नई दिल्ली। पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (Captain Amarinder) कांग्रेस में वापसी कर सकते हैं।कैप्टन के हालिया बयान से सियासी पारा बढ़ गया है। अमरिंदर सिंह सितंबर 2022 में बीजेपी में शामिल हुए थे। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद 1984 में उन्होंने पार्टी छोड़ दी थी। तब भी करीब 4 साल बाद वापसी की थी।
कैप्टन को लंबे समय से कवर करने वाले लोगों का कहना है कि राहुल गांधी का ‘अंकल’ वाला बयान पूर्व मुख्यमंत्री के दिल में उतर गया है। 84 वर्षीय कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब की राजनीति के जानकार माने जाते हैं। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 6 अगस्त 2026 को इंस्टाग्राम पर Gen Z युवाओं के साथ ‘आस्क मी एनीथिंग’ सत्र के दौरान कैप्टन अमरिंदर सिंह को ‘अंकल अमरिंदर’ कहकर संबोधित किया था। राहुल गांधी ने उन्हें बीजेपी में अपना ‘पसंदीदा नेता’ और ‘कूल अंकल’ भी बताया था।
अमरिंदर सिंह ने कांग्रेस छोड़ने के बावजूद गांधी परिवार पर कभी निजी हमला नहीं किया। इसकी वजह दो पीढ़ियों के संबंध हैं। अमरिंदर सिंह ने एक बार स्वीकार भी किया था कि पारिवारिक रिश्ते हमेशा अपनी जगह रहेंगे, चाहे उनकी राजनीतिक प्रतिबद्धता बीजेपी के साथ हो। कैप्टन कुल मिलाकर करीब 27 साल कांग्रेस में रहे। वह 1980 में कांग्रेस से जुड़े और 1984 तक रहे। ब्लू स्टार के बाद पार्टी छोड़ दी।
1998 में दोबारा कांग्रेस में लौटे और 2021 तक पार्टी में रहे।
कैप्टन अमरिंदर सिंह के गांधी परिवार से निजी रिश्ते रहे हैं। राहुल और प्रियंका गांधी को उन्होंने बचपन में देखा-खिलाया है। कैप्टन अमरिंदर और पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी दून स्कूल में सहपाठी और घनिष्ठ मित्र थे।
राजीव गांधी के बाद सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ भी उनका गहरा भावनात्मक रिश्ता रहा। कैप्टन कई मौकों पर कह चुके हैं कि वे राहुल और प्रियंका को तब से जानते हैं जब वे बहुत छोटे थे। इसी वजह से राहुल गांधी आज भी उन्हें ‘अंकल’ कहते हैं। 2021 में पंजाब के मुख्यमंत्री पद से हटने और बाद में कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल होने के बावजूद कैप्टन ने गांधी परिवार पर व्यक्तिगत हमले नहीं किए।
राजनीति में आने से पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भारतीय सेना में सेवा दी। 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध में कैप्टन के रूप में भूमिका निभाई। वह पंजाब के दो बार मुख्यमंत्री रहे। लंबे समय तक कांग्रेस के प्रमुख चेहरों में रहे। बाद में अपनी पार्टी बनाई और फिर बीजेपी में शामिल हुए। उन्हें सैन्य इतिहास की गहरी समझ है, जिस पर उन्होंने किताबें भी लिखी हैं। राहुल गांधी उनके प्रशंसक रहे हैं।
विधानसभा चुनावों की ओर बढ़ रहे पंजाब में क्रिकेट राजनीति में आने वाले नवजोत सिंह सिद्धू उतरेंगे या नहीं इस पर संशय बना हुआ है। वे कांग्रेस में सक्रिय भी नहीं हैं, राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि नवजोत सिंह सिद्धू के कांग्रेस में शामिल होने के बाद से ही दोनों के बीच विभागों के बंटवारे और कामकाज के तरीके को लेकर अनबन शुरू हो गई थी। सिद्धू अक्सर सार्वजनिक रूप से सरकार के फैसलों और नीतियों पर सवाल उठाते थे। कहीं न कहीं कांग्रेस ने सिद्धू के लिए वफादार कैप्टन को हटा दिया था। ऐसे में जब सिद्धू सक्रिय नहीं है तब क्या राहुल गांधी हाथ पकड़ अंकल अमरिंदर को वापस लाएंगे।










