सुप्रीम कोर्ट ने ECI को फटकार लगाई, बोला कमजोर बहाने नहीं चलेंगे, वीडियो पेश करो

नई दिल्ली। कांग्रेस पार्टी के विजयी उम्मीदवार टीडी राजेगौड़ा ने 2023 की वोट गिनती का वीडियो पेश करने की मांग की थी। हालांकि, चुनाव आयोग (ECI) ने दावा किया कि वह वीडियो ट्रेस नहीं कर पा रहा।
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को भारतीय चुनाव आयोग (ECI) को फटकार लगाई। आयोग ने दावा किया था कि वह कर्नाटक के श्रींगेरी विधानसभा क्षेत्र में 2023 की वोट गिनती की वीडियो रिकॉर्डिंग ट्रेस नहीं कर पा रहा।

कोर्ट कांग्रेस नेता टीडी राजेगौड़ा और भाजपा उम्मीदवार डीएन जीवराज के बीच चुनाव विवाद से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रहा था। राजेगौड़ा ने 2023 में श्रींगेरी से महज 201 वोटों के अंतर से चुनाव जीता था।हालांकि, हाल ही में एक रिकाउंट के बाद राजेगौड़ा को सीट से हटा दिया गया और जीवराज को ज्यादा वोट मिलने की घोषणा की गई।
मई में सुप्रीम कोर्ट ने राजेगौड़ा को राहत दी थी और निर्देश दिया था कि उनकी याचिका लंबित रहने तक वे विधायक (MLA) बने रहेंगे।
आज जस्टिस संजय कुमार और जस्टिस संजीव सचदेवा की बेंच ने ECI के इस बयान पर आश्चर्य जताया कि वह 2023 की गिनती का वीडियो ट्रेस नहीं कर पा रहा।

कोर्ट ने कहा:“चुनाव आयोग कैसे कह सकता है कि उसका रिकॉर्ड खो गया? आपका पूरा काम चुनाव कराना है और उसके लिए दस्तावेज रखने चाहिए। आप कैसे कह सकते हैं कि ‘हम ट्रेस करने की कोशिश कर रहे हैं’? आपने उसे चुने हुए उम्मीदवार को दे दिया था। रिकॉर्ड्स की कोई कस्टडी नहीं है। जो भी आपके पास है, अगली तारीख पर पेश करो।

कोर्ट ने नोट किया कि कांग्रेस विधायक ऑब्जर्वर की रिपोर्ट और मूल वोट गिनती तथा हाल की रिकाउंटिंग के वीडियो रिकॉर्डिंग देखना चाहते हैं।जब कोर्ट ने कहा कि वह ECI को ये दस्तावेज और वीडियो पेश करने का निर्देश देगा, तो ECI की ओर से सीनियर एडवोकेट शेषाद्री नायडू ने कहा कि 2023 का वीडियो ट्रेस नहीं हो पा रहा।लेकिन कोर्ट इससे संतुष्ट नहीं हुआ।
मामला अब 15 फरवरी 2027 को सुनवाई के लिए पोस्ट कर दिया गया।भाजपा के डीएन जीवराज ने पहले कर्नाटक हाईकोर्ट में राजेगौड़ा की जीत को चुनौती देते हुए इलेक्शन पेटिशन दायर की थी।

6 अप्रैल को हाईकोर्ट ने पोस्टल बैलेट वोटों के रिकाउंट का आदेश दिया, जिसमें 279 अस्वीकृत पोस्टल बैलेटों की दोबारा जांच शामिल थी।3 मई 2026 को रिटर्निंग ऑफिसर ने संशोधित नतीजा घोषित किया, जिसमें राजेगौड़ा के वोटों में 255 की कमी बताई गई और जीवराज को विजेता घोषित किया गया।

इस घटनाक्रम को राजेगौड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी।
सुप्रीम कोर्ट में अपनी याचिका में राजेगौड़ा ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट ने केवल 279 अस्वीकृत पोस्टल बैलेटों की दोबारा जांच का आदेश दिया था, जबकि रिटर्निंग ऑफिसर ने अवैध रूप से राजेगौड़ा के पक्ष में 562 वैध पोस्टल बैलेटों पर भी दोबारा विचार किया।

उन्होंने हाईकोर्ट के फैसले को भी चुनौती दी और सवाल उठाया कि जब कोर्ट ने जीवराज द्वारा उनके खिलाफ लगाए गए भ्रष्टाचार के आरोपों पर उनके पक्ष में फाइंडिंग दी थी, तो रिकाउंट की जरूरत क्यों पड़ी।उल्लेखनीय है कि जीवराज पर पोस्टल बैलेट पेपर्स से छेड़छाड़ का आपराधिक मामला चल रहा है। हालांकि, कर्नाटक हाईकोर्ट ने इस साल मई में उनके खिलाफ मामले पर स्टे लगा दिया था।

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