कांकेर। कांकेर जिले के नरहरपुर वन परिक्षेत्र के लारगांव-मरकाटोला में मंगलवार को मादा भालू के हमले में सगे भाई-बहन की दर्दनाक मौत हो गई, जबकि एक अन्य ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल का उपचार जारी है। घटना के बाद पूरे गांव में दहशत का माहौल है और वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है।
ग्रामीणों के अनुसार, गांव के स्कूल के समीप जंगल में एक मृत शावक भालू पड़ा हुआ था, जिसके पास उसकी माँ मादा भालू मौजूद थी। शावक की मौत के बाद मादा भालू बेहद आक्रामक हो गई थी। ग्रामीणों ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया था और इसकी सूचना वन विभाग को भी दी थी। ग्रामीणों का आरोप है कि समय रहते कार्रवाई नहीं किए जाने के कारण यह दर्दनाक हादसा हुआ।

घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। इसके बाद रायपुर से पहुंची विशेष रेस्क्यू टीम ने ट्रैंक्विलाइज़र गन की मदद से मादा भालू को बेहोश कर काबू में किया। हालांकि, भालू के बेहोश होते ही आक्रोशित ग्रामीणों ने उस पर हमला कर दिया। वन विभाग के कर्मचारियों ने किसी तरह भालू को ग्रामीणों से बचाया और उसे सुरक्षित अपने कब्जे में लेकर वन विभाग मुख्यालय पहुंचाया।
फिलहाल वन विभाग की टीम गांव में तैनात है और लोगों से जंगल तथा घटनास्थल के आसपास नहीं जाने की अपील कर रही है। वहीं, दो ग्रामीणों की मौत के बाद गांव में शोक और भय का माहौल है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वन विभाग ने पहले ही आवश्यक कदम उठाए होते, तो इस घटना को रोका जा सकता था।
ग्रामीणों ने बताया कि घटनास्थल जंगल से सटा हुआ है और वहीं स्कूल भी स्थित है। इस क्षेत्र में पहले भी कई बार भालू और तेंदुए की मौजूदगी देखी जा चुकी है। स्कूल परिसर में सुरक्षा दीवार (बाउंड्री वॉल) नहीं होने के कारण बच्चों की सुरक्षा को लेकर लगातार खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का आरोप है कि इस गंभीर समस्या की ओर शासन-प्रशासन ने कभी ध्यान नहीं दिया, जिससे अब पूरे गांव में भय का माहौल और गहरा गया है।









