छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओम प्रकाश चौधरी ने हस्तलिखित भाषण के जरिये राज्य के अपने दूसरे बजट को मानवीय स्पर्श देने की कोशिश जरूर की है, लेकिन पूरे बजट में इसके अक्स कम ही नजर आते हैं। हालांकि इस पर बहस हो सकती है कि हस्तलिखित भाषण के जरिये वित्त मंत्री आखिर क्या संदेश देना चाहते हैं और किसे? लेकिन उनका यह कदम उनकी उस ‘गति’ से मेल नहीं खाता, जिस पर उन्होंने अपने बजट में खासा जोर दिया है। यह गति (गुड गर्वनेंस, एक्सलरेटेड इन्फ्रास्ट्रक्चर टेकेनोल़जी इंडस्ट्रिलयल ग्रोथ) पूंजीगत व्यय से जुड़ी हुई है, जिसमें 18 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। सरकार का खासा जोर सड़क, पुल और अन्य ढांचागत विकास पर है, लेकिन दूसरी ओर लगता है कि खासतौर से बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य से संबंधित ढांचे के विकास पर अपेक्षित जोर नहीं दिया गया। दरअसल एक बड़ा सवाल तो यही है कि अब 26 हजार करोड़ रुपये से अधिक के हो चुके राज्य के पूंजीगत व्यय के लिए पैसा कहां से आएगा? और क्या यह विकास कल्याणकारी योजनाओं की कीमत पर नहीं होगा? ऐसे समय जब बेरोजगारी एक बड़ा मुद्दा है, इस बजट में रोजगार के नए अवसर पैदा होते नहीं दिख रहे हैं। वित्त मंत्री ने बजट भाषण में खुद को हिंदुत्व से जोड़ कर राजनीतिक संदेश देने से गुरेज नहीं किया जिसके अपने निहितार्थ हैं।
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