हैदराबाद की बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. सिवरंजनी संतोष ने भारतीय बाल चिकित्सा अकादमी (IAP) से इस्तीफा दे दिया है। साथ ही उन्होंने इंस्टाग्राम भी छोड़ दिया है। डॉक्टर ने इस्तीफे का कारण बताया कि संस्था से पर्याप्त समर्थन नहीं मिल रहा था और बच्चों के स्वास्थ्य के मुद्दे पर IAP का रवैया निराशाजनक रहा। डॉ. सिवरंजनी पिछले 8 वर्षों से fake ORS (ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन) के खिलाफ लगातार आवाज उठा रही थीं उन्होंने Kenvue कंपनी (Johnson & Johnson की सहयोगी) द्वारा बनाए जा रहे ORSL और ERZL जैसे उत्पादों पर सवाल उठाए थे, जो बड़े-बड़े अक्षरों में ‘ORS’ लिखकर बेचे जाते थे, जबकि ये असली ORS नहीं थे।
ये उत्पाद चीनी और आर्टिफिशियल स्वीटनर (जैसे Sucralose) से भरे होते थे। डॉक्टरों का कहना था कि डिहाइड्रेशन के समय माता-पिता इन उत्पादों को बच्चों को देते थे, जिससे बच्चों को फायदा होने की बजाय नुकसान हो रहा था। लंबे समय तक इनका इस्तेमाल बच्चों के गट हेल्थ और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है।
8 साल की जंग का नतीजा
डॉ. सिवरंजनी के निरंतर प्रयासों और PIL दायर करने के बाद फरवरी 2025 में FSSAI ने गैर-WHO फॉर्मूले वाले उत्पादों पर ‘ORS’ शब्द इस्तेमाल करने पर रोक लगा दी थी। यह उनके अभियान की बड़ी जीत मानी गई थी। हाल ही में Kenvue कंपनी ने डॉ. सिवरंजनी को कानूनी नोटिस भेजा, जिसमें उनके बयानों को मानहानिकारक बताया गया। डॉक्टर ने आरोप लगाया कि IAP ने इस मामले में उन्हें कोई समर्थन नहीं दिया।
इस्तीफा देते हुए डॉ. सिवरंजनी ने कहा, ‘Tired of fighting alone… यहां रहना अब दम घुटने वाला हो गया है। IAP का नेतृत्व बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा Kenvue जैसे कंपनियों से आने वाले फंड्स की चिंता करता है।’ उन्होंने IAP के हालिया ORS संबंधी पोजीशन स्टेटमेंट से भी असहमति जताई और संस्था में हितों के टकराव का आरोप लगाया।
कई वरिष्ठ डॉक्टरों और चिकित्सा संगठनों ने डॉ. सिवरंजनी का समर्थन किया है। उन्होंने कानूनी नोटिस को डॉक्टरों की आवाज दबाने की कोशिश बताया है।इस्तीफे और इंस्टाग्राम छोड़ने के बाद डॉ. सिवरंजनी ने कहा कि वे बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अपना अभियान स्वतंत्र रूप से जारी रखेंगी। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दों पर बोलने वाले डॉक्टरों को इस तरह दबाया गया तो भविष्य में कोई डॉक्टर आगे आने से हिचकिचाएगा।








