ट्रंंप टैरिफ से जूझते बजट में किसान, गरीब, निम्न आय वर्ग और पिछड़ों की अनदेखी  

union budget 2026

1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा रविवार को पेश किया गया बजट कर्तव्य भवन में तैयार किया गया पहला बजट है। कुल बजट आकार ₹53.5 लाख करोड़ है। यह बजट वैश्विक अनिश्चितताओं, विशेष रूप से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ के बीच भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने पर केन्द्रित है।

पिछले साल का बजट आयकर स्लैब में बड़े बदलाव , GST रेशनलाइजेशन और मिडिल क्लास राहत पर फोकस था, वहीं, 2026-27 बजट में टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं है, लेकिन कुछ राहतें जैसे विदेश यात्रा/एजुकेशन पर TCS 2% तक घटाना, पर्सनल यूज आयात पर कस्टम ड्यूटी 20% से 10% करना और ITR फाइलिंग समयसीमा बढ़ाना शामिल है।

पूंजीगत व्यय यानी कैपेक्स में निरंतरता है, लेकिन स्केल बढ़ा : 2025-26 में ₹11.2 लाख करोड़, जबकि 2026-27 में ₹12.2 लाख करोड़ (लगभग 9% बढ़ोतरी), प्रभावी कैपेक्स ₹17.1 लाख करोड़ तक। राजकोषीय घाटा 4.4% से घटाकर 4.3% जीडीपी , डेब्ट-टू- जीडीपी 56.1% से 55.6% तक। यह फिस्कल कंसॉलिडेशन का मजबूत संकेत है, 2030 तक 50% (±1%) लक्ष्य के साथ।

इस बजट में भारत के युवा, गरीब किसान, मजदूर, निम्न वर्ग, निम्न मध्यम वर्ग, ग्रामीण जन , महिलाएं आदि गायब हैं। बजट में नया फोकस है मैन्युफैक्चरिंग स्केल-अप, लेगेसी सेक्टर्स रिजुवेनेशन, चैंपियन एमएसएमई आदि पर। बजाटी में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 (ISM 2.0) की लॉन्चिंग की घोषणा की है। यह भारत की सेमीकंडक्टर नीति का दूसरा चरण है, जो ISM 1.0 (2021 में शुरू) की सफलता पर आधारित है। ISM 1.0 का मुख्य फोकस सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन (चिप निर्माण), टेस्टिंग, पैकेजिंग और डिस्प्ले यूनिट्स पर था, जिससे भारत में कई बड़े प्रोजेक्ट्स (जैसे टाटा, माइक्रॉन, आदि) शुरू हुए और सेक्टर की क्षमता बढ़ी।

ISM 2.0 अब वैल्यू चेन के ऊपरी और क्रिटिकल हिस्सों पर शिफ्ट हो गया है, ताकि भारत सिर्फ असेंबली नहीं बल्कि पूरी सप्लाई चेन में आत्मनिर्भर बने। मुख्य उद्देश्य है वैश्विक सप्लाई चेन शॉक्स (जैसे ट्रंप टैरिफ, चीन-US ट्रेड वॉर) से बचाव, आयात निर्भरता कम करना और उच्च-मूल्य वाली टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ना।

सेमीकंडक्टर बनाने वाली मशीनें और रॉ मटेरियल्स अब भारत में बनाए जाएंगे। यह सबसे बड़ा बदलाव है, क्योंकि ISM 1.0 में मुख्य रूप से चिप फैब्स पर फोकस था। चिप डिजाइन से लेकर पूरा सिस्टम भारतीय बौद्धिक संपदा पर आधारित हो। इससे भारत सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग नहीं, बल्कि हाई-वैल्यू डिजाइन और इनोवेशन में, खासकर एआई चिप्स, इलेक्ट्रिकल व्हीकल्स और डिफेन्स आदि के लिए लीडर बनेगा ।

घरेलू और ग्लोबल सप्लाई चेन को रेजिलिएंट बनाना, ताकि ग्लोबल डिसरप्शन से प्रभाव कम हो। चीन और ताइवान के भरोसे नहीं रहना पड़े ! वितता मंत्री ने ऐलान किया है कि इंडस्ट्री के साथ मिलकर रिसर्च सेंटर्स और ट्रेनिंग प्रोग्राम्स चलाए जाएंगे। इससे नई टेक्नोलॉजी विकसित होगी और स्किल्ड वर्कफोर्स जैसे इंजीनियर्स और टेक्निशियन तैयार होंगे।

बजट में ‘ ट्रंप-प्रूफ’ रणनीति साफ दिखती है।  पर्सनल यूज आयात पर कस्टम ड्यूटी 20% से 10% घटाई—ट्रेड बैलेंस सुधार और घरेलू खपत बढ़ाने के लिए। एसईज़ेड  में डोमेस्टिक टैरिफ एरिया विक्सित करने की योजना है।स्पेशल इकोनॉमिक जोन्स यानि  विशेष आर्थिक क्षेत्र  निर्यात-उन्मुख मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस यूनिट्स के लिए बनाए गए स्पेशल जोन हैं, जहां इकाइयों को टैक्स छूट, ड्यूटी-फ्री इंपोर्ट और अन्य इंसेंटिव मिलते हैं।

