सुप्रीम कोर्ट ने NHAI मुआवजे को लेकर केंद्र की याचिका खारिज की, भूस्वामियों को उनका बकाया मिलेगा

Hearing on West Bengal SIR:

नेशनल ब्यूरो, नई दिल्ली। केंद्र सरकार को बुधवार को बड़ा झटका लगा जब सुप्रीम कोर्ट ने अपनी 2019 की उस फैसले पर पुनर्विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया ( NHAI) को देश भर में हजारों भूमि मालिकों को 1997 से 18 सितंबर 2019 तक हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई उनकी भूमि के लिए सोलैटियम यानि अतिरिक्त मुआवजा और ब्याज देना होगा।

सरकार का तर्क पड़ेगा बोझ

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि संवैधानिक रूप से मुआवजे की गारंटी को सरकार पर पड़ने वाले वित्तीय बोझ पर निर्भर नहीं बताया जा सकता। कोर्ट ने केंद्र की उस दलील को खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि अगर 2019 के तारसेम सिंह मामले का फैसला वापस नहीं लिया गया तो खजाने पर 29,000 करोड़ रुपये का भारी बोझ पड़ेगा, न कि पहले अनुमानित 100 करोड़ रुपये।

ज्यादा खर्च कहकर नहीं टाल सकते अतिरिक्त मुआवजा
मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने कहा, “शुरुआत में यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि जबकि मुआवजे की लागत के संशोधित अनुमान को रिकॉर्ड पर लिया गया है, लेकिन इससे हमें पहले के फैसले की मेरिट पर पुनर्विचार करने के लिए राजी नहीं किया जा सकता। इस अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि सोलैटियम और ब्याज देने के वित्तीय प्रभाव, अपनी जमीन खोने वाले व्यक्तियों के मौलिक अधिकार को ओवरराइड नहीं कर सकते।”

क्या है मामला
दरअसल 2019 के तारसेम सिंह मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया था कि एनएचएआई द्वारा हाईवे निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि पर भूमि मालिकों को सोलैटियम और ब्याज का अधिकार है। केंद्र सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार की मांग करते हुए कहा था कि इससे एनएचएआई पर बहुत बड़ा वित्तीय बोझ पड़ेगा।

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया और कहा कि भूमि मालिकों के संवैधानिक अधिकार वित्तीय बोझ से ऊपर हैं।नतीजतन सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की याचिका खारिज कर दी। अब एनएचएआई को 1997 से 18 सितंबर 2019 तक की अवधि के लिए प्रभावित भूमि मालिकों को सोलैटियम और ब्याज सहित पूरा बकाया देना होगा।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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