West Bengal Elections 2026 : पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मालदा जिले में वोटर लिस्ट को लेकर तनाव हिंसक रूप ले लिया है। बुधवार को सप्लीमेंट्री वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के विरोध में उग्र प्रदर्शनकारियों ने न्यायिक अधिकारियों के काफिले पर हमला कर दिया। इस घटना में करीब 100 से अधिक गाड़ियों के शीशे तोड़े गए और तोड़फोड़ की गई।
सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हुई शर्मनाक घटना पर बुधवार को गहरी नाराजगी जताई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की बेंच ने कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) का काम कर रहे सात न्यायिक अधिकारियों को बुधवार को बीडीओ ऑफिस में वोटर लिस्ट विवाद के दौरान हजारों लोगों ने घेर लिया और पूरे नौ घंटे तक बंधक बनाकर रखा। इस दौरान उन्हें खाना-पानी तक नहीं दिया गया। अदालत ने इस घटना को सोची-समझी और भड़काऊ बताया तथा कहा कि इसका मकसद न्यायिक अधिकारियों का मनोबल गिराना और चुनावी प्रक्रिया को जानबूझकर बाधित करना है। कोर्ट ने राज्य में कानून-व्यवस्था पूरी तरह ढह जाने पर चिंता जताते हुए गृह सचिव और डीजीपी समेत वरिष्ठ अधिकारियों से उनकी निष्क्रियता पर जवाब मांगा है
क्या हुआ मालदा में?
मालदा के कालियाचक इलाके में सात न्यायिक अधिकारी (जिनमें तीन महिला जज भी शामिल हैं) वोटर लिस्ट से संबंधित मामलों की सुनवाई के लिए गए थे। स्थानीय लोगों ने इन अधिकारियों को घेर लिया और काफिले को रोकने की कोशिश की। प्रदर्शनकारियों ने पत्थरबाजी की, बांस की लाठियां फेंकी और गाड़ियों की खिड़कियां तोड़ दीं। पुलिस ने देर रात हस्तक्षेप कर सभी सात अधिकारियों को सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के दौरान इलाके में काफी तनाव रहा और पुलिस को भारी सुरक्षा के साथ काम करना पड़ा।
क्यों भड़का गुस्सा?
विवाद की वजह है स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत वोटर लिस्ट से नाम हटाना। सूत्रों के अनुसार, पूरे बंगाल में लगभग 60 लाख वोटरों के नामों पर आपत्ति दर्ज की गई थी। इनमें से कई नामों को हटा दिया गया या जांच के दायरे में रखा गया। मालदा समेत कई इलाकों में लोगों का आरोप है कि उनके और उनके परिवार के सदस्यों के नाम बिना वजह सूची से गायब हो गए। विरोध प्रदर्शन इसी सप्लीमेंट्री लिस्ट को लेकर शुरू हुआ, जो बाद में हिंसक हो गया।
चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया
चुनाव आयोग ने इस गंभीर घटना पर रिपोर्ट मांगी है। आयोग का कहना है कि जिन लोगों के नाम हटाए गए हैं, वे SIR ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट को दी गई जानकारी के मुताबिक, कलकत्ता हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस ने बताया कि 60 लाख से ज्यादा आपत्तियों में से बड़ी संख्या पर फैसला हो चुका है। बाकी मामलों पर 7 अप्रैल तक फैसला होने की उम्मीद है।
चुनावी सरगर्मी तेज
इस घटना के बीच पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की रणनीतियां भी तेज हो गई हैं। भवानीपुर सीट से गृह मंत्री अमित शाह खुद भाजपा प्रत्याशी सुवेंदु अधिकारी के नामांकन में शामिल होंगे। भाजपा इस सीट को ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी के मुकाबले के रूप में पेश कर रही है। बहरामपुर से कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी नामांकन दाखिल करेंगे। मुर्शिदाबाद से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी जनसभा करेंगी।
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव दो चरणों में होने हैं 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को वोटिंग, जबकि नतीजे 4 मई को आएंगे, वोटर लिस्ट विवाद और मालदा हिंसा ने चुनावी माहौल को और गर्म कर दिया है।











