छत्तीसगढ़ में GeM पोर्टल के टेंडरों पर गंभीर आरोप… फर्नीचर खरीदी में गड़बड़ी, डुप्लीकेट बिड और ‘गायब’ टेंडर का मामला

April 25, 2026 12:32 PM
GeM Portal

रायपुर। छत्तीसगढ़ में सरकारी फर्नीचर खरीदी से जुड़े GeM Portal (Government e-Marketplace) टेंडरों को लेकर अब विवाद और गहराता जा रहा है। वरिष्ठ भाजपा नेता और अधिवक्ता नरेश चंद्र गुप्ता ने मुख्य सचिव विकास शील को भेजी गई एक से अधिक शिकायतों में टेंडर प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं और संभावित ‘सिस्टमेटिक मैनिपुलेशन’ के आरोप लगाए हैं।

पहली शिकायत में स्कूल शिक्षा विभाग (समग्र शिक्षा) के फर्नीचर टेंडर को लेकर चौंकाने वाले तथ्य सामने आए थे। इसमें एक ही सामान के लिए दो बिड जारी थे।

27 मार्च 2026 को 42,858 यूनिट के लिए लगभग एक ही समय पर दो अलग-अलग बिड जारी किए गए।

एक बिड रहस्यमय तरीके से गायब होने का आरोप लगा है। Bid No. 7398557, जो पहले पोर्टल पर मौजूद था, बाद में बिना किसी आधिकारिक रिकॉर्ड के गायब हो गया।

दूसरे बिड में GeM गाइडलाइन उल्लंघन के तहत बिना Corrigendum के बिड हटाना नियमों के खिलाफ बताया गया, जिसे ‘Ghosting’ करार दिया गया।

इससे पहले 19 अप्रैल 2026 को भेजी गई दूसरी शिकायत में Bid No. GEM/2026/B/7403883 को लेकर नई अनियमितताओं का खुलासा किया गया है। यह टेंडर कॉम्पोजिट ऑफिस टेबल की खरीदी से जुड़ा है।

टेंडर में 4.5 करोड़ रुपये के औसत वार्षिक टर्नओवर की शर्त रखी गई है, लेकिन अन्य शर्तें इतनी कड़ी हैं कि अधिकांश कंपनियां भाग ही नहीं ले पाएंगी।

19,000 फर्नीचर आइटम सप्लाई का अनुभव अनिवार्य किया गया है, जबकि मौजूदा आवश्यकता केवल 5,540 यूनिट्स की है।
टेंडर दस्तावेज़ में स्पष्ट ड्रॉइंग, स्पेसिफिकेशन और गुणवत्ता मानक नहीं दिए गए, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

मार्च 2026 में जारी भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के नए नियमों के बजाय पुराने मानकों का इस्तेमाल करने का आरोप है। सरकारी खरीद नीति के तहत मिलने वाली छूट नहीं देने की बात भी सामने आई है।

शिकायतकर्ता ने मांग की है कि टेंडर प्रक्रिया को तत्काल रोका जाए और मौजूदा टेंडर को निरस्त कर संशोधित शर्तों के साथ दोबारा जारी किया जाए।

लगातार आ रही शिकायतों ने सिस्टम की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए पारदर्शिता लाने के दावों के बीच एक ही सामान के लिए डुप्लीकेट बिड क्यों? बिड “गायब” कैसे हुआ? और पात्रता शर्तें इतनी सीमित क्यों रखी गईं?

फिलहाल इस पूरे मामले में सरकार या संबंधित विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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दानिश अनवर

दानिश अनवर, द लेंस में जर्नलिस्‍ट के तौर पर काम कर रहे हैं। उन्हें पत्रकारिता में करीब 14 वर्षों का अनुभव है। द लेंस से पहले दैनिक भास्‍कर में इन्‍वेस्टिगेटिव रिपोर्टिंग टीम में सीनियर रिपोर्टर, नवभारत में क्राइम रिपोर्टर, नईदुनिया में स्पोर्ट्स जर्नलिस्ट और पत्रिका अखबार में रिपोर्टर के तौर पर 10 साल काम किया। इन सभी अखबारों में दानिश अनवर ने विभिन्न विषयों जैसे- क्राइम, पॉलिटिकल, एजुकेशन, स्‍पोर्ट्स, कल्‍चरल और स्‍पेशल इन्‍वेस्टिगेशन स्‍टोरीज कवर की हैं। दानिश को प्रिंट का अच्‍छा अनुभव है। वह सेंट्रल इंडिया के कई शहरों में काम कर चुके हैं।

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