नेशनल ब्यूरो,नई दिल्ली। अयोध्या राम मंदिर में कथित चोरी और दान में अनियमितताओं की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। मंगलवार सुबह SIT की टीम ने अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद के कार्यालय में पहुंचकर रिपोर्ट सौंपी। अधिकारियों ने बताया कि यह अभी प्रारंभिक रिपोर्ट है और आगे जांच की जरूरत पड़ सकती है।
सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट करीब 150 पृष्ठों की है, जिसमें लगभग 150 लोगों से पूछताछ का विवरण शामिल है। SIT ने FIR दर्ज करने, राम मंदिर ट्रस्ट का पुनर्गठन, मंदिर के लिए सीनियर सरकारी अधिकारी को CEO नियुक्त करने और विस्तृत जांच के लिए SIT को अतिरिक्त समय देने की सिफारिश की है।
5 वर्षों के ऑडिट की सिफारिश
SIT ने मंदिर को मिले पिछले 5 वर्षों के सभी दानों का पूर्ण ऑडिट कराने की भी सिफारिश की है। रिपोर्ट में दान संभालने में भविष्य में अनियमितताएं रोकने के लिए नए स्टाफ की भर्ती और प्रशासनिक निगरानी मजबूत करने जैसे कई उपाय सुझाए गए हैं। रिपोर्ट की सिफारिशों पर अंतिम फैसला उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लेंगे।
SIT का गठन और जांच
SIT में लखनऊ कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), लखनऊ रेंज के IG किरण शिवकुमार और उत्तर प्रदेश वित्त एवं लेखा सेवा के स्पेशल सेक्रेटरी नीलरतन कुमार शामिल हैं। टीम ने राम मंदिर परिसर में 6 दिन की जांच की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 मई को राम मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर SIT का गठन किया था।
विवाद की शुरुआत
7 जून को पूर्व समाजवादी पार्टी मंत्री पवन पांडे ने आरोप लगाया था कि राम मंदिर से ₹5 करोड़ से ₹7.5 करोड़ तक की राशि चोरी हो गई है। समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने भी सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाया था। राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने इन आरोपों से इनकार किया था और कहा था कि कोई चोरी का सबूत नहीं मिला है।









