नई दिल्ली | उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने निर्वाचन आयोग पर आरोप लगाया है कि उसने उन्हें 16.18 लाख मतदाताओं का विवरण सार्वजनिक न करने का निर्देश दिया था। न्यूज आउटलेट द रिपोर्टर्स कलेक्टिव ने पाया था कि इन मतदाताओं को राज्य की मतदाता सूची में रहस्यमय तरीके से जोड़ा गया था। द रिपोर्ट्स कलेक्टिव ने पाया है कि यूपी सीईओ ने अपने बयान में झूठ बोला। यूपी सीईओ द्वारा बताए गए ECI के निर्देशों में वास्तव में यह अनिवार्य किया गया था कि एसआईआर के दूसरे चरण का संचालन करने वाले सभी राज्य फॉर्म 6 के जरिए मतदाता जोड़ते समय हर आवेदन को सार्वजनिक करें।
ECI ने यह भी निर्देश दिया था कि नाम जोड़ने के ऐसे सभी आवेदन केवल ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होने के बाद स्वीकार किए जाएं, जब दावे और आपत्ति की प्रक्रिया शुरू हो चुकी हो। इन आदेशों के विपरीत, यूपी सीईओ नवदीप रिनवा के अधीन कथित 16.18 लाख मतदाताओं ने ड्राफ्ट सूची तैयार होने से पहले ही अपने फॉर्म 6 आवेदन भर दिए।उस चरण में वैध मतदाताओं को यह भी पता नहीं होता कि उनके नाम ड्राफ्ट सूची से हटा दिए गए हैं और अंतिम मतदाता सूची में शामिल होने के लिए उन्हें फॉर्म 6 से नए सिरे से आवेदन करना होगा।
ड्राफ्ट मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले दायर इन 16.18 लाख आवेदनों का विवरण यूपी के CEO ने अभी तक सार्वजनिक नहीं किया है। इसके बजाय यूपी सीईओ अब और अधिक जोर देकर कह रहे हैं कि उन्हें प्रकट न करने के आदेश मिले हैं।
कहां से आए यह रहस्यमय 16.18 लाख
द कलेक्टिव ने रिपोर्ट किया था कि यूपी सीईओ ने राज्य की मतदाता सूची में जोड़ने के 16.18 लाख आवेदनों का विवरण नहीं बताया था। कानून के तहत यह खुलासा जरूरी है।जांच में द रिपोर्ट्स कलेक्टिव ने दिखाया कि एसआईआर के दौरान इन और अन्य जोड़ने के आवेदनों की राज्य की स्वीकृति दर चौंकाने वाली 96.27 प्रतिशत रही, जो SIR से गुजर रहे किसी अन्य राज्य में नहीं देखी गई। पूरी कहानी यहां पढ़ी जा सकती है।
द रिपोर्ट्स कलेक्टिव ने रिपोर्टिंग के दौरान यूपी सीईओ रिनवा को फोन कर यह समझने की कोशिश की कि यह अवैधता कैसे हुई और यूपी में SIR के इस अविश्वसनीय आंकड़े की व्याख्या मांगी। उस समय रिनवा ने विशिष्ट सवालों का जवाब नहीं दिया और फोन काटकर कहा, “हम आपकी शंकाएं या सवाल हल करने के लिए कंसल्टेंसी सेवाएं नहीं देते।”इसके बाद विस्तृत सवाल भेजे गए, ताकि कहानी के प्रकाशन से पहले रिनवा और दिल्ली स्थित ईसीआई मुख्यालय को जवाब देने का पर्याप्त समय मिले। दोनों ने जवाब नहीं दिया।
कहानी 6 अक्टूबर को सुबह 8:30 बजे प्रकाशित हुई। देश भर की कई विपक्षी पार्टियों और नेताओं ने इसे एसआईआर के हानिकारक होने के और सबूत के रूप में उठाया।उसी शाम 7:02 बजे यूपी सीईओ ने एक्स पर एक बयान जारी कर दावा किया कि कोई अवैधता नहीं हुई है।
अन्य बातों के अलावा रिनवा ने दो महत्वपूर्ण दावे किए :
- उन्होंने पुष्टि की कि 16.18 लाख फॉर्म ड्राफ्ट रोल प्रकाशित होने से पहले एकत्र किए गए थे। उन्होंने कहा कि “ये फॉर्म ECI के 27-10-2025 के निर्देशों के अनुसार एकत्र किए गए थे, जो यूपी समेत अन्य राज्यों में एसआईआर संचालन के लिए जारी किए गए थे।”
- उन्होंने कहा कि निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960 और ईसीआई के निर्देशों के अनुसार केवल उन्हीं नामों को सार्वजनिक किया जाना था जो ड्राफ्ट निर्वाचक नामावली के प्रकाशन के बाद प्राप्त हुए हों।
इससे पुष्टि होती है कि 16.18 लाख आवेदनों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है और यह अतिरिक्त दावा भी किया गया है कि ऐसा ECI मुख्यालय के निर्देशों पर किया गया।
यूपी सीईओ का नया गलत दावा
द रिपोर्ट्स कलेक्टिव ने वह ECI निर्देश निकाल लिया जिसकी सीईओ अपने जवाब में बात करते हैं।यह स्पष्ट है। जो मतदाता ड्राफ्ट सूची में अपना नाम नहीं पाते, उन्हें फॉर्म 6 आवेदन केवल दावे और आपत्ति की अवधि में भरने की अनुमति है। यह अवधि ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित होने के बाद शुरू होती है। निर्देश में यूपी या किसी अन्य राज्य के लिए कोई अपवाद नहीं है, जिससे उन्हें ये फॉर्म पहले स्वीकार करने की अनुमति हो।
ईसीआई के आंतरिक निर्देश कहते हैं कि मतदाता जोड़ने के आवेदन दावे और आपत्ति की अवधि में ही जमा किए जाने चाहिए।निर्देश आगे स्पष्ट रूप से कहता है कि फॉर्म 6 के जरिए समावेशन के सभी आवेदकों का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए। समेकित फॉर्म 6 से बूथ स्तरीय अधिकारियों द्वारा फॉर्म 9 बनाया जाता है और उसे भी सार्वजनिक करना होता है।वही निर्देश स्पष्ट रूप से अनिवार्य करते हैं कि मतदाता जोड़ने के आवेदनों का विवरण सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
यह यूपी सीईओ के उस दावे का खंडन करता है कि वे ECI के आदेशों के तहत काम कर रहे थे।
ECI मैनुअल के विपरीत, जिसे SIR शुरू होने पर हटा दिया गया था, इस कहानी और अन्य के लिए हम जिन निर्देशों का हवाला देते हैं, वे जनता से छिपाए गए हैं। इससे सीईओ जैसे अधिकारी ऐसे दावे कर सकते हैं जिनकी आमतौर पर जांच नहीं हो सकती।










