कोरबा। छत्तीसगढ़ के हसदेव अरण्य (Hasdeo Forest) में हजारों पेड़ों की कटाई के खिलाफ कोरबा जिले के बुका में हसदेव महासम्मेलन आयोजित किया गया। रविवार को आयोजित यह महासम्मेलन आदिवासी अधिकारों और राजनीतिक बयानबाजी का बड़ा मंच बन गया।
विस्थापित आदिवासी हसदेव जलाशय संघर्ष समिति के इस सम्मेलन में पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने मंच से जल-जंगल-जमीन और पेशा कानून को लेकर राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला।

टीएस सिंहदेव ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान आदिवासियों को उनका हक दिलाने के लिए पेशा कानून को मजबूती से लागू करने की दिशा में काम किया गया था, लेकिन सरकार बदलते ही यह कानून सिर्फ फाइलों तक सीमित होकर रह गया। उन्होंने कहा कि “जल, जंगल और जमीन पर पहला हक यहां के लोगों का है, कोई सरकार इसे नजरअंदाज नहीं कर सकती।”
सम्मेलन में सिंहदेव ने आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर कई बड़े दावे किए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गांव के तालाबों पर पहला अधिकार ग्रामीणों का तय किया था और मछुवारों के लिए भी ऐतिहासिक फैसले लिए थे। उन्होंने याद दिलाया कि तेंदूपत्ता, सरई, चार जैसे वन उत्पाद सिर्फ संसाधन नहीं बल्कि आदिवासी परिवारों की आजीविका हैं।
उन्होंने मौजूदा सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि स्थानीय लोग आज बांध और जलाशयों में मछली पकड़ने के अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि यह उनका कानूनी हक है। सिंहदेव ने लोगों से कहा कि ‘ढाई साल बाद कांग्रेस की सरकार बनाइए, फिर हक के साथ अपनी मांगें लागू कराइए।’
अपने संबोधन के दौरान सिंहदेव भावुक अंदाज में भी नजर आए। उन्होंने कहा कि आदिवासियों की लड़ाई में कांग्रेस हमेशा साथ खड़ी रही है और आगे भी जब बुलाया जाएगा, वे संघर्ष के लिए मैदान में उतरेंगे।
महासम्मेलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, सांसद ज्योत्सना महंत, पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल, डॉ. प्रेमसाय सिंह, विधायक जनक राम ध्रुव, सामाजिक कार्यकर्ता आलोक शुक्ला सहित कई वरिष्ठ कांग्रेस नेता और बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय के लोग मौजूद रहे।
सम्मेलन के दौरान ‘जल-जंगल-जमीन हमारा हक’ जैसे नारों से पूरा मैदान गूंज उठा और आदिवासी अधिकारों का मुद्दा एक बार फिर प्रदेश की राजनीति के केंद्र में आ गया।
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