नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
आम आदमी पार्टी ने जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। आम आदमी पार्टी की युवा नेत्री ईषना गुप्ता ने आरोप लगाया है कि जस्टिस स्वर्णकांता के पुत्र ईशान शर्मा ने 2017 में कानून की डिग्री पूरी की और उसी वर्ष वकालत शुरू की।
ईषना गुप्ता द्वारा आरोप लगाया गया है कि न्यायमूर्ति स्वर्णकांता को 2022 में उच्च न्यायालय में पदोन्नत किए जाने के तुरंत बाद, 2023 में उन्हें केंद्र सरकार के पैनल में शामिल किया गया। महज 5-6 वर्षों के अपने करियर में, उन्हें 2023 से 2025 के बीच 5,904 मामले सौंपे गए, जो एक असाधारण रूप से उच्च संख्या है और उन्हें सर्वोच्च न्यायालय के लगभग 700 पैनल वकीलों में से मामलों के आवंटन के मामले में शीर्ष दस वकीलों में स्थान देती है।
ईषना गुप्ता कहती है कि जस्टिस स्वर्णकांता के विपरीत, कई अन्य वकीलों को इस मुकाम तक पहुंचने में वर्षों लग जाते हैं और उन्हें पूरे वर्ष में केवल एक ही मामला मिलता है। इससे उन्हें आर्थिक रूप से भी काफी लाभ होता है। प्रति केस पेशी शुल्क 9,000 रुपये होने के कारण, सौंपे गए मामलों की संख्या को देखते हुए, कुल कमाई महज दो वर्षों में 5 करोड़ रुपये से अधिक हो सकती है।
उनका कहना है कि इसके अलावा, न्यायमूर्ति स्वर्णकांता के उच्च न्यायालय की न्यायाधीश बनने के बाद, उनकी बेटी को भी केंद्र सरकार के पैनल में शामिल किया गया। मुख्य न्यायधीश तुषार मेहता, न्यायमूर्ति स्वर्णकांता के बेटे और बेटी दोनों को मामले सौंप रहे हैं, साथ ही केजरीवाल जी के खिलाफ मामलों में खुद पेश हो रहे हैं। इससे निष्पक्षता और न्याय की धारणा पर गंभीर सवाल उठते हैं और यह भी कि इन परिस्थितियों में न्याय कैसे मिल सकता है।









