महिला दिवस पर झारखंड के आईएएस ने सैकड़ों महिलाओं को बुरी तरह धमकाया

Jharkhand

नई दिल्ली। विश्व अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर झारखंड (Jharkhand) गिरिडीह जिले के डिप्टी कमिश्नर सैकड़ों जल स्वयंसेवकों को बुरी तरह बेशर्मी से धमकाते नजर आए। यह महिलाएं अपने हक और सम्मान के लिए सड़क पर उतरी हुई थीं।

अपने बकाया मानदेय के भुगतान की मांग को लेकर जिले के सभी 13 प्रखंडों से आई स्वयंसेवकों ने उपायुक्त कार्यालय और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया था। इस मामले में जब डिप्टी कमिश्नर रामनिवास यादव से लेंस ने बात करने की कोशिश की तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

स्वयंसेवकों ने हिन्दी दैनिक प्रभात खबर को बताया कि जब वे अपनी पीड़ा लेकर डीसी ऑफिस पहुंची तो डीसी रामनिवास यादव ने उनकी बात सुनने के बजाय उन्हें डांट-फटकार लगायी। महिलाओं ने इसे महिला दिवस पर महिला शक्ति का अपमान बताया. इसका एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल है।

अब पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने गिरिडीह डीसी से सार्वजनिक रूप से माफी की मांग की है. मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन से तत्काल स्वयंसेवकों के बकाया मानदेय का भुगतान करने की भी मांग की है।

पूर्व सीएम ने घटना को बताया महिलाओं का अपमान

पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा कि झारखंड की ग्रामीण व्यवस्था और ‘नल से जल’ योजना की असली नायक हमारी ‘जल सहिया’ बहनें हैं, जो जल जीवन मिशन के क्रियान्वयन से लेकर जल गुणवत्ता जांच और स्वच्छता सुनिश्चित करने तक का कठिन कार्य पूरी निष्ठा से करती हैं।

यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और शर्मनाक है कि 8 मार्च, अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जब पूरा देश नारी शक्ति का वंदन कर रहा था, तब गिरिडीह में अपनी वाजिब मांगों को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रही इन बहनों को जिले के डीसी की डांट-डपट और दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा।

मरांडी ने कहा – भ्रष्टाचारी है डीसी

डीसी रामनिवास यादव पर बड़ा आरोप लगाते हुए बाबूलाल मरांडी ने आगे कहा, ‘साहिबगंज के लोग बताते हैं कि इस अधिकारी का महिलाओं के प्रति नजरिया और आचरण पहले भी ठीक नहीं रहा है और अब गिरिडीह में सात महीने से मानदेय के लिए तरस रही बहनों का अपमान कर इन्होंने अपनी उसी मानसिकता का परिचय दिया है।

शायद साहिबगंज में रहने के दौरान अवैध पत्थर खनन के माध्यम से करोड़ों की काली कमाई करने वाले ऐसे अधिकारियों को अब वेतन की कीमत समझ नहीं आती, इसलिए वे इन गरीब महिलाओं की मजबूरी का मजाक उड़ा रहे हैंm जिले का मालिक बनने की गलतफहमी पालने वाले अफसरों को यह याद रखना चाहिए कि वे जनता के ‘सेवक’ हैं, ‘शासक’ नहीं।’

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now