लेंस डेस्क। लगता है सदन में जारी गतिरोध से लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी काफी विचलित हो गए हैं। इसका नजारा आज लोकसभा में शोर-शराबे के बीच नजर आया जब विपक्षी सदस्यों को हिदायत देते हुए लोकसभा अध्यक्ष बिरला ने कम से कम दो बार लोकसभा को संसद का उच्च सदन बता दिया…।
उल्लेखनीय है कि हमारे संविधान निर्माताओं ने जो व्यवस्था संविधान में बनाई है उसके अनुच्छेद 79 के मुताबिक संसद के दो सदन होंगे, राज्यसभा और लोकसभा। राज्य सभा को उच्च सदन यानी अपर हाउस और लोकसभा को निचला सदन या लोउर हाउस कहा जाता है।
संवैधानिक पद पर बैठे लोकसभा अध्यक्ष से यह अपेक्षा तो की ही जाती है कि वे सदन को उनके सही नाम से संबोधित करें।

दरअसल राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के दो दिन पहले राष्ट्रीय सुरक्षा के मसले पर पूर्व सैन्य प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशिक किताब के जिक्र करने से शुरू हुआ गतिरोध सत्ता पक्ष और विपक्ष में अभूतपूर्व टकराव में बदल गया है। लोकसभा स्पीकर उन्हें अप्रकाशित किताब के कारवां पत्रिका में प्रकाशित अंश को भी पढ़ने की इजात नहीं दे रहे हैं,
जिसमें 2020 में गलवान में भारत चीन की सेनाओं के बीच हुए टकराव के दौरान के घटनाक्रम के सिलसिले में प्रधानमंत्री मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं।
इसी शोर-शराबे के बीच कल अचानक अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चार महीने से ठंडे बस्ते में पड़े टैरिफ समझौते को अचानक मंजूरी दी है, जिसे लेकर भी राहुल और विपक्ष के नेता सवाल उठा रहे हैं।
आज बुधवार को लोकसभा में केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इस समझौते पर जब बयान दिया तब भी विपक्ष के सदस्य सरकार पर तीखे हमले कर रहे थे।
पीयूष गोयल के भाषण की समाप्त के तुरंत बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला विपक्षी सदस्यों को हिदायत देते हुए यह बोल गए…. माननीय सदस्य गण ये सदन देश के लोकतंत्र का उच्च सदन है और आप सभी दलों ने समय समय पर इस देश के अंदर अलग अलग कालखंड के अंदर सरकार में भी रहे हैं, लेकिन मेरा मत है कि इतनी लंबी सरकार में रहने के बाद भी हम इस उच्च सदन की मर्यादाओं परंपराओं को तोड़ रहे हैं….विरोध का तरीका होता है, विरोध के तरीके और भी हो सकते हैं….।









