नई दिल्ली। मद्रास हाई कोर्ट ने बुधवार को मौखिक रूप से सवाल किया कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को तमिलनाडु में रूट मार्च की अनुमति क्यों नहीं दी जा रही है, जबकि उसे जम्मू-कश्मीर जैसे आतंकवाद प्रभावित इलाकों में भी मार्च निकालने की अनुमति दी जाती है।
अदालती खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के अनुसार, न्यायमूर्ति वी. लक्ष्मीनारायणन ने मौखिक रूप से कहा कि वर्तमान राज्य सरकार हर जुलूस की अनुमति देने से मना कर रही है, चाहे वह द्रविड़ कषगम हो या आरएसएस, जिससे उन्हें अनावश्यक मुकदमेबाजी के लिए अदालत आना पड़ रहा है।
अदालत ने मौखिक रूप से यह भी कहा कि राज्य नागरिकों को अपना दुश्मन मान रहा है और विरोध प्रदर्शनों की अनुमति देने से इनकार कर रहा है। अदालत ने यह भी कहा कि चाहे कोई भी सरकार आए, आरएसएस को उसके मार्च की अनुमति नहीं दी जाती।
ये मौखिक टिप्पणियां आरएसएस के सदस्य वी.जी. जगदीशन द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान की गईं। याचिका में पुलिस को निर्देश देने की मांग की गई थी कि वह उनके प्रार्थना पत्र पर विचार करे और आरएसएस को 18 अक्टूबर, 25 अक्टूबर, 1 नवंबर या किसी अन्य तारीख को वर्दी पहनकर, बैंड के साथ रूट मार्च निकालने और उसके बाद सार्वजनिक सभा आयोजित करने की अनुमति दे।
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एन.एल. राजा ने कहा कि हर साल संगठन को अनुमति देने से मना किया जाता है और उन्हें अदालत का रुख करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि संगठन सिर्फ अपने स्थापना दिवस का जश्न मनाना चाहता है, जो विजयादशमी के साथ मेल खाता है, और रूट मार्च निकालना चाहता है। लेकिन पुलिस कानून-व्यवस्था की समस्या का हवाला देकर अनुमति देने से मना कर रही है।
“आरएसएस जैसे संगठन अदालत आकर अनुमति मांग सकते हैं। लेकिन उन छोटी पार्टियों का क्या होगा जिनके पास अदालत आने की क्षमता नहीं है?”
राजा ने पूछा।
एडवोकेट जनरल विजया नारायण ने हालांकि कहा कि अनुमति केवल इसलिए नहीं दी गई क्योंकि संगठन ने ऐसे स्थान पर रूट मार्च और सार्वजनिक सभा आयोजित करने की अनुमति मांगी थी, जिसे सार्वजनिक सभा के लिए अधिसूचित नहीं किया गया था।
अदालत ने याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ताओं को राज्य के लोक अभियोजक जॉन सथ्यान से मिलकर मुद्दे का समाधान करने का निर्देश दिया। अदालत ने याचिकाकर्ता पक्ष से पांच सदस्यों को अभियोजक से मिलने और शांतिपूर्ण ढंग से सभा आयोजित करने का समाधान निकालने का निर्देश दिया।
अदालत ने सुनवाई को गुरुवार के लिए स्थगित कर दिया और राज्य को शांतिपूर्ण जुलूस की अनुमति देने संबंधी रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा।
यह उल्लेखनीय है कि पहले अदालत ने आरएसएस द्वारा रूट मार्च आयोजित करने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश जारी किए थे। लेकिन इन विस्तृत दिशानिर्देशों के बाद भी राज्य ने 2024 में अनुमति देने से मना कर दिया था, जिससे संगठन को फिर से अदालत का रुख करना पड़ा।
मार्च की अनुमति देते समय अदालत ने मौखिक रूप से कहा था कि पुलिस से जनता और आयोजकों दोनों की सुरक्षा करने की अपेक्षा की जाती है और वह कानून-व्यवस्था की समस्या का हवाला देकर रूट मार्च की अनुमति देने से बच नहीं सकती। अदालत ने कहा था कि वह राज्य की पुलिस से अपेक्षा करती है कि वह भविष्य में कम से कम अदालत के आदेशों का पालन करे और अस्वीकृति के नए और काल्पनिक कारण गढ़कर अदालत को परेशान न करे।









