लेंस इंटरनेशनल डेस्क।
अमेरिकी मीडिया की भूमिका पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ब्रिटिश अखबार गार्जियन ने दो सूत्रों के हवाले से खुलासा किया है कि न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट को वेनेजुएला (Venezuela) पर अमेरिकी सैन्य हमले की जानकारी शुक्रवार रात को हमले से कुछ ही समय पहले मिल गई थी। इसके बावजूद दोनों अखबारों ने तत्काल कोई खबर प्रकाशित नहीं की।
गार्जियन के मुताबिक, इन प्रतिष्ठित अमेरिकी अखबारों ने यह फैसला इस आधार पर लिया कि यदि खबर प्रकाशित की जाती है तो सैन्य अभियान खतरे में पड़ सकता है और अमेरिकी सैनिकों की जान जोखिम में आ सकती है। इस फैसले ने एक बार फिर उस बहस को तेज कर दिया है कि क्या युद्ध और राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर मीडिया का चुप रहना पत्रकारिता का धर्म है या सत्ता के साथ समझौता।
गार्जियन ने दो सूत्रों का हवाला देते हुए बताया गया है कि न्यूयॉर्क टाइम्स और वाशिंगटन पोस्ट को शुक्रवार रात को वेनेजुएला पर अमेरिकी हमले की जानकारी मिलने से कुछ ही समय पहले इसकी सूचना मिली थी, लेकिन उन्होंने सैन्य अभियान को खतरे में डालने और अमेरिकी सैनिकों को जोखिम में डालने से बचने के लिए तुरंत कुछ भी प्रकाशित नहीं किया।
गार्जियन कहता है कि तथाकथित ‘मुख्यधारा मीडिया’ के साथ-साथ ट्रंप ने भी पत्रकारिता पर हमला किया है, क्योंकि उनका प्रशासन ऐसे समय में पारंपरिक समाचार उद्योग पर हमला जारी रखे हुए है जब यह पतन की ओर है। गौरतलब है कि भारतात में भी ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारतीय मीडिया क्वे रवैये पर तमाम सवाल खड़े हो चुके हैं।
खबर छपने पर फेल हो सकता था ऑपरेशन
खुले विरोध के बावजूद दोनों मीडिया आउटलेट्स ने अपनी कहानियों को कई घंटों के लिए प्रकाशित करना स्थगित कर दिया, क्योंकि कथित तौर पर ट्रम्प प्रशासन ने कहा था कि कवरेज से ऑपरेशन कर रहे अमेरिकी सैनिकों का पर्दाफाश हो सकता था, जिसे अंजाम देने में दो घंटे और 28 मिनट लगे थे।
व्हाइट हाउस, पेंटागन और वाशिंगटन पोस्ट के प्रवक्ताओं ने शुक्रवार शाम को पत्रकारों और अधिकारियों के बीच हुई बातचीत पर कोई टिप्पणी नहीं की, और न्यूयॉर्क टाइम्स के प्रवक्ता ने संपर्क किए जाने पर तत्काल कोई जवाब नहीं दिया।
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