पश्चिम बंगाल में मुसलमानों ने हाथ जोड़े तो हिंदू गाय कारोबारियों में क्यों मच गया हड़कंप?

West Bengal

लेंस न्यूज। पश्चिम बंगाल (West Bengal) से एक वीडियो के साथ बंगाली मुसलमानों की तरफ से एक सोशल मीडिया में की गई अपील खूब वायरल हो रही है।

इसमें लिखा है कि ये ऐसी तहरीक है कि सारे मुसलमानों को इस पर अमल करना चाहिए, जिस जानवर के नाम पर लिन्चिंग होती है इसी जानवर को ज्यादा दाम पाने के लिए बकरीद के अवसर पर बेच दिया जाता है, बंगाली मुसलमानों ने गाय के हिंदू कारोबारियों से कहा –  हम लोग इस बार गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे, ये तुम्हारी माता है इसको घर में रखो इसकी पूजा अर्चना करो। इसको मार्केट में मत बेचो जो भी खरीदेगा कुर्बानी के लिए ही खरीदेगा इसलिए आप लोग वापस चले जाइए!’

पश्चिम बंगाल, जहां पिछले कुछ महीनों से राजनीति, धर्म और पहचान की बहस लगातार तेज होती जा रही है। मुसलमानों के इस फैसले ने सिर्फ बंगाल ही नहीं, पूरे देश का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है ‘गाय की कुर्बानी नहीं करेंगे’।

पश्चिम बंगाल ही क्यों ..? देश में मॉब लिंचिंग की घटनाओं को याद कीजिए… याद कीजिए दादरी के अखलाक और नूंह के पहलू खान को,याद कीजिए मध्यप्रदेश के आसिफ बाबू मुल्तानी को। याद कीजिए गलती से गौ तस्कर समझ लिये गये महज 19 साल के आर्यन मिश्रा को,मुरादाबाद का शाहिदीन कुरैशी भी याद होगा, जिसे कथित हिंदू गौ रक्षकों ने पीट पीट कर मार डाला था। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास मार दिये गए इन तीन युवकों को भी याद कीजिए जिन्हें गौ तस्कर मानकर कथित हिंदूवादी संगठनों से जुड़े युवकों ने इतना पीटा कि दो की मौके पर मौत हो गई और तीसरे ने इलाज के दौरान दम  तोड़ दिया था..ऐसी और भी घटनाएं हैं। इन घटनाओं ने देश के मुसलमानों को आतंकित कर के रख दिया।देश की सड़कों पर गौ रक्षकों के नाम पर उन्मादी भीड़ कभी भी किसी की मॉब लिंचिग को तैयार नजर आने लगी।

पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी भाजपा की सरकार ने बहुत सारी रोक टोक के साथ कुर्बानी के लिए गौ  बिक्री की इजाज़त दी है लेकिन बंगाल के मुसलमान भी एक बड़े फैसले के साथ सामने आए हैं।

फैसला है कि अब इस बकरीद में मुसलमान गाय की कुर्बानी नहीं देंगे।

बंगाल के प्रमुख मुस्लिम धर्मगुरुओं ने मुस्लिम समुदाय से अपील की है कि इस बार बकरीद पर गाय की कुर्बानी न दी जाए।

कोलकाता की नखोदा मस्जिद के इमाम मौलाना शफीक कासमी ने खुले तौर पर कहा, ‘हमें बीफ खाना ही क्यों चाहिए? हिंदू गाय की पूजा करते हैं।‘ उन्होंने मुस्लिम समुदाय से अपील की कि गाय की जगह बकरियों और भेड़ों की कुर्बानी दी जाए। इतना ही नहीं, उन्होंने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय संरक्षित पशु घोषित करने की भी मांग कर दी।

सिर्फ कोलकाता की नखोदा मस्जिद ही नहीं, बल्कि बंगाल के ज्यादातर इस्लामी सेंटरों से भी ऐसी ही अपील सामने आई।

पीरजादा तोहा सिद्दीकी ने भी मुस्लिम समुदाय से गाय की कुर्बानी न देने की बात कही।

मुसलमानों का यह फैसला हुआ और बंगाल में हड़कंप मच गया। हड़कंप इसलिए मचा क्योंकि बंगाल में गौ कारोबार में बड़ी संख्या में हिंदू शामिल हैं।

बंगाल में भाजपा सरकार के रोक टोक के साथ गौ बिक्री की इजाज़त और मुसलमानों के इस फैसले से उन गौ कारोबारी हिंदुओं के सामने मुसीबत खड़ी हो गई जो बकरीद के इंतजार में गायें पालते थे।

किसी को बहन को शादी के लिए अपनी गाएँ बिकने का इंतजार था किसी को घर की और जरूरतों के लिए। इन हिंदुओं की तो जीविका ही कुर्बानी के लिए गाय की बिक्री है। इनकी तकलीफ के ढेरों वीडियो बंगाल से आने लगे हैं।

अब सवाल ये उठता है कि अचानक बंगाल में ऐसा माहौल क्यों बन रहा है?

