RSS पर प्रतिबंध लगाने की USCIRF की सिफारिश की आलोचना, 275 पूर्व जज,राजदूत और सैन्य अधिकारियों का संयुक्त बयान

March 22, 2026 1:01 PM

USCIRF on RSS : अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (USCIRF) की हालिया रिपोर्ट में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश के बाद भारत में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस रिपोर्ट की कड़ी आलोचना करते हुए देश के 275 पूर्व न्यायाधीशों, पूर्व नौकरशाहों और सशस्त्र बलों के पूर्व अधिकारियों ने एक संयुक्त बयान जारी किया है। उन्होंने रिपोर्ट को पूरी तरह पक्षपातपूर्ण, निहित स्वार्थ से प्रेरित और बौद्धिक रूप से कमजोर बताया है।

इन हस्ताक्षरकर्ताओं में 25 सेवानिवृत्त न्यायाधीश, 119 पूर्व नौकरशाह (जिनमें 10 पूर्व राजदूत शामिल हैं) और 131 पूर्व सैन्य अधिकारी हैं। प्रमुख नामों में सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश आदर्श कुमार गोयल और हेमंत गुप्ता, पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत व सुनील अरोड़ा, पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल और पूर्व एनआईए निदेशक योगेश चंद्र मोदी शामिल हैं। यह बयान पूर्व राजदूत भास्वती मुखर्जी और पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव एम मदन गोपाल के समन्वय से तैयार किया गया।

संयुक्त बयान में कहा गया है कि USCIRF की सिफारिशें जैसे RSS से जुड़े लोगों पर पाबंदी, भारतीय नागरिकों की आवाजाही सीमित करना और संपत्ति जब्त करना पूरी तरह पूर्वाग्रह से भरी हैं। ये सिफारिशें बौद्धिक दिवालियापन और विकृत सोच को दिखाती हैं। हस्ताक्षरकर्ताओं ने अमेरिकी सरकार से मांग की है कि रिपोर्ट तैयार करने वालों की पृष्ठभूमि की गहन जांच हो, क्योंकि यह अमेरिकी करदाताओं के पैसे से बनाई गई है और इसमें भारत विरोधी छिपा एजेंडा लगता है। उन्होंने USCIRF की पुरानी आदत पर भी सवाल उठाए कि वह आरएसएस जैसे सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों को बिना पर्याप्त सबूत और संदर्भ के नकारात्मक तरीके से पेश करता है।

बयान में जोर दिया गया कि आरएसएस की जमीनी स्तर पर मजबूत मौजूदगी और समाज सेवा व राष्ट्र निर्माण में योगदान को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आलोचना ठोस सबूतों पर आधारित होनी चाहिए, न कि अनुमानों पर। हस्ताक्षरकर्ताओं ने याद दिलाया कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां मजबूत न्यायिक व्यवस्था, सक्रिय संसदीय निगरानी और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए पर्याप्त कानून मौजूद हैं। ऐसे में किसी भी संगठन या व्यक्ति के लिए धार्मिक स्वतंत्रता का उल्लंघन करके बचना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में संतुलन की कमी साफ दिखती है और यह भारत-अमेरिका संबंधों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश लगती है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 5 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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