लेंस डेस्क। ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई (Ayatollah Ali Khamenei) की अंतिम यात्रा सोमवार को तेहरान में निकली। 10 किलोमीटर लंबे मार्ग पर लाखों लोग अंतिम दर्शन के लिए जुटे हैं। सरकारी मीडिया ने इसे देश के आधुनिक इतिहास में सबसे बड़ी जनभागीदारी वाली अंतिम यात्रा बताया है।
भीड़ इतनी अधिक है कि खामेनेई का ताबूत ले जा रहा वाहन कई जगहों पर बहुत धीमी गति से आगे बढ़ रहा है। आजादी स्ट्रीट और कॉलेज ब्रिज समेत कई इलाकों में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। कुछ देर के लिए वाहन को रोकना भी पड़ा। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे तय मार्ग पर ही बने रहें।
अधिकारियों ने बताया कि अंत में खामेनेई के पार्थिव शरीर को हेलिकॉप्टर से मार्ग के ऊपर ले जाया जाएगा ताकि दूर खड़े लोग भी अंतिम दर्शन कर सकें। अंतिम यात्रा के बाद उनके पार्थिव शरीर को पहले कोम शहर ले जाया जाएगा जहां धार्मिक रस्में पूरी की जाएंगी। इसके बाद उन्हें उनके गृह नगर मशहद में दफनाया जाएगा।
गर्मी में भी लोगों का उत्साह
तेहरान में तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर है फिर भी हजारों लोग अंतिम विदाई देने पहुंचे। गर्मी से राहत के लिए फायर ब्रिगेड की टीमें पानी का छिड़काव कर रही हैं। लोगों को ठंडे पेय पदार्थ और तरबूज भी बांटे जा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि खामेनेई के अंतिम संस्कार में ईरान का पूरा शीर्ष नेतृत्व एक जगह मौजूद था। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका चाहता तो एक हमले में सभी को खत्म कर सकता था, लेकिन बातचीत का रास्ता खुला रखने के लिए ऐसा नहीं किया। ट्रंप के इस बयान पर ईरान की ओर से तीखी प्रतिक्रिया आई। आर्मेनिया में स्थित ईरानी दूतावास ने कहा, ‘लोगों को मारा जा सकता है, लेकिन विचारों को नहीं। अमेरिका के पास न सभ्यता है, न सम्मान और न ही इतिहास।’
ईरानी सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ब्रिगेडियर जनरल मोहम्मद अकरमिनिया ने कहा कि सेना सीजफायर का फायदा उठाकर अपनी ताकत बढ़ा रही है। उन्होंने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी दी कि कोई गलती हुई तो करारा जवाब दिया जाएगा। रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य ईरान का ‘परमाणु हथियार’ है। इस रास्ते पर नियंत्रण से ईरान दुनिया के तेल कारोबार पर दबाव बना सकता है।
दरअसल अयातुल्ला अली खामेनेई लंबे समय तक ईरान के सर्वोच्च नेता रहे। उनकी मृत्यु के बाद देश में शोक की लहर है। उनकी अंतिम यात्रा ईरानी जनता के लिए बेहद भावुक क्षण है।










