रायपुर में टाटा पॉवर के बिजली वितरण लाइसेंस का मामला: 21 सितंबर तक CSERC को भेजनी होगी आपत्ति, 1 अक्टूबर को जनसुनवाई
रायपुर। छत्तीसगढ़ में टाटा पॉवर (Tata Power) ने रायपुर जिले के चार तहसीलों रायपुर, धरसींवा, मंदिर हसौद और अभनपुर में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग (CSERC) में आवेदन किया है। इस आवेदन पर अब उपभोक्ताओं, संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से आपत्तियां और सुझाव मांगे गए हैं। लेकिन, सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अब तक सौ आपत्तियां भी आयोग और टाटा पॉवर को नहीं भेजी गई हैं।
21 सितंबर 2026 तक आपत्तियां और सुझाव आयोग को भेजे जा सकते हैं। इसके बाद आयोग 1 अक्टूबर 2026 को सुबह 11:30 बजे इस मामले पर सार्वजनिक जनसुनवाई करेगा।
छत्तीसगढ़ में टाटा पॉवर के प्रस्ताव पर बहस के बीच कर्नाटक में टाटा पॉवर के आवेदन वापस लेने का मामला भी चर्चा में है। कर्नाटक में टाटा पॉवर ने 19 जिलों में समानांतर बिजली वितरण लाइसेंस के लिए आवेदन किया था। वहां बिजली क्षेत्र के इंजीनियरों और कर्मचारी संगठनों के साथ-साथ किसानों, उपभोक्ता संगठनों और राजनीतिक दलों ने भी इसका विरोध किया।
कर्नाटक में इस प्रस्ताव के खिलाफ करीब 20 लाख आपत्तियां सामने आई थीं। विरोध केवल कर्मचारी संगठनों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे लेकर व्यापक जनजागरूकता और राजनीतिक दबाव भी बना।
इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां आने के बाद कर्नाटक सरकार ने भी टाटा पॉवर की एंट्री का विरोध करने का फैसला किया।
सरकार ने संबंधित बिजली वितरण कंपनियों को नियामक आयोग के समक्ष औपचारिक आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए। इसके बाद टाटा पॉवर ने 3 जुलाई 2026 को कर्नाटक में अपने समानांतर वितरण लाइसेंस के आवेदन वापस ले लिए।
कर्नाटक के घटनाक्रम में कर्मचारी और इंजीनियर संगठन लंबे समय से समानांतर लाइसेंस का विरोध कर रहे थे। सार्वजनिक रूप से उपलब्ध कर्मचारी संगठनों के दस्तावेजों में भी बड़ी संख्या में आपत्तियों और व्यापक विरोध का उल्लेख मिलता है।
अब यही सवाल छत्तीसगढ़ को लेकर उठ रहा है। टाटा पॉवर का आवेदन CSERC के पास है और 15 जुलाई को इस पर एक सुनवाई भी हो चुकी है। इस सुनवाई पर आयोग ने इस पर आम लोगों, उपभोक्ताओं, संगठनों और अन्य संबंधित पक्षों से लिखित आपत्तियां और सुझाव मांगे हैं।
21 सितंबर तक दावे और आपत्तियां मंगाई गई है। इसके बाद 1 अक्टूबर को आयोग के समक्ष सार्वजनिक सुनवाई होगी।
बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों ने दर्ज की है आपत्ति
पैरलल वितरण लाइसेंस को लेकर बिजली कर्मचारी और इंजीनियर संगठन कई सवाल उठा रहे हैं। अब तक ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ पॉवर इंजीनियर्स (AIFPE), छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड ग्रेजुएट इंजीनियर्स एसोसिएशन, छत्तीसगढ़ स्टेट इलेक्ट्रिसटी बोर्ड डिप्लोमा इंजीनियर्स एसोसिएशन ने आपत्तियां की हैं।
अपनी आपत्तियों में इन सभी संगठनों ने तर्क दिया है कि यदि निजी कंपनी उन्हीं क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को बिजली वितरण का अधिकार हासिल करती है जहां अभी CSPDCL बिजली सप्लाई कर रही है, तो इसका असर मौजूदा सरकारी वितरण कंपनी की वित्तीय स्थिति, क्रॉस-सब्सिडी व्यवस्था और सार्वजनिक बिजली ढांचे पर पड़ सकती है।
विरोध करने वाले संगठनों की ओर से यह सवाल भी उठाया जा रहा है कि निजी कंपनी मुनाफे वाले या अधिक आकर्षक उपभोक्ता क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा करेगी तो सरकारी वितरण कंपनी पर सामाजिक और वित्तीय दायित्वों का बोझ बढ़ सकता है।
छत्तीसगढ़ में कांग्रेस और अन्य पार्टियों की भूमिका पर भी सवाल
कर्नाटक में टाटा पॉवर के प्रस्ताव के खिलाफ कर्मचारी और इंजीनियर संगठनों के साथ राजनीतिक स्तर पर भी विरोध हुआ था। विरोध को देखते हुए कर्नाटक सरकार ने आधिकारिक रूप से विरोध का रुख अपनाया और संबंधित बिजली कंपनियों को आपत्तियां दाखिल करने के निर्देश दिए।
इसके मुकाबले छत्तीसगढ़ में अब तक कांग्रेस की ओर से आम उपभोक्ताओं को बड़ी संख्या में CSERC के सामने आपत्ति दर्ज कराने के लिए कोई वैसा व्यापक सार्वजनिक अभियान दिखाई नहीं दिया है।
आपत्ति दर्ज कराने की समयसीमा अब बेहद नजदीक है। 21 सितंबर तक लोगों और संगठनों को अपनी आपत्तियां आयोग तक भेजनी हैं।









