भोपाल। मध्य प्रदेश में Barkatullah University का नाम बदलकर ‘वाग्देवी भोजपाल विश्वविद्यालय’ किए जाने की चर्चाओं के बीच क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच (RCF) ने इसका विरोध जताया है। संगठन का कहना है कि महान स्वतंत्रता सेनानी मौलाना बरकतउल्लाह के नाम से जुड़े विश्वविद्यालय का नाम बदलना उनके ऐतिहासिक योगदान की अनदेखी होगी।
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच के संयोजक तुहिन ने कहा कि मौलाना बरकतउल्लाह भोपाल के निवासी थे और उन्होंने अपना पूरा जीवन ब्रिटिश शासन के खिलाफ देश और विदेश में स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करने में समर्पित किया। संगठन के अनुसार, बरकतउल्लाह ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान अमेरिका में भारत की आजादी के लिए सक्रिय क्रांतिकारियों के साथ मिलकर गदर आंदोलन से जुड़कर काम किया।
मंच के संयोजक असीम गिरी ने कहा कि उन्होंने जर्मनी में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संगठित करने के प्रयास किए और बाद में जापान जाकर क्रांतिकारी नेता रासबिहारी बोस से भी संपर्क किया। संगठन का दावा है कि उनके प्रयासों ने आगे चलकर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में आजाद हिंद फौज के गठन की पृष्ठभूमि तैयार करने में भूमिका निभाई।

RCF ने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि वर्ष 1915 में काबुल में गठित आजाद भारत की अस्थायी सरकार में राजा महेंद्र प्रताप राष्ट्रपति और मौलाना बरकतउल्लाह प्रधानमंत्री बनाए गए थे। संगठन के अनुसार, बरकतउल्लाह ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्वतंत्रता के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास किया और अपने जीवन के अंतिम समय तक स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़े रहे। उनका निधन 27 सितंबर 1927 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में हुआ था।
संगठन ने कहा कि बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं, बल्कि स्वतंत्रता संग्राम की एक महत्वपूर्ण विरासत का प्रतीक है। ऐसे में विश्वविद्यालय का नाम बदलने का प्रस्ताव उचित नहीं है और इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध किया जाना चाहिए।
क्रांतिकारी सांस्कृतिक मंच ने राज्य सरकार से विश्वविद्यालय का नाम यथावत बनाए रखने की मांग करते हुए कहा कि स्वतंत्रता आंदोलन के नायकों की स्मृतियों और उनके योगदान को संरक्षित रखा जाना चाहिए।
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