मुख्य फोकस एक्सपोर्ट पर होता है, इसलिए एसईज़ेड को ड्यूटी-फ्री एक्सपोर्ट जोन माना जाता है। अब वहां डीटीए यानि डोमेस्टिक टेरिफ एरिया को बढ़ावा देने की योजना है।  इसका मतलब  भारत का सामान्य घरेलू बाजार  को एसईज़ेड के लिए खोल देना है। यानी अब  एसईज़ेड  यूनिट द्वारा बनाए गए सामान या सर्विस को भारत के घरेलू बाजार में बेचना आसान होगा। 

सरकार ने तय कि सेल्स पर कंसेशनल ड्यूटी, लेबर-इंटेंसिव सेक्टर्स के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट, टेक्सटाइल मशीनरी मॉडर्नाइजेशन के लिए कैपिटल सपोर्ट दिया जायेगा। सुगम और सस्ते कर्ज दिए जायेंगे।  40,000 करोड़ का बजट होगा   रेयर अर्थ/केमिकल क्लस्टर्स, एमएसएमई  फंड के लिए।

यानी आयात निर्भरता कम कर घरेलू उत्पादन बढ़ाएंगे।  ग्रोथ फंड, टेक्सटाइल बूस्ट, मल्टीलेटरल ट्रेड डाइवर्सिफिकेशन किया जायेगा। यह बजट वैश्विक प्रोटेक्शनिज्म के जवाब में आत्मनिर्भर भारत को मजबूत करने के लिए  है, जहां आयात सब्स्टिट्यूशन और सप्लाई चेन लोकलाइजेशन मुख्य हैं।

ट्रम्प के टैरिफ से सबसे ज्यादा प्रभावित लेबर-इंटेंसिव और ट्रेडिशनल एक्सपोर्ट सेक्टर हैं, जबकि कुछ हाई-टेक सेक्टर (जैसे फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स) को  छूट प्राप्त हैं या कम प्रभावित हैं। टेक्सटाइल्स और अपैरल: सबसे बड़ा प्रभाव। अमेरिकी आयात मांग में 67.8% या $6.6 बिलियन की गिरावट का अनुमान  है।  

तमिलनाडु  का 28% टेक्सटाइल एक्सपोर्ट सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहा है। जेम्स एंड ज्वेलरी का  निर्यात दिसंबर 2025 में  5% गिरा। लेदर  और फुटवियर के  निर्यात में मामूली गिरावट रही।  सीफूड/झींगा निर्यात  प्रभावित प्रभावित हुआ।   

ऑटो कंपोनेंट्स, कार्पेट्स, हैंडीक्राफ्ट्स की कीमत प्रतिस्पर्धा खोने से वॉल्यूम गिरावट हुई।  छूट वाले सेक्टर जैसे  फार्मास्यूटिकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स कम प्रभावित हुए। अमेरिका को निर्यात  में 18-24% गिरावट आई  लेकिन कुल एक्सपोर्ट में 20%+ ग्रोथ हुई।  भारत ने यूरोपीय यूनियन और अन्य देशों को निर्यात पर ध्यान दिया। हालांकि लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों में सैकड़ों हजारों जॉब्स खतरे में आ गए ,खासकर टेक्सटाइल और अपैरल में। भारतीय एक्सपोर्टर्स ने कीमतें नहीं घटाईं, बल्कि अन्य बाजारों  में शिफ्ट किया।

ट्रंप के टैरिफ से निपटने के लिए  बजट  में काउंटर मेजर्स किये गए हैं। ट्रंप टैरिफ के जवाब में भारत ने ट्रंप-प्रूफ स्ट्रैटेजी अपनाई।  यूरोपियन यूनियन -इंडिया ट्रेड डील हुई जिसमें  96.6% गुड्स पर टैरिफ कटौती की गई है। टेक्सटाइल, लेदर, जेम्स, मरीन प्रोडक्ट्स पर जीरो टैरिफ। यह यूएस  पर निर्भरता कम करने का हेज है। पर्सनल यूज आयात पर कस्टम ड्यूटी 20% से 10% घटाई। टेक्सटाइल, लेदर, मरीन प्रोडक्ट्स के लिए ड्यूटी-फ्री इनपुट्स, एक्सपोर्ट पीरियड 6 महीने से 1 साल बढ़ा दिया है। 

 2025-26 में रक्षा बजट 6.81 लाख करोड़ रुपये था, जबकि 2026-27 में इसे बढ़ाकर 7.85 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया, जो 15% की बढ़ोतरी है। कैपिटल आउटले (आधुनिकीकरण के लिए) 1.8 लाख करोड़ से बढ़कर 2.19 लाख करोड़ रुपये हो गया है।

सामाजिक क्षेत्र में पिछले बजट की तुलना में कमी आई है। 2025-26 में कई वेलफेयर स्कीम्स के लिए आवंटित फंड पूरी तरह खर्च नहीं हुए, जैसे एमजीएनआरईजीए और पीएम गरीब कल्याण अन्न योजना को छोड़कर बाकी स्कीम्स में रिवाइज्ड एस्टीमेट्स बजट एस्टीमेट्स से कम रहे।   2025-26 का बजट टैक्स राहत और कंजम्पशन बूस्ट पर केंद्रित था, जबकि 2026-27 का बजट  रेजिलिएंट ग्रोथ और ग्लोबल शॉक्स से बचाव पर केंद्रित है। 

  • लेखक वरिष्‍ठ पत्रकार हैं।

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