रायपुर। विदेश मंत्री सुब्रमण्यम जयशंकर गुरुवार को नवा रायपुर स्थित IIM Raipur के 15वें वार्षिक दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने पास आउट होने वाले छात्रों को डिग्री और मेडल प्रदान किए और उन्हें मैनेजमेंट, लीडरशिप और करियर से जुड़े महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि राष्ट्र निर्माण एक जटिल प्रक्रिया है, लेकिन इसकी असली ताकत मजबूत और गतिशील कारोबार से आती है। उन्होंने कहा कि भारत तेजी से बदल रहा है और इस बदलाव का नेतृत्व देश के युवा करेंगे।
विदेश मंत्री ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपलब्धि का दिन नहीं, बल्कि आत्ममंथन का भी अवसर होता है। उन्होंने कहा कि छात्र ऐसे समय में संस्थान से निकल रहे हैं जब भारत ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की ओर तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि पिछले दस वर्षों में देश ने तेज विकास किया है और आज भारत दुनिया की टॉप-5 अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो चुका है। वैश्विक संकटों के बावजूद भारत ने मजबूती दिखाई है।
विदेश मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि इस दशक में दुनिया ने कई बड़ी चुनौतियों का सामना किया है, जिनमें COVID-19 महामारी, अंतरराष्ट्रीय संघर्ष और जलवायु परिवर्तन शामिल हैं। इसके बावजूद भारत ने अपनी अर्थव्यवस्था और विकास की गति को बनाए रखा है।
दुनिया तेजी से बदल रही है: एस जयशंकर
विदेश मंत्री ने कहा कि आज दुनिया तेजी से बदल रही है और देशों के बीच ताकत का संतुलन भी बदल रहा है। तकनीक, ऊर्जा और संसाधनों को लेकर प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। ऐसे में देशों और कंपनियों को जोखिम कम करने, विविधता बढ़ाने और नए विकल्प तलाशने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि भारत में आज आशावाद का माहौल है और इसका कारण पिछले दशक में हुई प्रगति है। डिजिटल क्रांति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ने तकनीक को केवल अपनाया ही नहीं बल्कि उसे जीवन में प्रभावी तरीके से लागू भी किया है।
विदेश मंत्री ने कहा कि खाद्य, स्वास्थ्य, ऊर्जा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए देश को अपनी क्षमताओं को मजबूत करना होगा। जहां खुद करना संभव न हो, वहां भरोसेमंद साझेदारियों को विकसित करना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे हाईवे, रेलवे, पोर्ट, एयरपोर्ट और जलमार्ग देश की प्रगति में अहम भूमिका निभा रहे हैं। डिजिटल टूल्स और मजबूत नेतृत्व से सुशासन को भी मजबूती मिली है।
कारोबार के लिए दुनिया को समझना जरूरी
विदेश मंत्री ने कहा कि आज के दौर में कारोबार करने के लिए दुनिया को समझना बेहद जरूरी हो गया है। भारत में रहने वाले लोग भी अब विदेशी प्रोडक्ट, पार्टनर और सेवाओं से जुड़े हुए हैं, इसलिए अलग-अलग देशों और संस्कृतियों को समझना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि छोटे कारोबार, स्टार्टअप और उद्यमियों के लिए आज अवसर बढ़े हैं। शिक्षा संस्थानों की संख्या में वृद्धि और कौशल विकास पर जोर से युवाओं को नए अवसर मिल रहे हैं।
उन्होंने छात्रों से अपील की कि वे वैश्विक घटनाओं में रुचि लें, क्योंकि आज का दौर ग्लोबल मार्केट और ग्लोबल वर्कफोर्स का है। भारत की विदेश नीति अब व्यापार बढ़ाने, संसाधन और तकनीक हासिल करने और विदेशों में भारतीयों की मदद करने पर केंद्रित है। इसके जरिए ‘ब्रांड इंडिया’ को मजबूत किया जा रहा है।
कठिन परिस्थितियों में सही फैसला ही असली परीक्षा
अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि सफलता के लिए अच्छी तैयारी, सही निर्णय और स्पष्ट लक्ष्य जरूरी हैं। बातचीत और नेगोशिएशन स्किल्स अभ्यास से आती हैं, लेकिन सामने वाले की सोच को समझना ज्यादा जरूरी होता है।
उन्होंने कहा कि जब कई विकल्प सामने हों तो फैसला अपने मूल हितों को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अगर ‘इंडिया फर्स्ट’ मार्गदर्शक सिद्धांत हो तो दिशा हमेशा स्पष्ट रहती है।
जीवन में प्रतिस्पर्धा और संवेदनशीलता जरूरी
विदेश मंत्री ने छात्रों से कहा कि जीवन में प्रतिस्पर्धा जरूरी है, लेकिन इसके साथ संवेदनशीलता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। जो लोग आगे बढ़कर काम करते हैं, अतिरिक्त प्रयास करते हैं और जिम्मेदारी लेते हैं, उन्हें जीवन में बढ़त मिलती है।
अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि जीवन केवल उपलब्धियों का नाम नहीं है, बल्कि रिश्तों और दोस्ती को निभाने का भी नाम है। नेटवर्किंग और संबंध व्यक्ति की सोच को विस्तार देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी संस्थान से मिली डिग्री से ज्यादा महत्वपूर्ण वे मूल्य और संस्कार हैं जो वहां सीखने को मिलते हैं।
विदेश मंत्री के रायपुर पहुंचने पर एयरपोर्ट पर उनका स्वागत राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव सहित अन्य अधिकारियों ने किया।









