आगरा में एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची, चारपाई पर प्रसूता को नदी पार कराने की मजबूरी

आगरा। उत्तर प्रदेश के आगरा (Agra)से ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं और बुनियादी ढांचे की बदहाल स्थिति को सामने लाने वाला मामला सामने आया है। बाह क्षेत्र के सुखलालपुरा गांव में प्रसव पीड़ा से परेशान एक महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए परिजनों को जान जोखिम में डालकर उटंगन नदी पार करनी पड़ी। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी, जिसके बाद परिजनों ने चारपाई को बड़ी ट्यूब के सहारे नदी के पार पहुंचाया।

रात में शुरू हुई प्रसव पीड़ा

जानकारी के मुताबिक, सुखलालपुरा गांव निवासी केशवती को रात करीब दो बजे अचानक तेज प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिजनों ने तत्काल एंबुलेंस को फोन किया। एंबुलेंस आगरा-बाह मार्ग पर जयसिंह गांव के पास तक पहुंची, लेकिन उटंगन नदी पर पुल नहीं होने के कारण वह गांव तक नहीं जा सकी। रात 2 बजे प्रसव पीड़ा, गांव तक नहीं पहुंची एंबुलेंस… प्रसूता को चारपाई पर रखकर नदी पार कराने का इसके बाद परिजनों के सामने गर्भवती महिला को नदी के दूसरी ओर पहुंचाने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई। कोई सुरक्षित साधन उपलब्ध नहीं होने पर चारपाई को एक बड़ी ट्यूब के ऊपर रखा गया और महिला को उस पर लिटाकर नदी पार कराई गई।

चारपाई बनी सहारा, नदी के बीच से पहुंचाया अस्पताल

रात के अंधेरे में परिजनों ने बेहद सावधानी के साथ चारपाई को ट्यूब के सहारे नदी के दूसरी तरफ पहुंचाया। इसके बाद महिला को एंबुलेंस की मदद से अस्पताल ले जाया गया, जहां उसने बेटे को जन्म दिया।

अस्पताल से छुट्टी के बाद फिर वही मुश्किल

मां और नवजात को अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद घर लौटने के दौरान भी परिवार के सामने वही समस्या खड़ी हो गई। उन्हें दोबारा चारपाई को ट्यूब के सहारे नदी पार करानी पड़ी।ग्रामीणों का कहना है कि उटंगन नदी पर पुल नहीं होने के कारण गांव के लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

पुल निर्माण की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से नदी पर पुल या पुलिया बनाए जाने की मांग की है, ताकि आपात स्थिति में मरीजों और गर्भवती महिलाओं को इस तरह जान जोखिम में डालकर नदी पार न करनी पड़े।

मामले में एसडीएम बाह विनोद कुमार के अनुसार, ग्रामीणों की ओर से पुल निर्माण की मांग को लेकर ज्ञापन दिया गया था और उसे आगे की कार्रवाई के लिए शासन को भेजा गया है।

ग्रामीणों का कहना है कि उटंगन नदी पर पुल नहीं होने के कारण गांव के लोगों को लंबे समय से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बरसात के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति और भी खतरनाक हो जाती है।

यह घटना एक बार फिर सवाल खड़ा करती है कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क, पुल और स्वास्थ्य सेवाओं की बेहतर पहुंच कब सुनिश्चित होगी, ताकि किसी गर्भवती महिला या गंभीर मरीज को अस्पताल पहुंचने के लिए ऐसी खतरनाक परिस्थितियों का सामना न करना पड़े।

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