LPG Cylinder Booking New Rules मिडिल ईस्ट में ईरान-इजराइल-अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और वैश्विक सप्लाई चेन पर असर के कारण भारत सरकार ने घरेलू एलपीजी सिलेंडर की बुकिंग के नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। केंद्र ने जमाखोरी, ब्लैक मार्केटिंग और अफरा-तफरी को रोकने के लिए एक सिलेंडर की डिलीवरी के बाद अगली बुकिंग के लिए न्यूनतम इंतजार का समय 21 दिनों से बढ़ाकर 25 दिन कर दिया है। यह फैसला हाल ही में लागू किया गया है, जब कुछ उपभोक्ताओं ने पहले जहां सिलेंडर 55 दिनों में बुक करते थे, अब 15 दिनों में बुक करना शुरू कर दिया था।
मुख्य बदलाव क्या हैं?
अब पिछले सिलेंडर की डिलीवरी के बाद कम से कम 25 दिन पूरे होने पर ही नया सिलेंडर बुक किया जा सकता है।
यह नियम मुख्य रूप से डबल कनेक्शन वाले घरों पर लागू होता है, जबकि सिंगल कनेक्शन वालों के लिए भी सख्ती बढ़ाई गई है।
रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने और घरेलू उपयोग को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं।
डिलीवरी के समय ओटीपी और बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन को और मजबूत किया गया है।
कीमतों में हालिया बढ़ोतरी
मार्च 2026 में घरेलू 14.2 किलो सिलेंडर की कीमत में करीब 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई, जिसके बाद दिल्ली में यह ₹900 के आसपास पहुंच गया है। कमर्शियल 19 किलो सिलेंडर में भी 115 रुपये तक का इजाफा हुआ है। हालांकि, सरकार का कहना है कि भारत में कीमतें पड़ोसी देशों से अभी भी कम हैं।
किन सेक्टरों में नेचुरल गैस की कटौती नहीं होगी?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि घरेलू उपभोक्ताओं और जरूरी सेक्टरों को गैस की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। इन क्षेत्रों को 100% सप्लाई सुनिश्चित की जाएगी, यानी यहां कोई कटौती नहीं होगी। मुख्य रूप से ये सेक्टर शामिल हैं:घरेलू PNG (पाइप्ड नेचुरल गैस): शहरों में घरों तक पाइप से आने वाली गैस, जो रसोई में खाना बनाने के लिए इस्तेमाल होती है।
CNG (कंप्रेस्ड नेचुरल गैस): ऑटो, टैक्सी, बसों और निजी वाहनों के लिए इस्तेमाल होने वाली गैस।
LPG उत्पादन: घरेलू रसोई गैस सिलेंडर (जैसे इंडेन, भारत गैस) बनाने के लिए जरूरी गैस।
पाइपलाइन ऑपरेशन: गैस को देशभर में ट्रांसपोर्ट करने के लिए खुद इस्तेमाल होने वाली गैस।
ये सभी सेक्टर आम लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़े हैं, जैसे खाना पकाना और वाहन चलाना। इसलिए सरकार ने इन्हें टॉप प्राथमिकता दी है। कई कंपनियां (जैसे अडानी टोटल गैस) ने भी घरेलू PNG और CNG की कीमतें स्थिर रखी हैं और इनकी सप्लाई को पूरी तरह सुरक्षित बनाए रखा है।
किन सेक्टरों में होगी गैस कटौती?
केंद्र सरकार ने औद्योगिक और कम प्राथमिकता वाले सेक्टरों में गैस की आपूर्ति कम करने का फैसला किया है। इनसेक्टरों को पिछले कुछ महीनों की औसत खपत के आधार पर सीमित मात्रा में गैस मिलेगी।
मुख्य प्रभावित क्षेत्र इस प्रकार हैं:
चाय उद्योग और अन्य मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर: पिछले 6 महीनों की औसत खपत का केवल 80% तक गैस मिलेगी।
फर्टिलाइजर (खाद) कंपनियां: 70% आवंटन (हालांकि इसे प्राथमिकता वाला माना जाता है, लेकिन कटौती संभव)।
तेल रिफाइनरीज: 65% आवंटन।
अन्य इंडस्ट्रीज (जैसे पेट्रोकेमिकल, टेक्सटाइल, सिरेमिक आदि): 10% से 40% तक कटौती, जो कंपनी के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
कई शहरों में होटल एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि कमर्शियल गैस की कमी से बेंगलुरु, मुंबई जैसे इलाकों में होटल-रेस्टोरेंट बंद होने लग सकते हैं। सरकार का मुख्य फोकस आम आदमी पर है, इसलिए घरेलू और जरूरी जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अगर जरूरत पड़ी तो आगे और कदम उठाए जा सकते हैं।
कमर्शियल सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर
वैश्विक संकट का सबसे बड़ा प्रभाव व्यावसायिक एलपीजी पर पड़ रहा है। कई राज्यों में होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबारियों को कमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई कम या अस्थायी रूप से रोक दी गई है। पंजाब, महाराष्ट्र (पुणे-मुंबई), तेलंगाना, तमिलनाडु जैसे इलाकों में यह समस्या ज्यादा दिख रही है, जिससे कुछ जगहों पर गैस से चलने वाले शमशान घाट भी बंद करने पड़े।
पेट्रोल-डीजल पर अभी कोई असर नहीं
वैश्विक क्रूड ऑयल के दाम बढ़ने के बावजूद सरकार ने फिलहाल पेट्रोल और डीजल की कीमतें नहीं बढ़ाई हैं। तेल कंपनियां मौजूदा लागत को संभाल रही हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह बदलाव राशनिंग नहीं, बल्कि जमाखोरी रोकने के लिए है।









