10वीं में दो बार फेल हुआ छात्र, लगाई फांसी, मनोवैज्ञानिक ने अभिभावकों से की अपील,कहा ‘बच्चों को नंबरों से ना तौलें’

बालोद,छत्तीसगढ़। शिक्षा व्यवस्था और समाज की बढ़ती अपेक्षाओं के बीच एक और दर्दनाक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। डौंडी थाना क्षेत्र के बंधिया पारा गांव में 17 वर्षीय राजवीर बघेल नामक छात्र ने 10वीं कक्षा में लगातार दूसरी बार असफलता के बाद फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पिछले दो साल से परीक्षा में असफलता का सामना कर रहे राजवीर इस बार भी 5 विषयों में फेल हो गए थे। परिणाम आने के बाद वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुका था। परिवार के सदस्यों ने बताया कि रिजल्ट के बाद वह चुप रहने लगा था और अकेले में रहने लगा। आखिरकार उसने इस तनाव से बाहर निकलने का घातक रास्ता चुन लिया।

परिवार में मचा शोक

जब परिवार वालों ने घर के अंदर उसे फंदे से लटका देखा तो पूरे घर में कोहराम मच गया। तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। डौंडी थाना पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पंचनामा पूरा किया और पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। प्रारंभिक जांच में परीक्षा की असफलता से उत्पन्न मानसिक दबाव को मुख्य कारण माना जा रहा है। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है।

मनोवैज्ञानिक डॉ. इला गुप्ता का अभिभावकों के लिए संदेश

इस घटना पर मनोवैज्ञानिक डॉ. इला गुप्ता ने द लेंस से बात करते हुए कहा: “बच्चों को नंबरों से कभी न तौलें। भारतीय समाज में यह बहुत आम हो गया है कि बच्चे की पूरी कीमत उसके बोर्ड मार्क्स से तय कर दी जाती है। राजवीर जैसी स्थिति में बच्चे को लगता है कि अगर परीक्षा में नंबर नहीं आए तो जीवन में कुछ भी नहीं बचता। माता-पिता को समझना चाहिए कि हर बच्चा अलग है। अगर कोई बच्चा पढ़ाई में रुचि नहीं ले रहा है तो उसे जबरदस्ती उसी राह पर नहीं धकेलना चाहिए। आज स्किल डेवलपमेंट की ढेरों क्लासेस उपलब्ध हैं। बच्चे की रुचि को पहचानिए वह खाली समय में क्या करता है? किताबें पढ़ता है, गेम खेलता है, बाहर खेलता है, या कोई और सपना देखता है? माता-पिता को दोस्त की तरह बच्चों से बात करनी चाहिए। सिर्फ दो-तीन बच्चे होने के कारण एक बच्चा खोने का मतलब पूरा परिवार टूट जाना है।”

अब बदलाव की जरूरत

बच्चों पर अनावश्यक दबाव न डालें।
असफलता को सीख मानें, अंत नहीं।
उनकी रुचि और क्षमता के अनुसार करियर विकल्प तलाशें।
नियमित भावनात्मक सहारा और खुली बातचीत जरूरी है।

पूनम ऋतु सेन

पूनम ऋतु सेन युवा पत्रकार हैं, इलेक्ट्रिकल और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बीटेक करने के बाद लिखने,पढ़ने और समाज के अनछुए पहलुओं के बारे में जानने की उत्सुकता पत्रकारिता की ओर खींच लाई। विगत 6 वर्षों से वीमेन, एजुकेशन, पॉलिटिकल, हेल्थ, लाइफस्टाइल से जुड़े मुद्दों पर लगातार खबर कर रहीं हैं और सेन्ट्रल इण्डिया के कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में अलग-अलग पदों पर काम किया है। द लेंस में बतौर जर्नलिस्ट कुछ नया सीखने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से सच की तलाश का सफर शुरू किया है।

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