लेंस डेस्क। असम में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और नागांव लोकसभा सांसद प्रद्युत बोरदोलोई ने मंगलवार को पार्टी से इस्तीफा दे दिया और बुधवार दोपहर दिल्ली में भाजपा में शामिल हो गए। यह फैसला भाजपा की उम्मीदवार चयन बैठक से ठीक पहले आया है।
इस इस्तीफे के साथ असम में कांग्रेस के लोकसभा सांसदों की संख्या तीन से घटकर दो रह गई है। अब केवल गौरव गोगोई और रकिबुल हुसैन बचे हैं। इससे देश में कांग्रेस सांसदों की संख्या घटकर 98 हो गई है।
असम विधानसभा के 126 सीटों पर एक चरण में 9 अप्रैल को मतदान होगा, नतीजे 4 मई को आएंगे। बोरदोलोई का जाना कांग्रेस के लिए दोहरी मार है। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण” बताया और कहा कि टिकट बंटवारे पर बात हो सकती थी।

बोरदोलोई का इस्तीफा पत्र कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को भेजा गया था, जिसमें उन्होंने लिखा, “अत्यंत दुख के साथ, मैं आज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सभी पदों, विशेषाधिकारों और प्राथमिक सदस्यता से अपना इस्तीफा देता हूं।”
बोरदोलोई ने दिल्ली में असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा और असम भाजपा अध्यक्ष दिलीप सैकिया की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा। मुख्यमंत्री सरमा ने तुरंत ऐलान किया कि असम भाजपा बोरदोलोई को विधानसभा चुनाव लड़ने की सिफारिश करेगी। सरमा ने कहा, “आत्मसम्मान वाला व्यक्ति कांग्रेस में नहीं रह सकता। हम और कांग्रेस नेताओं को पार्टी में लाएंगे।”
इस्तीफे की वजह क्या रही?
बोरदोलोई ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल टिकट बंटवारे की वजह से नहीं है। उन्होंने कहा, “टिकट मिलना मेरे लिए जीवन-मरण का सवाल नहीं था। कई मुद्दे थे। मैं सिर ऊंचा करके रहना चाहता था। कांग्रेस ने मुझे बहुत दिया है, लेकिन अब घुटन महसूस हो रही थी। मेरा लगातार अपमान किया जा रहा था।” उन्होंने असम कांग्रेस नेतृत्व (खासकर प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई) पर आरोप लगाया कि उन्हें साइडलाइन किया गया और कोई सहानुभूति नहीं दिखाई गई।
एक बड़ा ट्रिगर 2025 के पंचायत चुनाव के दौरान नागांव के ढिंग क्षेत्र में उन पर हमला था, जिसमें कांग्रेस विधायक असिफ मोहम्मद नजर के सहयोगी ने उन्हें घायल कर दिया। बाद में हमलावर को जेल से रिहा कर फूलमाला पहनाई गई और कांग्रेस नेताओं ने उसे सराहा। बोरदोलोई ने इसे “सांप्रदायिक तत्वों को पार्टी में अपनाने” का उदाहरण बताया और कहा कि यह आखिरी तिनका साबित हुआ। उन्होंने जोर दिया कि यह कोई एक वजह नहीं, बल्कि लगातार अपमान और अकेलापन था।
मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने सार्वजनिक रूप से उन्हें भाजपा में आमंत्रित किया था। बोरदोलोई दिल्ली में कैंप करके ही इस्तीफा दिया और सीधे सरमा की मौजूदगी में शामिल हुए।
असम की राजनीति में बोरदोलोई का महत्व
69 वर्षीय बोरदोलोई असम कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ चेहरों में से एक थे। उन्होंने 1998 से 2016 तक मरघेरिटा से चार बार विधायक रहकर तरुण गोगोई सरकारों में मंत्री पद संभाला। 2019 और 2024 में नागांव लोकसभा सीट से दो बार सांसद चुने गए। जेएनयू से अर्थशास्त्र में एमफिल, छात्र राजनीति से शुरूआत।
वे कांग्रेस के उत्तर-पूर्वी चेहरे माने जाते थे, अच्छे वक्ता और संगठनकर्ता के रूप में उनकी पहचान रही है। 2016 में भाजपा लहर में हार के बावजूद उन्होंने पार्टी नहीं छोड़ी थी। उनके बेटे प्रतीक बोरदोलोई कांग्रेस से मरघेरिटा सीट पर उम्मीदवार है, जिस पर अब अनिश्चितता छा गई है।











