रायपुर। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय (IGKV) के सेवानिवृत्त शिक्षकों का क्रमिक धरना बुधवार को लगातार दसवें दिन भी जारी रहा। सेवानिवृत्त शिक्षक संघ का कहना है कि पेंशन, महंगाई राहत (डीआर) और एरियर्स के भुगतान से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी हो रही है। संघ ने राज्य के वित्त विभाग से हस्तक्षेप कर लंबित मामलों का शीघ्र समाधान कराने की मांग की है।
धरना स्थल पर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. एस.एम. बबेले पहुंचे और आंदोलन को समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि पेंशन, महंगाई राहत और एरियर्स से जुड़े अधिकांश मामलों में कानूनी स्थिति स्पष्ट है, लेकिन इसके बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक विलंब किया जा रहा है। उनके अनुसार, सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय पर उनका वैधानिक भुगतान नहीं मिलना उचित नहीं है।
पूर्व कुलपति ने यह भी कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि कुछ मामलों में लेखा नियंत्रक स्तर पर प्रचलित नियमों और वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी करते हुए निर्णय लिए जा रहे हैं। उन्होंने राज्य के वित्त विभाग से इस मामले में हस्तक्षेप कर संबंधित अधिकारियों को नियमों के अनुरूप निर्णय लेने के निर्देश जारी करने की मांग की।
सेवानिवृत्त शिक्षक संघ का दावा है कि पहले पेंशन संबंधी प्रकरण विभागीय परीक्षण के बाद कुलपति की स्वीकृति लेकर सीधे ऑडिट के लिए भेजे जाते थे। लेकिन वर्तमान में ऑडिट से पहले अतिरिक्त स्तर पर परीक्षण और समितियों की स्वीकृति की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। संघ का कहना है कि इससे एक ही प्रकरण कई स्तरों पर जांच के कारण अनावश्यक रूप से लंबित हो रहा है और सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय पर भुगतान नहीं मिल पा रहा है।
संघ के अनुसार, विश्वविद्यालय के कुलपति बुधवार को मुख्यालय में मौजूद नहीं थे, जिसके कारण मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका। संघ के अध्यक्ष डॉ. एन.के. चौबे ने कहा कि पेंशन, महंगाई राहत और एरियर्स के भुगतान पर स्पष्ट लिखित आदेश जारी होने तक क्रमिक धरना जारी रहेगा।
संघ का कहना है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों की मांगें लंबे समय से लंबित हैं और अब वे केवल नियमों के अनुसार अपने वैधानिक अधिकारों का समय पर भुगतान चाहते हैं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन इस मामले में जल्द सकारात्मक निर्णय लेकर लंबित प्रकरणों का समाधान करेंगे।






