आम आदमी पार्टी (AAP) को राज्यसभा में बड़ा झटका लगा है। राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने सोमवार को AAP के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को आधिकारिक रूप से मंजूर कर लिया। इस फैसले के बाद राज्यसभा में AAP के सदस्यों की संख्या 10 से घटकर मात्र 3 रह गई है, जबकि BJP की संख्या बढ़कर 113 हो गई है। BJP में शामिल होने वाले सात सांसदों में राघव चड्ढा, अशोक मित्तल, हरभजन सिंह, संदीप पाठक, विक्रमजीत साहनी, स्वाति मालीवाल और राजिंदर गुप्ता शामिल हैं।
राज्यसभा की आधिकारिक वेबसाइट पर अब इन सातों सांसदों के नाम BJP के सदस्यों की सूची में दिखाई दे रहे हैं। शुक्रवार को इन सातों सांसदों ने राज्यसभा सभापति को पत्र लिखकर BJP में विलय की जानकारी दी थी। AAP ने रविवार को सभापति को पत्र लिखकर इन सांसदों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य ठहराने की मांग की थी, लेकिन सभापति ने AAP की मांग खारिज कर दी और विलय को मंजूरी दे दी।AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि यह फैसला अन्यायपूर्ण है। वहीं, BJP में शामिल होने वाले सांसदों ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल के नेतृत्व वाली AAP अपने मूल सिद्धांतों और नैतिक मूल्यों से भटक गई है।

राज्यसभा में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात सांसदों के भारतीय जनता पार्टी (BJP) में विलय को मंजूरी मिलने के बाद AAP सांसद संजय सिंह ने राज्यसभा सचिवालय के फैसले पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। सिंह ने कहा कि राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने एकतरफा फैसला लिया है और हमारी बात नहीं सुनी गई। संजय सिंह ने कहा, “चेयरमैन साहेब ने एकतरफा फैसला लिया है। बीजेपी में जाने के बाद हर कोई साफ हो जाता है। हमारा पत्र अभी तक उनके संज्ञान में नहीं आया है।” उन्होंने उम्मीद जताई कि जब सभापति उनके पत्र पर विचार करेंगे, जिसमें इन सात सांसदों की सदस्यता निलंबित करने की मांग की गई है, तो वे संविधान और लोकतंत्र की रक्षा करते हुए सही फैसला लेंगे।
इस फैसले पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्र निर्माण करने वाले NDA में आपका स्वागत है। ‘टुकड़े-टुकड़े’ INDI गठबंधन को अलविदा।” उधर, BJP में शामिल होने वाले AAP के पूर्व सांसद राघव चड्ढा ने अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा कि वे राजनीति में अपना करियर बनाने नहीं, बल्कि देश सेवा के लिए आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि अब AAP कुछ लोगों के निजी फायदे का साधन बन गई है। चड्ढा ने कहा, ‘हम सातों सांसदों ने मिलकर यह फैसला लिया है। अब मैं अपनी जनता की समस्याओं को और ज्यादा मेहनत से उठाऊंगा।’









