जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित झीरम घाटी नक्सली हमले (Jhiram Naxalite Attack) के मामले में 13 साल बाद अदालत का बड़ा फैसला आया है। जगदलपुर स्थित NIA की विशेष अदालत ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है। इस मामले में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ अभियोजन चला था, लेकिन सुनवाई के दौरान एक आरोपी की मौत हो गई थी। अब बाकी 10 आरोपियों को अदालत ने दोषी माना है। दोषियों को सजा 16 सितंबर को सुनाई जाएगी।
मामले में अभियोजन पक्ष ने अदालत के सामने 101 गवाहों के बयान और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए थे। 10 अगस्त को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद अदालत ने फैसला सुरक्षित रख लिया था। 31 अगस्त को फैसला आने की संभावना थी, लेकिन अदालत ने निर्णय को आगे बढ़ाकर 5 सितंबर की तारीख तय की थी।
25 मई 2013 को कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान सुकमा से जगदलपुर लौट रहे नेताओं के काफिले पर दरभा इलाके की झीरम घाटी में माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था।
NIA के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार हमले में 27 लोगों की हत्या हुई थी और 38 लोग घायल हुए थे। NIA के मुताबिक हमले में 10 पुलिसकर्मियों समेत अन्य लोग मारे गए थे। हमले के दौरान सुरक्षा बलों के हथियार और अन्य सामान भी लूटे गए थे।
इस हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, पूर्व मंत्री एवं सलवा जुडूम के प्रमुख चेहरों में शामिल महेंद्र कर्मा, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल और कांग्रेस नेता उदय मुदलियार समेत कई नेता और कार्यकर्ता मारे गए थे।
अदालत में जिन 10 आरोपियों को दोषी करार दिया गया, उनमें प्रमिला मोडियम उर्फ ज्योति (40 वर्ष), चैतु लेकाम उर्फ मुन्ना, सुमित्रा उर्फ सुमित्रा पुनेम मोडियम, मुक्का मंडावी, कोसा कवासी उर्फ कोसराम, आयता मरकाम, मड़कमि देवा, जोगा मड़कमि, बंजामी सन्ना उर्फ चमरू उर्फ डेंगा और महादेव नाग हैं। इन आरोपियों की ओर से मामले में अधिवक्ता अरविंद चौधरी पैरवी कर रहे थे।
परिवर्तन यात्रा के काफिले में नक्सलियों ने किया था हमला
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले में बड़ी संख्या में नेता और कार्यकर्ता शामिल थे। काफिला झीरम घाटी के पहाड़ी और घने जंगल वाले इलाके से गुजर रहा था, तभी रास्ते में अवरोध खड़ा कर वाहनों को रोका गया।
इसके बाद घात लगाए माओवादियों ने काफिले पर गोलीबारी शुरू कर दी। NIA के केस रिकॉर्ड के मुताबिक हमला 25 मई 2013 को शाम करीब 4.15 बजे NH-221 के झीरम घाटी के पहाड़ी इलाके में हुआ था।
भूपेश बघेल लगातार उठाते रहे NIA जांच पर सवाल
झीरम मामले के फैसले से पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने NIA की जांच पर सवाल उठाए थे। उनका आरोप था कि झीरम हमले के पीछे के कथित षड्यंत्रकारियों तक पहुंचने के लिए जांच में पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए।
भूपेश बघेल का कहना था कि दरभा थाने में दर्ज FIR में नामजद लोगों से पूछताछ नहीं की गई और अदालत के निर्देश के बावजूद गुडसा उसेंडी का बयान दर्ज नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा था कि जब जांच ही पूरी तरह नहीं हुई है, तो अदालत उपलब्ध जांच और साक्ष्यों के आधार पर ही फैसला करेगी।
कांग्रेस नेता कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री के साथ हुई बैठक में झीरम मामले की जांच राज्य सरकार को सौंपने की मांग भी की थी। बाद में राज्य सरकार की ओर से गठित SIT को लेकर NIA और राज्य सरकार के बीच कानूनी विवाद हुआ और मामला अदालतों तक पहुंचा।










