रायपुर। छत्तीसगढ़ के वेदांता प्लांट हादसे में दर्ज एफआईआर की कॉपी सार्वजनिक नहीं किए जाने को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल (Bhupesh Baghel) ने इस मुद्दे पर एक्स पर पोस्ट कर राज्य सरकार और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
भूपेश बघेल ने अपने पोस्ट में आरोप लगाया है कि पत्रकारों द्वारा एफआईआर की कॉपी मांगे जाने पर पुलिस की ओर से यह कहा गया कि ‘ऊपर से मना किया गया है’ और मामले को लेकर ‘रायपुर में बात करने’ की सलाह दी गई। उन्होंने एफआईआर को ‘सेंसिटिव’ बताकर उपलब्ध न कराए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
बघेल ने अपने पोस्ट में पूछा है कि आखिर यह ‘ऊपर’ कौन है, जिसके निर्देश पर एक सार्वजनिक महत्व के मामले में दर्ज एफआईआर को रोका जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब हादसे में कई लोगों की जान गई है, तो जांच से जुड़ी एफआईआर को सार्वजनिक करने में क्या आपत्ति है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने आशंका जताई है कि मामले की संवेदनशीलता का हवाला देकर पारदर्शिता प्रभावित की जा रही है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की है कि एफआईआर को तत्काल सार्वजनिक किया जाए ताकि जांच प्रक्रिया पर किसी तरह का संदेह न रहे।
इस मामले पर राज्य सरकार या प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि, मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों से स्पष्टीकरण की मांग तेज हो गई है।
इस पूरे विवाद के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। विपक्ष जहां पारदर्शिता की मांग कर रहा है, वहीं सरकार की ओर से जांच प्रक्रिया को नियमों के अनुसार आगे बढ़ाने की बात कही जा रही है।
वेदांता समूह के प्लांट में हुए इस हादसे के बाद से ही सुरक्षा मानकों और जांच की प्रक्रिया को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। अब एफआईआर सार्वजनिक न किए जाने को लेकर उठे सवालों ने मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया है।










