पुस्‍त‍क विमोचन:  ‘बुत मरते नहीं’ का विस्‍तार है ‘प्रत्याघात’

January 14, 2026 4:55 PM
Pratyaghat Book Release


नई दिल्ली। विश्व पुस्तक मेला में हाल ही में आयोजित क खास कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक ब्रह्मवीर सिंह के नए उपन्यास ‘प्रत्याघात’ का विमोचन प्रसिद्ध हिंदी लेखिका चित्रा मुद्गल ने किया। यह किताब उनकी पिछली चर्चित कृति ‘बुत मरते नहीं’ का ही विस्‍तार है, जो उस कहानी को आगे बढ़ाती है और अधूरे सवालों के जवाब देती है।

प्रभात प्रकाशन से छपी इस किताब के विमोचन कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवि पद्मश्री डॉ. सुनील जोगी, दैनिक हिंदुस्तान के प्रबंध संपादक प्रताप सोमवंशी और हरिभूमि समाचार समूह के प्रधान संपादक डॉ हिमांशु द्विवेदी उपस्थित थे।

लेखक ब्रह्मवीर सिंह ने कह कि ‘बुत मरते नहीं’ में बुराई की जीत दिखाई गई थी, जिससे कई पाठकों को लगा कि सत्य हार गया। नायक की मौत और उसके परिवार की टूटन ने लोगों को दुखी किया। इसलिए उन्होंने इस दूसरी किताब में न्याय की वापसी दिखाई है। यह उपन्यास उन सभी लोगों की कहानी है जो जीवन में हताश हो गए, अवसाद में डूबे, सत्य के रास्ते को मुश्किल मानकर टूट गए लेकिन पूरी तरह मिटे नहीं। यह किताब हताशा से निकलकर प्रतिरोध की ताकत बताती है।

प्रताप सोमवंशी ने कहा कि यह उपन्‍यास पढ़ते वक्त ऐसा लगा जैसे लेखक गजानन माधव मुक्तिबोध की धरती से आया हो, उसकी गहरी चेतना और संवेदना झलकती है। उन्होंने पत्रकारों से अपील की कि वे अपने अनुभवों को किताबों में उतारें, क्योंकि उनका जीवन समाज के ढेर सारे पात्रों और कहानियों से भरा होता है, जो साहित्य को समृद्ध बनाता है। उन्होंने अगला भाग जल्द लिखने की सलाह भी दी।

डॉ. सुनील जोगी ने उपन्यास के पहले वाक्य से बहुत प्रभावित होने की बात कहीजहाँ लिखा है कि ‘प्रत्याघात मनुष्यों के भस्म हो चुके संबंधों की राख से संबंध खोजने निकला है’। उनका कहना था कि आज के समाज में जीवन का रस और जीवंतता खत्म होती जा रही है, नीरसता बढ़ रही है। यह किताब समरसता और जिंदादिली बचाने में मदद करेगी। उन्होंने कविता के जरिए संदेश दिया कि किताबों में बिखर जाने वाले शायर कभी मिट नहीं सकते, इसलिए लिखते रहना चाहिए।

डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कहा कि ब्रह्मवीर सिंह का यह प्रयास खास है। उन्होंने रायपुर में उनकी पिछली किताबें लॉन्च की थीं, लेकिन इस बार दिल्ली में विश्व पुस्तक मेले में लाना जरूरी लगा ताकि साहित्यिक दुनिया में उनकी गंभीरता को पहचाना जाए। चित्रा मुद्गल का आशीर्वाद मिलना उनके लिए बड़ा संबल होगा, और उनका लेखन जारी रहेगा।

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