाषण ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
ऐसा लगभग 22 साल बाद हुआ है। इससे पहले 2004 में तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह का भाषण नहीं हो पाया था, और 1998 में अटल बिहारी वाजपेयी के समय भी ऐसा ही हुआ था।
लोकसभा में पीएम मोदी को जवाब देने का समय तय था, शाम 5 बजे। लेकिन सदन में इतना शोर-शराबा हुआ कि कार्यवाही दिन भर के लिए स्थगित कर दी गई। बीजेपी सांसद मनोज तिवारी ने आरोप लगाया कि विपक्षी सांसद पीएम की सीट पर चढ़ गए, और महिला सांसदों ने उनकी कुर्सी घेर ली।
दूसरी तरफ, कांग्रेस की प्रियंका गांधी ने सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा, ‘जब मोदी सरकार सदन में व्यवधान डालना चाहती है, तो निशिकांत दुबे जैसे सांसदों को आगे करती है। राहुल गांधी को किताब का अंश पढ़ने नहीं दिया जाता, लेकिन दुबे छह किताबें लेकर आते हैं और उनका माइक बंद नहीं होता। यह संसद, लोकतंत्र और जनता का अपमान है। सरकार जनरल नरवणे की किताब की बातें छिपाना चाहती है।’
पूरा मामला पूर्व आर्मी चीफ एम.एम. नरवणे की किताब से जुड़ा है। राहुल गांधी लोकसभा में इसका हवाला देना चाहते थे, लेकिन किताब अभी प्रकाशित नहीं हुई है, इसलिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और गृह मंत्री अमित शाह ने आपत्ति जताई। राहुल को बोलने से रोका गया, और विपक्ष ने कहा कि यह उनके अधिकार का हनन है। इसी गुस्से में विपक्ष ने पीएम को भी बोलने नहीं दिया।
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा, ‘संसद मतलब लोकसभा और राज्यसभा, लेकिन लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने नहीं दिया जा रहा।’
जवाब में जेपी नड्डा ने कहा कि राज्यसभा में लोकसभा की कार्यवाही पर चर्चा नहीं हो सकती।
भाजपा ने भी प्रधानमंत्री पर हमला किए जाने का दावा किया। कांग्रेस ने इस दावे का खंडन किया और कहा कि इसमें कोई सच्चाई नहीं है, साथ ही आश्चर्य जताया कि महिला सांसद प्रधानमंत्री पर हमला करने की साजिश कैसे रच सकती हैं?
कल शाम 5 बजे जब अधिकांश सदस्य प्रधानमंत्री के भाषण की प्रतीक्षा कर रहे थे, तब भी विरोध प्रदर्शन जारी रहा। लगभग आठ या नौ विपक्षी महिला सांसदों ने प्रधानमंत्री की कुर्सी को घेर लिया और ‘सही काम करो’ लिखा बैनर लहराया।
मंत्रियों के अनुरोध पर महिला सांसदों ने अपना घेराव समाप्त कर दिया।सदन को अंततः स्थगित कर दिया गया और प्रधानमंत्री का भाषण रद्द हो गया।
धन्यवाद प्रस्ताव आज दोपहर में विपक्षी सदस्यों की जोरदार नारेबाजी के बीच पारित हो गया। कांग्रेस ने हमले के आरोपों को खारिज कर दिया।
पार्टी के प्रवक्ता अतुल लोंढे पाटिल ने दावा किया कि प्रधानमंत्री का भाषण इसलिए रद्द हुआ क्योंकि वे संसद का सामना करने से डरते हैं। सच्चाई यह है कि वे वास्तविकता से डरते हैं। नरावणे ‘डरावने’ बन गए हैं, यही मुख्य कारण है। इसलिए पीएम संसद का सामना नहीं करना चाहते। सवाल पूछना हमला नहीं है। वे सवालों से बच रहे हैं।
डीएमके प्रवक्ता ए सरावणन ने भी सहयोगी कांग्रेस का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि ऐसी बात हमारे देश में कभी नहीं हो सकती। मुझे लगता है कि बीजेपी इकोसिस्टम और प्रधानमंत्री राहुल गांधी के बयानों को मिली कवरेज से घबरा गए हैं।
कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा, ‘लोक सभा स्पीकर के कार्यालय से चैनलों में प्लांट करवाया जा रहा है कि कांग्रेस पार्टी कल महिला सांसदों को आगे रख कर प्रधानमंत्री पर ‘हमला’ करने की योजना बना रही थी। क्या मोदी सरकार और गोदी पत्रकार यह कहना चाहते हैं कि महिला हिंसक होती है? क्या महिला द्वारा विरोध करना आतंकवाद है? क्या दलित महिला सांसद के खड़े होने से मोदी सरकार गोदी पत्रकार असहज थे? क्या वे उन्हें अछूत मानते हैं? मोदी सरकार और गोदी पत्रकार देश की महिला खासकर दलित महिलाओं से माफी मांगे।’
बीजेपी प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कहा कि कांग्रेस ने अपना असली चेहरा उजागर कर दिया है, जो भारत-विरोधी और हिंसा-समर्थक है। यह वैसे ही है जैसे नक्सली व्यवहार करते थे। लोकतंत्र के नाम पर वे हर विरोधी लोकतांत्रिक कार्य करते थे। अगर कांग्रेस सांसदों ने ऐसा सोचा, तो यह खतरनाक है।
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