दरअसल, इसके पीछे बंगाल की नई भाजपा सरकार का वो आदेश है जिसने पूरे राज्य में नई बहस छेड़ दी है।

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली बंगाल सरकार ने 13 मई को एक नोटिफिकेशन जारी किया। इसमें कहा गया कि बिना फिटनेस सर्टिफिकेट के पशु वध नहीं किया जा सकेगा। साथ ही खुले में पशु वध पर भी सख्त रोक लगाने की बात कही गई।

सरकार का कहना है कि ये आदेश 1950 के पशु वध नियंत्रण कानून और हाई कोर्ट के पुराने आदेशों के आधार पर जारी किया गया है।

बंगाल सरकार के गृह विभाग ने ‘पश्चिम बंगाल पशु वध नियंत्रण अधिनियम, 1950’ के तहत केवल 14 वर्ष से अधिक उम्र के या स्थायी रूप से अक्षम हो चुके पशुओं को ही वध के लिए उपयुक्त माना है। इसके लिए नगर पालिका या पंचायत से सरकारी पशु चिकित्सक के माध्यम से फिटनेस सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य कर दिया गया है।

ऐसे में अगर गाय या गौवंश की कुरबानी देनी है तो उसकी उम्र 14 वर्ष से अधिक होगी और अक्षम पशुओं को ही कुरबानी दी जाएगी। और कुरबानी के धार्मिक नियमों के तहत अनफिट जानवरों की कुर्बानी नहीं दी जा सकती है। यही  वजह है कि मुस्लिम धर्मगुरुओं ने अपील की है कि गाय की कुर्बानी न करें।

बंगाल में बकरीद से पहले मुसलमानों के गाय ना खरीदने के फैसले से गाय के कारोबारी हिंदुओं के आर्थिक हितों पर चोट पहुंची तो वहां इन हिंदुओं में हड़कंप मच गया।

अब हम आपको बताते हैं कि इस देश में बीफ के कारोबार का आंकड़ा क्या कहता है और इस धंधे में कौन शामिल हैं?

भारत बीफ एक्सपोर्ट यानी हिंदुस्तान से विदेशों में बीफ बेचने के धंधे में दुनिया का चौथे नंबर का देश है। मालूम हो कि बीफ में गौ मांस भी शामिल है ।

देश के बीफ एक्सपोर्टर्स में कौन कौन शामिल हैं उनके नाम भी जानिए – अलाना समूह जिसके मालिक इरफान अलाना हैं, एचएमए एग्रो इंडस्ट्रीज मालिक गुलजार अहमद , अल कबीर जिसके मालिक हैं सतीश सबरवाल–अतुल सबरवाल, लुलु ग्रुप के यूसुफ अली ऐसे और भी नाम हैं। इस धंधे में मुसलमान कारोबारी ज्यादा हैं तो हिंदू कारोबारी भी शामिल हैं।

इस लिस्ट में मोदी सरकार के एक दिग्गज मंत्री के बेटे का भी नाम उछला है। लेकिन दूसरा आंकड़ा जानिए।बीफ कारोबारियों से करोड़ों का राजनीतिक चंदा  लेने वाली पार्टियों में जो नाम हैं उनमें प्रमुख रूप से शिवसेना और भाजपा शामिल हैं।

राजनीति के लिए , उन्माद और नफरत फैलाने के नाम पर मुसलमानों की मॉब लिंचिग वाले देश में जब धंधा सामने हो तो ऐसी राजनीति पीछे चली जाती है।

बंगाल के मुसलमानों के इस फैसले पर आपका क्या मानना है? क्या धर्म को व्यापार से अलग रखना चाहिए,क्या नफरत का धंधा इस देश की अर्थव्यवस्था पर चोट करता है? सामाजिक सद्भाव को ही बिगाड़ता है?

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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