“हम जानते थे कौन करेगा चोरी”, कारसेवक संतोष दुबे का बड़ा दावा

अयोध्या | राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर उठे विवाद के बीच राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े पुराने कारसेवक संतोष दुबे ने द लेंस को अयोध्या में दिए इंटरव्यू में कई गंभीर आरोप लगाए हैं। एक विस्तृत इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कथित घोटाले की खबर सुनकर उन्हें वैसी ही पीड़ा हुई जैसे किसी पिता को अपने जवान बेटे की अर्थी उठाते समय होती है।

दुबे ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन को हजारों कार्यकर्ताओं ने अपने खून-पसीने से सींचा था और इसलिए मंदिर या उससे जुड़ी संपत्तियों में किसी भी प्रकार की अनियमितता उनके लिए व्यक्तिगत आघात जैसी है। उन्होंने कहा कि कई दिनों से उन्हें ठीक से नींद नहीं आई और वे इस पूरे घटनाक्रम से बेहद व्यथित हैं।

“हीरे, सोने और चांदी की रामशिलाएं गायब हो गईं”: 2002 की घटना फिर चर्चा में

इस इंटरव्यू में संतोष दुबे ने दावा किया कि राम मंदिर आंदोलन के दौरान देश-विदेश से लाखों रामशिलाएं अयोध्या पहुंची थीं। उनके अनुसार इनमें साधारण ईंटों के अलावा सोने, चांदी, हीरे-जवाहरात और अष्टधातु से बनी विशेष रामशिलाएं भी शामिल थीं। दुबे का आरोप है कि वर्ष 2002 में ऐसी कई बहुमूल्य रामशिलाएं रहस्यमय तरीके से गायब हो गईं। उन्होंने कहा कि उस समय भी शिकायतें की गईं, लेकिन न तो प्रभावी जांच हुई और न ही कोई एफआईआर दर्ज की गई। उनका दावा है कि तत्कालीन प्रशासन और सत्ता में बैठे लोग भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर सके।

“चंपत राय पर पहले दिन से शक था”: ट्रस्ट के गठन पर उठाए सवाल

इस इंटरव्यू में संतोष दुबे ने राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय पर सीधे आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि अयोध्या के कई लोग पहले से आशंकित थे कि ट्रस्ट की व्यवस्था में गड़बड़ियां हो सकती हैं। दुबे का कहना है कि उन्होंने और उनके साथियों ने पहले भी कई बार अपनी चिंताएं व्यक्त की थीं, लेकिन उन्हें गंभीरता से नहीं लिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के गठन में ऐसे लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दी गईं जिन पर पहले से सवाल उठते रहे थे। हालांकि इन आरोपों पर ट्रस्ट की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस इंटरव्यू में सामने नहीं आई।

“एसआईटी नहीं, सीधे कार्रवाई हो”: योगी सरकार से जांच की मांग

कारसेवक संतोष दुबे ने दावा किया कि उन्होंने हाल ही में चार लोगों के खिलाफ नामजद शिकायत भी दी है। उनका कहना है कि मामले की जांच के लिए अलग से एसआईटी बनाने की आवश्यकता नहीं है और उत्तर प्रदेश सरकार चाहे तो सीधे कार्रवाई कर सकती है।

उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा जताते हुए कहा कि अगर निष्पक्ष जांच हुई तो सच्चाई सामने आ जाएगी। दुबे ने यहां तक सुझाव दिया कि राम जन्मभूमि परिसर की संपूर्ण व्यवस्था भारतीय सेना जैसे अनुशासित संस्थान को सौंपने पर भी विचार किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना न रहे।

“अयोध्या में आक्रोश है, सिर्फ नाराजगी नहीं”: आंदोलन के पुराने चेहरे की चेतावनी

इंटरव्यू के अंतिम हिस्से में द लेंस जर्नलिस्ट आवेश तिवारी को अयोध्या में दिए इंटरव्यू में संतोष दुबे ने दावा किया कि अयोध्या में केवल नाराजगी नहीं बल्कि गहरा आक्रोश मौजूद है। उनका कहना है कि यदि आरोपों की निष्पक्ष जांच नहीं हुई तो इसका राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव भी देखने को मिल सकता है। उन्होंने कई संतों और धार्मिक नेताओं की चुप्पी पर भी सवाल उठाए और कहा कि ऐसे मामलों में खुलकर बोलना चाहिए।

बातचीत के अंत में दुबे ने देशवासियों से अपील की कि मामले की निष्पक्ष जांच और जवाबदेही की मांग जारी रखी जाए। उन्होंने कहा कि यदि राम मंदिर और राम जन्मभूमि आंदोलन की विरासत को सुरक्षित रखना है, तो आरोपों की सच्चाई सामने आना जरूरी है।

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