नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने बुधवार को किसी राजनीतिक पार्टी का हिस्सा बनने से साफ इनकार कर दिया। दीपके ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उनके संगठन का आंदोलन और INDIA ब्लॉक का विरोध-प्रदर्शन एक ही मकसद के लिए है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि CJP एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप के रूप में काम करता रहेगा और किसी राजनीतिक दल का हिस्सा नहीं बनेगा।
यह पूछे जाने पर कि क्या सीजेपी, INDIA ब्लॉक के आंदोलन में शामिल होगा? दीपके ने जवाब दिया कि दोनों का विरोध ज्ञानेश कुमार से जुड़े कथित चुनावी अनियमितताओं के आरोपों को लेकर है। उन्होंने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार चुनावों में गड़बड़ी कर नरेंद्र मोदी को सत्ता में बनाए रखने में मदद कर रहे हैं।
दीपके ने कहा, “सभी प्रदर्शन एक ही मकसद के लिए हैं। हम सभी ज्ञानेश कुमार के चुनावों में कथित धांधली करने और नरेंद्र मोदी को सत्ता में बनाए रखने में मदद करने के तरीके के खिलाफ लड़ रहे हैं।”
उन्होंने कहा, “कॉकरोच जनता पार्टी एक स्वतंत्र प्रेशर ग्रुप है और हमेशा ऐसा ही रहेगा। इसका मतलब यह नहीं है कि हम INDIA ब्लॉक के खिलाफ हैं। INDIA ब्लॉक और हमारे आंदोलन का मकसद एक ही है।” सीजेपी को राजनीतिक पार्टी के तौर पर रजिस्टर कराने की खबरों को भी दीपके ने नकार दिया।
न्यायिक हिरासत पर उठाए सवाल
दीपके का यह बयान CJP के कार्यकर्ताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली में जंतर-मंतर के पास प्रदर्शन के बाद पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद आया है। इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए दीपके ने सरकार पर देश में कथित तौर पर ‘अघोषित आपातकाल’ लागू करने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि राष्ट्रीय ध्वज फहराने के लिए कार्यकर्ताओं को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में क्यों भेजा गया।
दीपके ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संबोधित करते हुए कहा, ‘अगर आप देश में आपातकाल लगाना चाहते हैं तो आधिकारिक तौर पर लगाइए। जंतर-मंतर पर तिरंगा फहराने के लिए लोगों को पांच दिन की हिरासत में रखकर आप अघोषित आपातकाल क्यों चला रहे हैं? देश में तिरंगा फहराना कब से इतना बड़ा अपराध हो गया कि लोगों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया जाए?’
उन्होंने आंदोलन पर ‘अर्बन नक्सलवाद’ के प्रभाव के आरोपों को भी खारिज किया। दीपके ने कहा कि अगर सरकार को किसी तरह की जांच करनी है तो वह जांच कर सकती है। उन्होंने सवाल किया कि बिना आधार के ऐसे आरोप लगाने का क्या मतलब है।
दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल
सौरव दास, आशुतोष रंका और अजिंक्य शिंदे की ओर से पेश अधिवक्ता अभिष्ट हेला ने कार्यकर्ताओं को न्यायिक हिरासत में भेजने के कानूनी आधार पर सवाल उठाए। उन्होंने दिल्ली पुलिस की ओर से बताए गए कारणों को चुनौती देते हुए आरोप लगाया कि असहमति की आवाज को दबाने के लिए एहतियाती कार्रवाई का इस्तेमाल किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को CJP कार्यकर्ताओं को उस समय हिरासत में लिया था जब वे प्रदर्शन करने के लिए जंतर-मंतर में प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कार्यकर्ताओं पर अतिक्रमण का आरोप लगाया गया क्योंकि जंतर-मंतर को निर्धारित प्रदर्शन स्थल की सूची से हटा दिया गया था।
यह घटनाक्रम मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP और विपक्षी दलों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच सामने आया है। ये प्रदर्शन विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों को लेकर किए जा रहे हैं।









