नेशनल ब्यूरो। नई दिल्ली
अमेरिका द्वारा आईआरआईएस डेना को डुबोना मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध को हिंद महासागर तक विस्तार देने का संकेत है। यह कहना है पूर्व सेनाध्यक्ष वेद प्रकाश मलिक का। X पर लिखे एक पोस्ट में वह बताते हैं कि किस तरह से भारतीय सेना हिंद महासागर के क्षेत्र में किसीभी प्रकार के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करती है।
जनरल मलिक बताते हैं कि हिंद महासागर में घटी घटना मुझे नवंबर 1988 में मालदीव में चलाये गए ऑपरेशन कैक्टस की याद दिलाता है। जिस वक़्त मालदीव सरकार को सैन्य मदद की बेहद जरूरत थी। जब हम ऑपरेशंस रूम में अपनी प्रतिक्रिया और योजनाओं पर चर्चा कर रहे थे, तब विदेश सचिव के.पी.एस. मेनन को एक टेलीफोन कॉल आया।
अमेरिकी राजदूत जॉन डीन जानना चाहते थे कि भारत मालदीव सरकार की मदद के लिए क्या करने वाला है? मेनन ने उन्हें कहा कि अमेरिका मानता है कि इस क्षेत्रीय राजनीतिक संकट में भारत का पहला अधिकार है। यदि अमेरिका से किसी तरह की मदद की जरूरत हो, तो वे विचार करेंगे। अमेरिकी नौसेना के जहाजों को माले पहुंचने में 48-72 घंटे लगेंगे।हमने अमेरिकी मदद ठुकरा दी और मिशन को सफलतापूर्वक 36 घंटों में पूरा किया।
जनरल मलिक कहते हैं कि आईआरआईएस डेना की घटना दिखाती है कि अब रणनीतिक साझेदारी में रायशुमारी से बचने वाला अमेरिका मानता है कि क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत का इस्तेमाल करते समय उसे साझेदारों से सलाह लेने की जरूरत नहीं है।
जनरल मलिक की यह टिप्पणी तब आई है जब अमेरिकी नौसेना की एक पनडुब्बी ने श्रीलंका के तट से दूर हिंद महासागर में ईरानी फ्रिगेट आईआरआईएस डेना को टॉरपीडो से डुबो दिया। यह जहाज भारत द्वारा आयोजित MILAN 2026 नौसेना अभ्यास में हिस्सा लेकर लौट रहा था। घटना में 80 से ज्यादा ईरानी नाविक मारे गए, और यह पश्चिम एशिया युद्ध को हिंद महासागर तक फैलाने का प्रतीक माना जा रहा है।








