रायपुर। छत्तीसगढ़ के Raigarh में तालाबों, टारों और जलाशयों के जीर्णोद्धार कार्यों में करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए सामाजिक संगठनों और स्थानीय नागरिकों ने जांच की मांग उठाई है।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि सिंचाई विभाग और ठेकेदारों की मिलीभगत से लगभग 15 करोड़ रुपये के कार्यों में भारी अनियमितताएं की गई हैं। उन्होंने बरसात शुरू होने से पहले तकनीकी जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि समय रहते जांच नहीं हुई तो कथित गड़बड़ियों के साक्ष्य मिट सकते हैं।
रायगढ़ बचाओ-लड़ेंगे, जिला बचाओ संघर्ष मोर्चा और जन चेतना मंच से जुड़े पदाधिकारियों ने कलेक्टर मयंक चतुर्वेदी को शिकायत सौंपकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
शिकायत के अनुसार रायगढ़ और पुसौर विकासखंड के अंतर्गत कोयलंगा डायवर्सन, बेलरिया स्टॉप डैम एवं एनिकट, बड़े हरदी तालाब, सिहा जलाशय, मंशाटार, बाघाडोला जलाशय और बासनपाली तालाब के जीर्णोद्धार, मरम्मत और उन्नयन कार्यों के लिए करोड़ों रुपये स्वीकृत किए गए थे।
आरोप है कि निर्धारित मानकों और गुणवत्ता के अनुरूप कार्य नहीं किए गए।
नहर धंसने और घटिया निर्माण के आरोप

शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कोयलंगा डायवर्सन के अंतर्गत निर्मित नहरों में कई जगह धंसाव और दरारें दिखाई दे रही हैं। वहीं बेलरिया स्टॉप डैम की मरम्मत में भी गंभीर लापरवाही बरते जाने का आरोप लगाया गया है। बताया गया कि इस संबंध में ग्रामीणों ने 27 अप्रैल 2026 को जनदर्शन में शिकायत भी की थी, लेकिन अब तक जांच आगे नहीं बढ़ी है।
पुसौर क्षेत्र के बड़े हरदी तालाब, बाघाडोला जलाशय और बासनपाली तालाब में भी घटिया निर्माण सामग्री के उपयोग का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ताओं का दावा है कि कई स्थानों पर ढलाई कार्य कमजोर है, पिचिंग उखड़ रही है और निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किया गया। कुछ संरचनाओं में लोहे की सरिया तक नहीं लगाने का आरोप लगाया गया है।
बरसात से पहले जांच की मांग
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि यदि बरसात से पहले स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाती है तो वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। उनका आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत से सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है।
शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से मांग की है कि सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि अनियमितताएं साबित होती हैं तो संबंधित अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। हालांकि इस मामले में सिंचाई विभाग का पक्ष सामने नहीं आया है। विभागीय अधिकारियों की प्रतिक्रिया मिलने पर उसे भी प्रकाशित किया जाएगा।
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