24 लाख से ज्यादा छात्रों की मेहनत एक बार फिर पानी में मिल गई। NEET-UG 2026 पेपर लीक के कारण रद्द कर दी गई। CBI जांच कर रही है। विकास बिंवाल, यश यादव, मांगी लाल जैसे आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं इनमें से कुछ आरोपी भाजपा के करीबी बताये जा रहें हैं जबकि एक आरोपी तो खुद डॉक्टरी पढ़ रहा था, लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि आखिर NEET का पेपर बार-बार लीक क्यों होता है? जबकि JEE Main जैसी परीक्षा में ऐसा कम होता है।
अब तक क्या हुआ NEET UG 2026 में?
3 मई 2026 को NEET UG परीक्षा हुई। कुछ दिनों बाद राजस्थान के सीकर से बड़ा खुलासा हुआ। एक ‘क्वेश्चन बैंक’ वायरल हुआ जिसमें असली पेपर के 120 से 150 सवाल हूबहू मिल रहे थे। CBI ने अब तक 5 मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है, विकास बिंवाल (जो खुद पिछले साल लीक पेपर से MBBS में बैठा), उसके पिता-चाचा, यश यादव और शुभम खैरनार सभी का इस पेपर लीक में इन्वॉल्वमेंट बताया जा रहा है। सबसे पहले पेपर केरल से सीकर तक पहुंचा। हाथ से लिखा गया क्वेश्चन बैंक पीजी और कोचिंग सेंटर्स के जरिए हजारों छात्रों तक फैल गया। छात्रों से लाखों रुपये लिए गए।
NEET को ऑनलाइन क्यों नहीं किया जाता?
सबसे बड़ा सवाल, NEET को JEE Main की तरह कंप्यूटर आधारित (CBT) क्यों नहीं कर दिया जाता?
NEET (Offline – Pen & Paper) :
एक ही दिन, पूरे देश में एक ही पेपर
लाखों प्रश्नपत्र छपते हैं, ट्रांसपोर्ट होते हैं, कई हाथों से गुजरते हैं
4700-5000 परीक्षा केंद्र जो ज्यादातर स्कूल-कॉलेज
सुरक्षा का खतरा हर स्टेज पर
JEE Main (Online – CBT) :
कई दिनों में, कई शिफ्ट्स में
हर शिफ्ट में अलग-अलग प्रश्न
प्रश्न एन्क्रिप्टेड सर्वर पर
परीक्षा शुरू होने से कुछ मिनट पहले डाउनलोड
सीमित और बेहतर सुरक्षा वाले डिजिटल सेंटर्स
लीक होने का खतरा बहुत कम
इसीलिए JEE में पेपर लीक की शिकायतें NEET जितनी नहीं आती। NEET में अगर एक जगह लीक होता है तो पूरी परीक्षा प्रभावित हो जाती है।
NTA की विफलताएं और इतिहास
2017 में बनी NTA पर 9 साल से आरोप लग रहे हैं। 2024 में भी पेपर लीक हुआ था। उसके बाद राधाकृष्णन समिति बनी, लेकिन ज्यादातर सिफारिशें लागू नहीं हुईं। पिछले 2 साल में NTA के 3 डायरेक्टर जनरल बदल चुके हैं यानी स्थिरता नहीं है। छात्रों का कहना है ‘हमारी जिंदगी बार-बार दांव पर लग रही है।
राधाकृष्णन समिति की महत्वपूर्ण सिफारिशें
2024 विवाद के बाद सरकार ने पूर्व ISRO चेयरमैन के. राधाकृष्णन की अध्यक्षता में कमेटी बनाई। इसने 101 सिफारिशें दीं।
मुख्य सिफारिशें ये हैं:
NEET को मल्टी-सेशन और मल्टी-स्टेज बनाया जाए — JEE की तरह।
प्रश्नपत्र एन्क्रिप्टेड भेजे जाएं और केंद्र पर प्रिंट हों।
हाइब्रिड मोड — कुछ हिस्सा ऑनलाइन, कुछ OMR पर।
400-500 बड़े डिजिटल परीक्षा केंद्र बनाए जाएं।
बायोमेट्रिक और AI आधारित पहचान।
ग्रामीण क्षेत्रों के लिए मोबाइल टेस्टिंग सेंटर्स।
NTA का दायरा सीमित किया जाए — सिर्फ बड़ी परीक्षाएं।
राज्य और जिला स्तर पर सुरक्षा समितियां बनाई जाएं।
समिति ने कहा — भविष्य में कंप्यूटर एडाप्टिव टेस्टिंग (CAT) अपनाई जाए, जिसमें हर छात्र के हिसाब से सवाल आएं।
अब कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं
राधाकृष्णन समिति की सिफारिशें 2 साल से लागू क्यों नहीं हो रही? NTA में इतनी अस्थिरता क्यों है? क्या NTA अब परीक्षाएं आयोजित करने लायक बची है? ग्रामीण छात्रों को ऑनलाइन परीक्षा में नुकसान तो नहीं होगा? क्या NEET का पूरा सिस्टम ही बदलने की जरूरत है?
फिलहाल 24 लाख छात्रों का भविष्य दांव पर है। NTA ने परीक्षा दोबारा कराने का ऐलान किया है, लेकिन तारीख अभी नहीं आई। सरकार और NTA को अब सिर्फ वादे नहीं, ठोस सुधार दिखाने होंगे। NEET को सुरक्षित, पारदर्शी और भरोसेमंद बनाने के लिए बड़े बदलाव जरूरी हैं।










