राष्ट्रपति मुर्मू के बंगाल दौरे पर विवाद: वेन्यू बदलाव और प्रोटोकॉल चूक पर उठे सवाल, मोदी ने कहा ‘शर्मनाक’, ममता का पलटवार

President Murmu Bengal visit Controversy

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हालिया दौरे को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। राष्ट्रपति ने राज्य सरकार पर प्रोटोकॉल में चूक और एक आदिवासी कार्यक्रम के आयोजन में बाधा डालने का आरोप लगाया है, जबकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इसे राजनीतिक साजिश बताते हुए राष्ट्रपति को राजनीति से दूर रहने की सलाह दी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मामले को ‘शर्मनाक’ करार देते हुए टीएमसी सरकार पर निशाना साधा। यह विवाद तब शुरू हुआ जब सिलिगुड़ी के पास एक अंतरराष्ट्रीय संथाल सम्मेलन का वेन्यू अचानक बदल दिया गया, जिससे आयोजकों और राष्ट्रपति दोनों ने असंतोष जताया।

मूल रूप से यह कार्यक्रम विधाननगर (फांसीदेवा क्षेत्र) में होना था, जहां राष्ट्रपति मुर्मू मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होने वाली थीं। लेकिन राज्य प्रशासन ने भीड़भाड़ का हवाला देकर इसे बैगडोगरा एयरपोर्ट के पास एक छोटे वेन्यू में शिफ्ट कर दिया। आयोजकों ने आरोप लगाया कि नए स्थान पर स्टेज व्यवस्था ठीक नहीं थी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी अपर्याप्त थीं।

राष्ट्रपति मुर्मू ने सिलिगुड़ी में अपने भाषण के दौरान इस पर खुलकर नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि मूल वेन्यू इतना बड़ा था कि वहां 5 लाख लोग भी आ सकते थे, लेकिन नया स्थान इतना छोटा था कि कई संथाल समुदाय के लोग वहां नहीं पहुंच सके। “मुझे लगा कि यहां के भाई-बहन सब कार्यक्रम में नहीं जा पाएंगे। शायद प्रशासन ने सोचा कि राष्ट्रपति आएंगी, खाली जगह में कार्यक्रम करेंगी और चली जाएंगी। मुझे बहुत दुख हुआ,”

उन्होंने कहा। उन्होंने प्रोटोकॉल की चूक पर भी सवाल उठाया, क्योंकि एयरपोर्ट पर उन्हें रिसीव करने के लिए न तो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आईं और न ही कोई कैबिनेट मंत्री केवल सिलिगुड़ी के मेयर गौतम देब मौजूद थे। हालांकि, मुर्मू ने ममता को अपनी ‘छोटी बहन’ बताते हुए कहा कि उनके प्रति कोई शिकायत नहीं है और शायद वह किसी वजह से नाराज हैं। उन्होंने फांसीदेवा क्षेत्र में आदिवासी, गोरखा, राजबंगशी और बंगाली समुदायों के बीच सामाजिक सद्भाव की भी सराहना की।

पीएम मोदी की प्रतिक्रिया

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस मुद्दे पर टीएमसी सरकार को आड़े हाथों लिया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए उन्होंने कहा, “यह शर्मनाक और अभूतपूर्व है। लोकतंत्र और आदिवासी समुदायों के सशक्तिकरण में विश्वास रखने वाला हर व्यक्ति निराश है। राष्ट्रपति जी, जो खुद आदिवासी पृष्ठभूमि से हैं, ने जो दर्द व्यक्त किया है, उससे पूरे देश के लोग दुखी हैं। टीएमसी सरकार ने सभी सीमाएं लांघ दी हैं और राज्य प्रशासन इस अपमान के लिए जिम्मेदार है।” मोदी ने इसे आदिवासी विरोधी करार दिया और कहा कि यह घटना लोकतांत्रिक मूल्यों पर हमला है।

ममता बनर्जी का पलटवार

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी पर राष्ट्रपति का इस्तेमाल कर राज्य को बदनाम करने का आरोप लगाया। कोलकाता में एक धरने पर बैठीं ममता ने कहा, “बीजेपी इतना नीचे गिर गई है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का इस्तेमाल राज्य को बदनाम करने के लिए कर रही है। मैं राष्ट्रपति का सम्मान करती हूं, लेकिन अगर कोई 50 बार भी आए तो हर कार्यक्रम में शामिल होना संभव नहीं। मुझे उस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी और मैं धरने पर हूं।” उन्होंने राष्ट्रपति को सलाह दी कि राजनीति में न पड़ें और कहा कि यह सब विधानसभा चुनाव से पहले की साजिश है।

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